स्वास्थ्य

एक चमत्कारिक नुस्खा

जैसा के ब्लॉग का शीर्षक है, आज हम आपको एक चमत्कारिक नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं, लेकिन उससे भी पहले बात फटाक-फटाक- 7 की.
ब्लॉग फटाक-फटाक- 7 में हमने हमेशा की तरह बहुत कुछ लिखा था, उनमें दो बातें विशेष थीं.
1. जीवनोपयोगी सूत्रात्मक काव्योक्ति में हमने लिखा था- ‘सीखना कभी बंद न करो, क्योंकि जिंदगी कभी सिखाना बंद नहीं करती.’
हम कोशिश करते हैं कि वही कुछ अपने ब्लॉग में लिखें, जो कुछ हम करते हैं या करने वाले हैं. इस जीवनोपयोगी सूत्रात्मक काव्योक्ति के अनुसार हमने सीखना कभी बंद नहीं किया और हरदम कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहते हैं.
2. सुदर्शन खन्ना भाई ने हमें एक पोस्टर भेजा था, जिसमें आंखों की सेहत के लिए एक सरल व उपयोगी नुस्खा लिखा हुआ था. यह नुस्खा हमें लगभग 20 दिन पहले मिला था. हमें नुस्खा बहुत सरल व उपयोगी लगा- ”अगर आप अपनी आंखों की परवाह करते हैं, तो सोने से पहले दोनों पैरों के तलवों की मालिश करें.”
हमने उसी दिन से इस नुस्खे का प्रयोग करना शुरु कर दिया. हमने रात को सोने से पहले वैसलीन से दोनों पैरों के तलवों की मालिश करनी शुरु कर दी, साथ ही नहाते समय सरसों के तेल से भी ऐसा ही करना शुरु कर दिया.
नतीजा- 20 दिन में ही हमारी आंखों की रोशनी में सुधार हो गया.
कैसे पता लगा?
1. हमने नया चश्मा बनवाया था, पर वह ठीक काम नहीं कर रहा था. दूर की नजर में भी दिक्कत आ रही थी, पास की नजर में भी. कुछ दिन से मुझे महसूस हो रहा था कि मुझे कम्प्यूटर पर काम करने में पहले जो दिक्कत आ रही थी, वह नहीं आ रही थी.
2. मुझे चिकनी सतह वाली दवाई की पैकिंग पर एक्सपायरी डेट देखने में भी दिक्कत आ रही थी. दो दिन पहले अचानक वह दिक्कत भी दूर हो गई.
3. मेरा हौसला बढ़ा और मैंने सिलाई की मशीन पर काम करना शुरु किया. 2 घंटे के काम में 4-5 बार सुई में धागा भी डालना पड़ा, जो बिना किसी दिक्कत के आराम से पड़ गया. उससे पहले मुझे सुई का छेद देखने और धागा डालने के लिए एक बहुत पुराने चश्मे का प्रयोग करना पड़ता था.
यह तो रही हमारी बात, अगर आप भी हमारे इस प्रयोग के नतीजे से सहमत होकर कुछ नया सीखना और लाभ उठाना चाहते हैं, तो इस नुस्खे को आजमा सकते हैं, पर विश्वास के साथ. विश्वास रखना अनिवार्य है. यह पोस्टर बनाकर वायरल करने वाले को भी शुक्रिया और सुदर्शन खन्ना भाई को भी हार्दिक धन्यवाद.

कभी-कभी कोई छोटी-सी बात भी बड़ा लाभ पहुंचा देती है, आप भी अपने ऐसे अनुभवों का उल्लेख कामेंट्स में कर सकते हैं, ताकि हम सभी लाभान्वित हो सकें.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

3 thoughts on “एक चमत्कारिक नुस्खा

  1. सुदर्शन खन्ना भाई, आपको और बहुत-से अनेक पाठकों को भी बहुत-बहुत धन्यवाद. आप लोग पहले भी बहुत-से उपयोगी नुस्खे और अनोखे समाचार भेजते रहे हैं, जिन्हें हमने बहुत-से ब्लॉग्स में स्थान दिया है और हमारे पाठक लाभान्वित हो सके हैं.

    1. आदरणीय दीदी, सादर प्रणाम. कोई जानकारी साझा हुई और किसी को लाभ हुआ तो बहुत बढ़िया हुआ. आपको इस नुस्खे से काफी लाभ हुआ यह जानकर अन्य पाठक भी इसे आजमाएंगे और निश्चित रूप से कुछ न कुछ लाभ उठाएंगे. कुछ ऐसे नुस्खे होते हैं जिनमें कुछ खाने या पीने की सलाह दी जाती है. इन स्थितियों में चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए. हर मानव शरीर की विभिन्न संरचना होती है और उसी प्रकार से नुस्खा सुझाया जाता है. यहाँ तक कि योग भी प्रशिक्षित योगाचार्य की निगरानी में करना चाहिए. वर्तमान नुस्खा जिसमें पैरों के तलवों की मालिश करना आँखों के लिए उपयोगी बताया गया है इसे अपनाने में कोई हानि नहीं है अपितु कुछ न कुछ लाभ ही होगा. सभी पाठकों के स्वस्थ और दीर्घायु होने की कामना करता हूँ. आदरणीय दीदी, अत्यंत उपयोगी ब्लॉग के लिए हार्दिक आभार.

      1. प्रिय ब्लॉगर सुदर्शन भाई जी, आपने सही कहा है- ”हर मानव शरीर की विभिन्न संरचना होती है और उसी प्रकार से नुस्खा सुझाया जाता है. यहाँ तक कि योग भी प्रशिक्षित योगाचार्य की निगरानी में करना चाहिए.” हमारे हाथों-पैरों में पूरे शरीर की नसें होती हैं. सम्भवतः हमें सही नस हाथ आ गई होगी, जिससे वांछित लाभ हुआ है. ब्लॉग का संज्ञान लेने, इतने त्वरित, सार्थक व हार्दिक कामेंट के लिए हृदय से शुक्रिया और धन्यवाद.

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