ठक-ठक, ठक-ठक-12

ठक-ठक, ठक-ठक-1
”ठक-ठक, ठक-ठक”.
”कौन है?”
”मैं हूं राजस्थान का एक कलाकार.”
”आपका नाम और आपकी विशेषता.”
”मेरा नाम शरद माथुर और मेरी विशेषता मेरा रामचरितमानस-लेखन.”
”लीजिए, रामचरितमानस तो तुलसीदास ने लिखी थी.”
”जी, आपने बिलकुल दुरुस्त फरमाया है. उन्होंने इसे बांस की कलम या कबूतर के पंख की कलम से लिखा होगा, मैंने ऑइल पेंट और ब्रश का इस्तेमाल कर 3000 पेज की रामचरितमानस लिखी है.”
”वाह! आपको रामचरितमानस लिखने में कितने साल लगे?”
”मुझे रामचरितमानस लिखने में 6 साल लगे. मैं हर रोज दो पेज लिखता था, इसमें मुझे 3 से 5 घंटे का वक्त लगता था.”
”कलाकार शरद भाई, आपकी इस कला को हमारे कोटिशः नमन.”

 

ठक-ठक, ठक-ठक-2
”ठक-ठक, ठक-ठक”.
”कौन है?”
”मैं हूं पायल जांगिड़.”
”आपकी क्या विशेषता है?”
”मुझे बाल विवाह और बाल श्रम के खिलाफ काम करने के लिए बिल गेट्स फाउंडेशन ने चेंजमेकर अवॉर्ड दिया गया है.”
”आपको यह सम्मान कब और कहां मिला?”
”मुझे यह सम्मान उसी कार्यक्रम में मिला, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी को ग्लोबल गोलकीपर्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है.”
”आप चेंजमेकर कैसे बनीं?”
”मेरी उपलब्धि कई मायनों में अहम है. परिवार वाले मेरा बाल विवाह करना चाहते थे, लेकिन मैंने इनकार कर दिया. माता-पिता को मेरी जिद के आगे झुकना पड़ा. इसके बाद मैंने हर बच्चे को बाल विवाह के चंगुल से निकालने का निर्णय लिया. मैंने गांव के हर घर जाकर बेटे-बेटी को पढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया. मेरी मेहनत रंग लाई. गांव वालों का कहना है कि बीते कई सालों से एक भी बाल विवाह नहीं हुआ.”
”पायल जी, आपकी इस उपलब्धि को हमारे कोटिशः नमन.”

 

ठक-ठक, ठक-ठक-3
”ठक-ठक, ठक-ठक”.
”कौन है?”
”हम हैं गेविन और एलिस मुनरो.”
”कौन गेविन और एलिस मुनरो?”
”हम इंग्लैंड में रहने वाले दम्पत्ति हैं.”
”आपकी विशेषता?”
”हम फर्नीचर के आकार में पौधे उगा रहे हैं.”
”इसका लाभ?”
” इस तरह से पौधे उगाने से फर्नीचर बनाने के लिए कम से कम लकड़ियां काटनी पड़ेंगी.”
”आपकी अब तक की उपलब्धि?”
”हमने अब तक तक 250 कुर्सी, 100 लैंप और 50 मेज आकार के पौधे उगाए हैं.”
”हम सबके लिए आपका कोई विशेष संदेश?”
”किसी 50 साल पुराने पेड़ को काटकर फर्नीचर बनाने की बजाय पौधे को ही फर्नीचर के रूप में उगाना बेहतर है. इस तरीके से फर्नीचर बनाते वक्त वेस्ट लकड़ियां भी नहीं निकलेंगी.”
”पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने और वृक्षों को न काटने के आपके इस आइडिया को हमारे कोटिशः नमन.”

 

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”ठक-ठक, ठक-ठक”.
”कौन है?”
”मैं हूं हर्षा.”
”कौन हर्षा?”
”मैं तेलंगाना से हर्षा बोल रहा हूं.”
”आपकी विशेषता?”
”मैंने ट्रेडमिल पर 45 मिनट चलते हुए पुलवामा हमले में शहीद हुए 40 जवानों की पेंटिंग बनाई है. इसलिए मेरा नाम नाम गिनेस वर्ल्ड रेकॉर्ड में शामिल हुआ है.”
”वाह! और?’
”हाल ही में मुझे दुबई नैशनल डे पर अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था. वहां मैंने किंग का लाइव पोर्ट्रेट बनाया था जिसके लिए मुझे इंडियन फास्टेस्ट आर्टिस्ट का अवॉर्ड मिला था.”
”आपकी गाथा तो बहुत रोचक और प्रेरक है, अपने बारे में और कुछ बताइए.”
”पहली बार 2012 में गिनेस बुक ऑफ रेकॉर्ड और इंडियन बुक ऑफ रेकॉर्ड में मेरा नाम शामिल हुआ था. तब मैंने 24 घंटे में नॉनस्टॉप 507 पोर्ट्रेट तैयार किए थे. इस दौरान मैं एक मिनट के लिए भी बाथरूम नहीं गया था और न ही कुछ खाया था.”
”इन दिनों आप क्या कर रहे हैं?”
”इन दिनों मैं अगले साल लंदन में होने वाली एक प्रतियोगिता के लिए वह ट्रेडमिल पर चलकर 45 यूएस प्रेजिडेंट के पोर्ट्रेट तैयार करने की तैयारी कर रहा हूं. इसमें प्रॉजेक्टर के जरिए तस्वीरें दिखाई जाएंगी. मेरी तमन्ना है, कि एक मिनट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइव पोर्ट्रेट तैयार करने की भी है.”
”आपकी मेहनत, लगन, शिद्दत और कला को हमारे कोटिशः नमन.”

 

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”ठक-ठक, ठक-ठक”.
”कौन है?”
”मैं यूपी बुंदेलखंड के जखनी गांव का उमाशंकर पांडेय हूं.”
”आपकी विशेषता?”
”मेरी विशेषता तो कोई खास नहीं है, मैंने तो बस पानी के लिए एक मुहिम चला रखी है, जिससे जखनी गांव पानीदार हो गया है. अब इजराइली वैज्ञानिक भी मुझसे गांव-शहर को पानीदार बनाने के गुर सीखने के लिए आ रहे हैं.”
”हमें भी इस बारे में कुछ बताइए.”
”वर्ष 2005 में दिल्ली में जल और ग्राम विकास को लेकर एक कार्यशाला हुई थी. उसमें तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने बिना पैसे और बिना तकनीक खेत पर मेड़ बनाने की बात कही थी. हमारे गांव में कोई किसान ऐसा नहीं कर रहा था. इसलिए मैंने फावड़े से अपने पांच एकड़ खेत की मेड़ बनाई और पानी को रोका. नवंबर में धान, दिसंबर में गेहूं और अप्रैल में दाल-सब्जी की फसलें लीं. पहले पांच किसानों ने अनुसरण किया, फिर 20 किसान आगे आए, फिर सारा गांव और अब तो दुनिया-जहान के लोग इस गुर को अपनाने को आतुर हैं.”
”और कुछ भी बताइए.”
”मेड़ बनाने से आठ महीने खेत में पानी रहता है. बाकी चार महीने नमी बनी रहती है. मिट‌्टी की उर्वरक शक्तियां, खनिज-लवण बहने से बच जाते हैं. इससे भूजल स्तर बढ़ा और किसान मनपसंद फसल ले पाए. गांव के कुओं में पांच फीट पर ही पानी मिल रहा है. सूखे के चलते शहर पलायन कर गए 2000 युवा गांव लौट आए हैं.”
”उमाशंकर पांडेय जी, गांव को पानीदार बनाने के आपके इस गुर को हमारे कोटिशः नमन.”

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।