हीरे की कीमत- ”इंसानियत”

कहते हैं हीरे की कीमत जौहरी ही आंक सकता है. यह सच भी है. पर सच्चे मन के मोती को हीरा मिल जाए, तो हीरे की कीमत जौहरी नहीं मोतीलाल ही बता सकता है.

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में 1.5 करोड़ रुपये के करीब की कीमत का हीरा पाने वाले मजदूर मोतीलाल प्रजापति का दिल सोने का निकला. उनको 42.9 कैरेट का एक बेशकीमती हीरा खुदाई के दौरान मिला था, इसे उन्होंने अपने साथी रघुवीर प्रजापति के साथ साझा करने का फैसला किया था. रघुवीर ने कभी 8मी x8 मी की जमीन लीज पर लेने के लिए 250 रुपये साझा करके मोतीलाल की मदद की थी. मोतीलाल उस मामूली-सी मदद को नहीं भूला था. भूलता भी कैसे! उस समय उसको 250 रुपये की वह मामूली-सी रकम भी न मिली होती तो वह इतनी-सी जमीन भी लीज पर नहीं ले सकता था.

बात इतनी-सी नहीं थी. सोने-से दिलवाले मोतीलाल का कहना है, ‘वह मेरा पार्टनर है और उसे मुझसे ज्यादा पैसों की जरूरत है, क्योंकि वह ज्यादा गरीब है.’ वह आगे बताते हैं, ‘मुझे पैसों की जरूरत है और मैं अपने बैंक में ट्रांसफर होने वाली राशि के लिए उत्सुकता से इंतजार कर रहा हूं, लेकिन रघुवीर को ज्यादा इसकी ज्यादा जरूरत है और उसकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है.’

सामान्यतया एक हीरे की नीलामी इसके मिलने के दो हफ्ते के अंदर हो जाती है, लेकिन इस बार चुनाव की वजह से इसे दिसंबर के आखिर तक कराए जाने की उम्मीद है. इसका कारण मध्य प्रदेश में चुनाव संहिता का लागू होना है.

पन्ना जिले में सोने-से दिलवाले मोतीलाल को हीरा मिला. हीरे की कीमत जौहरी ने आंकी 1.5 करोड़ रुपये, लेकिन मोतीलाल के लिए सोने की कीमत है- ”इंसानियत”.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।