प्यार की खिड़की खुली रखना

प्यार की खिड़की खुली रखना,
बाहर का मौसम कैसा भी हो,
अंदर के मौसम को सुहाना बनाए रखना,
सर्दी, गर्मी, लू के थपेड़े, बरसात हो या बरसें ओले,
मन के मौसम को सुहाना बनाए रखना.

प्यार की खिड़की खुली हो तो,
बच्चों के वात्सल्य से प्राप्त ऊर्जा ठंड भगाती है,
पत्नी के प्यार से गर्मी खुद घबराती है,
बहिन के स्नेह से मन स्नेहिल हो जाता है,
भाई का भ्रातृभाव ही साहस बन जाता है.

प्यार की खिड़की खुली हो तो,
तो प्रभु से नाता जुड़ जाता है,
हर कोई अपना बन जाता है,
मित्र तो मित्रता निभाता ही है,
राहगीर भी रहबर बन जाता है.

प्यार की खिड़की खुली हो तो,
हर दिन ‘रोज डे’ हो जाता है,
मन मिले तो ‘प्रपोज़ डे’ हो जाता है,
‘चॉकलेट डे’ से चॉकलेट की मिठास बढ़ जाती है,
‘टेडी डे’ खूबसूरत टेडी को ले आता है,
‘प्रॉमिस डे’ साथ निभाने का वादा याद करवाता है,
‘हग डे’ प्रेम और अपनत्व का अहसास कराता है,
‘किस डे’ किस-किस से नाता रखना है सिखाता है,
‘वेलेंटाइन डे’ प्यार की खिड़की खुली रखने की याद दिलाता है.

प्यार की खिड़की खुली हो तो,
हर्ष भी हर्षित हो जाता है,
हर कोई आकर्षित हो जाता है,
जमीं तो जमीं झुकी हुई है ही,
आसमां भी सजदे में झुक जाता है.

प्यार की खिड़की खुली रखना,
बाहर का मौसम कैसा भी हो,
अंदर के मौसम को सुहाना बनाए रखना,
सर्दी, गर्मी, लू के थपेड़े, बरसात हो या बरसें ओले,
मन के मौसम को सुहाना बनाए रखना.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।