जयचंदो का दमन करो

अगर राष्ट्र हित सोच रहे हो, जयचंदों का दमन करो ।
छोड़ो पंथ अहिंसा का अब ,धर्मयुद्ध का चयन करो ।

यह शिशुपाल पड़ोसी है जो, गाली पर गाली देता है।
करता है बस घात पीठ पर ,यह वादे खाली देता है ।
उगा रहा आतंक की फसल ,कई बार खुद भी झेला है,
जब मेरे आँसू झरते है,तब तब यह ताली देता है ।

हे मुरलीधर चक्र उठाओ, इस पापी का हनन करो ।
छोड़ो पंथ अहिंसा का…………………………..

कुछ भीतर के ही भेदी है, जो भारत को घाव दे रहे।
कुछ नेता आतंकवाद का पक्ष ले रहे , छाँव दे रहे ।
कुछ भारत की खाते हैं,पर पाकपरस्ती मे जीते हैं,
यही लोग उन हत्यारों को जन्म दे रहे,ठाँव दे रहे ।

ये संबल आतंकवाद के,पहले इनका शमन करो ।
छोड़ो पंथ अहिंसा…………………..

उसपे दया दिखाओ ,जो मानवता की बातें करता हो।
उस दानव को क्षमादान क्या?जो केवल जीवन हरता हो।
डसते हैं भारत को ये, अब इनका शीश कुचलना होगा!
उसको दूध पिलाना छोड़ो, जो भुजंग हमको डसता हो।

हे चामुंडा पुत्रों ! रिपु के शोणित से आचमन करो ।
छोड़ो पंथ अहिंसा…………………

————- ——–डॉ. दिवाकर दत्त त्रिपाठी
आकस्मिक चिकित्साधिकारी
स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय ,
प्रयागराज

परिचय - डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी

नाम डॉ दिवाकर दत्त त्रिपाठी आत्मज श्रीमती पूनम देवी तथा श्री सन्तोषी . लाल त्रिपाठी जन्मतिथि १६ जनवरी १९९१ जन्म स्थान हेमनापुर मरवट, बहराइच ,उ.प्र. शिक्षा. एम.बी.बी.एस. पता. रूम न. ,१७१/१ बालक छात्रावास मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज इलाहाबाद ,उ.प्र. प्रकाशित पुस्तक - तन्हाई (रुबाई संग्रह) उपाधियाँ एवं सम्मान - साहित्य भूषण (साहित्यिक सांस्कृतिक कला संगम अकादमी ,परियावाँ, प्रतापगढ़ ,उ. प्र.) शब्द श्री (शिव संकल्प साहित्य परिषद ,होशंगाबाद ,म.प्र.) श्री गुगनराम सिहाग स्मृति साहित्य सम्मान, भिवानी ,हरियाणा अगीत युवा स्वर सम्मान २०१४ अ.भा. अगीत परिषद ,लखनऊ पंडित राम नारायण त्रिपाठी पर्यटक स्मृति नवोदित साहित्यकार सम्मान २०१५, अ.भा.नवोदित साहित्यकार परिषद ,लखनऊ इसके अतिरिक्त अन्य साहित्यिक ,शैक्षणिक ,संस्थानों द्वारा समय समय पर सम्मान । पत्र पत्रिकाओं में निरंतर लेखन तथा काव्य गोष्ठियों एवं कवि सम्मेलनों मे निरंतर काव्यपाठ ।