नदी का पुनर्जन्म

पुनर्जन्म के अनेक किस्से सुने हैं, पर नदी के पुनर्जन्म के बारे में आज पहली बार सुना. यह पुनर्जन्म उत्तर प्रदेश के सीतापुर में हुआ.
एक समय सीतापुर में सरायन नदी का प्रवाह हुआ करता था, वहां के लोग इस बात को भूल ही चुके थे. सरायन नदी एक गंदे नाले के रूप में परिवर्तित हो चुकी थी, क्योंकि कूड़े से पटकर नदी का इलाका बन गया था डंपिंग इलाका. नदी का पानी सब पीते थे, लेकिन गंदे नाले का पानी भला कैसे पिया जाए!

विधायक राकेश राठौर बचपन में जब अपने पिता के साथ नदी के किनारे आते थे, तो पानी बहुत साफ हुआ करता था. लोग नदी में नहाते थे और पानी में मछलियां तैरती हुई नजर आती थीं. जैसे-जैसे वह बड़े हुए, नदी एक गंदे नाले में बदल गई. बदबू और गंदगी के कारण लोगों ने उस ओर जाना बंद कर दिया और शहर का कचरा वहां डंप होने लगा. लोग इस नदी को नाला कहने लगे. उन्होंने विधायक बनते ही तय किया कि वह इस नदी को फिर से जीवित करेंगे.
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्‌ ॥
भारत के इस सीतापुर गांव में कूड़े से पटकर डंपिंग इलाका सरायन नदी के पुनर्जन्म के लिए उदय हुआ राकेश राठौर का. राकेश राठौर यहां के विधायक हैं. उनके व्यक्तिगत प्रयास में स्थानीय लोगों का मिला सहयोग और नजर आने लगी नदी.
नाला बन चुकी नदी फिर से जीवित हो गई है. गुजरात के साबरमती और लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर सरायन नदी के किनारे एक छोटा-सा रिवर फ्रंट तैयार किया जा रहा है. सरायन नदी में आया यह बदलाव यहां के विधायक राकेश राठौर के प्रयासों से सफल हुआ है. दूसरे शब्दों में राकेश राठौर के प्रयासों से ही सरायन नदी का पुनर्जन्म संभव हो सका है.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।