तभी दशहरा होता है

(बाल काव्य सुमन संग्रह से बाल गीत)

अंधकार से जीते उजाला,
तभी दशहरा होता है.
शांति की हो विजय नाद पर,
तभी दशहरा होता है.
प्रेम विजित हो जब ईर्ष्या पर,
तभी दशहरा होता है.
न्यायी जीते अन्यायी पर,
तभी दशहरा होता है.
बुद्धि सफलता प्राप्त करे जब,
तभी दशहरा होता है.
पाप-मुक्त हो धरा सुहानी,
तभी दशहरा होता है.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।