नवीन विकास

बिगड़े बोलों का वातायन किसी तरह बंद ही नहीं हो रहा था. जो होगा, सो देखा जाएगा, एक बार तो अगले को सुना ही दो, की भावना का चलन अपने चरम पर था. भ्रष्टाचार रुक नहीं रहा, जुमलों और उन पर क्रियाओं-प्रतिक्रियाओं का बाजार गर्म है, ईमानदारी के दर्शन कभी-कभार ही हो पाते हैं, नारी शक्ति का असम्मान और दमन जारी है, बराबर ऐसी खबरें आने से मन का कसैलापन लगातार बढ़ता ही जा रहा था. चाहते हुए भी कैसे कहा जाए, हमें अपने देश पर गर्व है! यह सोच मन को मलीन व व्यथित किए जा रही थी. वांछित विकास के दर्शन कब होंगे, यह प्रश्न मन को झिंझोड़े जा रहा था. तभी मुझे याद आ गई, Blue mountain की पिकनिक पर देखी 15 मिनट की एक शॉर्ट फिल्म.
इस शॉर्ट फिल्म में Blue mountain के अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न भागों के Gardens और झरनों के खूबसूरत दृश्य दिखाए जा रहे थे. Blue mountain जाने का पूरा रास्ता जंगलों व सेव के खेतों के कारण अविस्मरणीय बन गया था.

अब जंगल होंगे, तो कभी-न-कभी Bush fire भी होगी ही. Bush fire का मतलब बड़े-बड़े पेड़ों में भी आग लग जाना और महीनों आग का सुलगते रहना और शनैः-शनैः सब कुछ तहस-नहस होते जाना. ऐसे में अगर प्राकृतिक वर्षा का आगमन हो जाए या आग बुझाने के लिए कृत्रिम बरसात की जाए, तो बड़े-बड़े पेड़ों के गिरे हुए बड़े-बड़े तने खूबसूरत स्लेटी रंग के हो जाते हैं. लगता है जंगल का यह हिस्सा अब कभी हरा-भरा नहीं होने पाएगा. शॉर्ट फिल्म देखते-देखते मन मुरझाने-सा लगता है.
लेकिन मौसम बदलते हैं, हालात बदलते हैं, दिन और रात बदलते हैं, एक बार फिर आग के कारण स्वाहा हुई उस जमीं पर नए अंकुर फूटने लगते हैं. कुम्हलाए मन में भी नए अंकुरों का प्रस्फुटन मन को उल्लसित कर जाता है. इन्हीं अंकुरों में पहले कोमल-किसलय कोंपलें और फिर हरे-हरे पतों का दर्शन होता है. एक दिन उन्हीं जले हुए स्लेटी रंग के रंगों के तनों की जगह खूबसूरत लाल-लाल फूल खिलते हुए दिखाई देते हैं. ये लाल फूल मन को मधुरिम कर जाते हैं और मन में एक तरह का पक्का विश्वास जमता हुआ दिखाई देता है. तब लगता है, कि एक दिन हमारा देश भी New Growth की चोटी को अवश्य छुएगा.
विनाश के बाद New Growth का विकास का मंज़र सचमुच बहुत खूबसूरत होगा.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।