ब्लॉग/परिचर्चा

प्रतिक्रियाओं की तरुणाई: शादी की सालगिरह मुबारक रविंदर भाई

ब्लॉगर भाई रविंदर सूदन के विवाह की सालगिरह पर विशेष

प्रिय रविंदर भाई जी, आपको विवाह की सालगिरह की कोटिशः बधाइयां और शुभकामनाएं.
आप सपरिवार सुखी-सम्पन्न, स्वस्थ और खुशहाल रहें, यही हमारी मनोकामना है. आपके जीवन का गीत सुर-लय-ताल सतरंगी सुरों से सजा रहे यही हमारी हार्दिक कामना है. आपकी लेखनी नवसृजन का दायित्व निभाती रहे, अपना ब्लॉग को ओजस और प्रखर प्रकाशकीय किरणों से आलोकित करती रहे.

यों तो हमारे सभी सुधिजनों की प्रतिक्रियाएं लाजवाब-बेमिसाल होती हैं, फिर भी सभी की कुछ खास विशेषताएं हैं. इन विशेषताओं का उल्लेख हम संयोग पर संयोग श्रंखला में विस्तार से कर चुके हैं, रविंदर भाई की प्रतिक्रियाओं की विशेषता है उनकी तरुणाई. जैसे तरुणाई झूमती-मचलती-बिछलती चलती चली जाती है, रविंदर भाई की प्रतिक्रियाएं तरुणाई में झूमती-मचलती-बिछलती चलती चली जाती हैं, लेकिन मर्यादा का दामन मजबूती से थामे रहती हैं.

रविंदर भाई की प्रतिक्रियाओं में ब्लॉग का सार तो होता ही है, साथ ही चुटकुले, अल्हड़ अंदाज, शेरो-शायरी आदि सब कुछ के अतिरिक्त रोचकता भी भरपूर होती है. कभी-कभी तो प्रतिक्रिया शुरु से ही इस अंदाज में चलती है, कि हम भूल जाते हैं, कि ब्लॉग का विषय क्या है. रविंदर भाई यह नहीं भूलते और नशीले-जोशीले अंदाज को कायम रखते हुए प्रतिक्रिया को लाजवाब-बेमिसाल बना देते हैं. शेष बातें आप लोग अपने कामेंट्स में बताएंगे, हम कुछ उदाहरण दिए देते हैं-

प्रतिक्रियाओं के जादूगर रवि भाई, की लेखनी ब्लॉग्स पर भी उतना ही गज़ब ढाती है, जितना प्रतिक्रियाओं पर. अभी हाल ही में रवि भाई ने अपना ब्लॉग पर रविंदर सूदन के सौजन्य से गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व 550वां प्रकाश पर्व मनाया गया, जो लगातार 45 दिनों तक चलता रहा. सचमुच यह वह प्रकाश पर्व था, जिसने दिलों को प्रकाश पर्व बना दिया. प्रकाश पर्व के समापन पर गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व (अंतिम) भाग- 45 में रवि भाई ने लिखा था-

”आदरणीय दीदी, मुझ पर तो ब्लॉग का बहुत अधिक प्रभाव पड़ा है. गुरु जी के आय का दसवां भाग गरीबों को देना, जरूरतमंदों की मदद, इत्यादि के उपदेशों को प्रयोगों में लाने के लिये रास्ते भी दिखाई पड़ रहे हैं. विदेश में तो बीमारी के दौरान गाजर का जूस पीता था, कई महीने तक, जूस निकालने के बाद बचा गूदा फेंकना पड़ता था, अफसोस होता था, किसी पशु तक को खिला नहीं सकते. यहाँ कितने लोगों को छोटी-छोटी जरूरत के लिये, तरसते देखकर, ठंड में नंगे पैर घूमते बच्चे, देखकर करने को बहुत कुछ है. दस हजार में खरीदे लोगों से लोग बीस-बीस साल से काम करवा रहे हैं, वीडियो देखा, खाने को दो रोटी फेंक देते हैं. लुधियाना की एक संस्था, ऐसे लोगों को छुड़वा कर उनकी सेवा करती है.”
-रविंदर सूदन

रवि भाई, शिद्दत से चाहत हो एक, तो रास्ते निकल आते हैं अनेक! अब कुछ और प्रतिक्रियाएं-

ब्लॉग ऑस्ट्रेलिया: दो कविताएं-

1. you– नहीं होता बारिश का कोई मौसम,
me–ज्यादा खुशी हो या ज्यादा हो गम,
बरस पड़ता है पानी झमा-झम,
गर्मी बढ़ जाती है तो पसीना आता है,
आस्ट्रेलिया सा बनाया है उसने शरीर का भी मौसम.
you–जब जंगलों में लग जाती है आग,
तो बारिश आ जाती है,
me–बुझाते हैं मीठे बोल आग को,
किसी बात से जब तन बदन में आग लग जाती है,
you–वहां रखते हैं लोग साथ हमेशा छतरियां,
न जाने किस समय बारिश आ जाए,
me–यहाँ जुबां पर लोग रखते हैं छुरियाँ,
ना जाने किस समय पलट कर जवाब देना पड़ जाए.
2. सुना है बहुत बारिश है तुम्हारे शहर में, ज्यादा भीगना मत..
अगर धुल गई सारी ग़लतफहमियां, तो फिर बहुत याद आएंगे हम.
3. आज मौसम कितना खुश गंवार हो गया,
खत्म सभी का इंतज़ार हो गया,
बारिश की बूंदें गिरी कुछ इस तरह से,
लगा जैसे आसमान को ज़मीन से प्यार हो गया.

कितनी खुशबहार कविता है!

ब्लॉग फिर सदाबहार काव्यालय- 50

द्विवेदी जी के लिए :
चींटी में हूँ, पक्षी में या पशु में हूँ,
सबको लगता प्यारा, बचपन हूँ,
क्योंकि…मैं बचपन हूँ मैं बचपन हूँ, मैं ही हूँ सबका स्वर्ण काल
हाँ मैं बचपन हूँ।
ज़हीर अली सिद्दीक़ी जी के लिए :
बचपन से शुरू होकर, प्यारा सा यह माया का जाल,
कर्णप्रिय, हे बाल्यकाल!
तुझमें बसता है स्वर्गकाल ।
कुसुम सुराणा जी के लिए :
भोर प्रकृति का बचपन,
दोपहर जवानी,
संध्या, संध्या प्रकृति की ।
निशा, अंत हर दिन की, नयी सुबह, शुरुआत प्रकृति के बचपन की ॥
लीला तिवानी जी के लिए :
पुरातन बचपन की भले ही तपन हूँ,
पर मैं आधुनिक बचपन हूं ।

ब्लॉग बाल गीत: आपके-हमारे- 5 पर रवि भाई और हमारी जुगलबंदी-

आदरणीय सुदर्शन जी,
छोटे-छोटे काम बताओ,
छोटी-छोटी बात सिखाओ,
बातों में न हमें टरकाओ,
आए हो तो सीख देकर जाओ.

रवि भाई,
छोटे-छोटे काम करो तुम,
छोटे-छोटे वृक्ष लगाओ,
छोटे वृक्ष ही बड़े बनेंगे,
अभी से देश को बड़ा बनाओ.

आरिफ ख़ान जी, तस्लीमात, मां तस्लीमात, करेंगें फुर्सत में मुलाकात, और फिर बात.

फुरसत से मुलाकात की बात मत मत करिए,
फुरसत का क्या भरोसा!
फुरसत तो फुर्र हो जाती है!

आदरणीय दीदी,
छोटे हैं हम फिर भी जग में,
काम बड़े कर जाएंगे,
जितने पेड़ कटेंगें देश में,
दुगुने उससे लगायेंगें.

रवि भाई,
आपके इस बाल गीत ने तो कमाल कर दिया,
जिसने भी पढ़ा, उसको आपकी लेखनी का कायल बना दिया.

आदरणीय चंचल बहन जी,
आस मेरी हैं छोटी-सी,
दादा-दादी का ढेर सारा प्यार-दुलार मिले,
खेलें ऐसे हम आंगन में,
जैसे ढेर सारे फूल खिलें. सुन्दर कविता.

रवि भाई,
आस है बच्चों की छोटी-सी,
ऐसे बाल गीत आप लिखते जाएं,
छोटी-सी ई.बुक बन जाए,
हम बस उसको पढ़ते जाएं.

आदरणीय दीदी, सादर नमन.
जय भारत मैं गाऊं,
इस मिट्टी की कसम में खाऊँ,
जिस मिट्टी में बड़ा हुआ,
उसकी महिमा के गीत सदा गुनगुनाऊँ,
सभी सुन्दर बाल गीत. बहुत अच्छे लगे.

रवि भाई,
जय भारत. जय-जय भारत मैं गाऊं,
पर्यावरण को शुद्ध बनाऊं,
विरोध भले हो, गतिरोध नहीं,
सबको ऐसा सबक सिखाऊं.

रविंदर भाई की प्रतिक्रियाओं की तरुणाई के कुछ और उदाहरण देखिए. सबसे पहले एक बहुत पुरानी रचना पर-

ब्लॉग वार्निंग (लघुकथा)
आदरणीय दीदी, बहुत शानदार लघकथा. एक व्यक्ति बीमार पड़ा था. यमराज लेने आ गये. व्यक्ति आप कौन ? ‘यमराज’ व्यक्ति:आपने तो आने से पहले मुझे वार्निंग भी नही दी सीधे लेने पहुंच गये ? यमराज: मैने तुझे पहली वार्निंग दी तेरे बॉल काले से सफेद करके, दूसरी वार्निंग दी, तेरे दात तोड़ने शुरु किये तुझे फिर भी समझ नही आई ? तीसरी वार्निंग दी तेरे आँखों की रोशनी कमजोर करके. चौथी और आखिरी वार्निंग दी जब तू अपने पैरौ से चलने पर लड़खड़ाने लगा, अब तुझे और कितनी वार्निंग दी जाती ? एक व्यक्ति अस्पताल में भरती था, आपरेशन हो रहा था. आंख खुलने पर व्यक्ति: डाक्टर साहब क्या मेरा आपरेशन सफल रहा ? में डाक्टर नही, चित्रगुप्त हूँ, तेरा आपरेशन करने वाला डाक्टर तेरी मौत के बाद नीचे तेरे घरवालों से पैसे वसूल कर रहा है.

ब्लॉग अंतिम चेतावनी (लघुकथा)
आदरणीय दीदी, सादर नमन. गम की अंधेरी रात में दिल को ना बेकरार कर, सुबह जरूर आयेगी, सुबह का इंतजार कर, खुद से तो बदगुमाँ ना हो, खुद पे तो एतबार कर, सुबह जरूर आयेगी सुबह का इंतज़ार कर, जिस पे ना दिल बहल सके, ऐसी खबर से फायदा ? रात अभी ढली कहाँ, साबे सहर से फायदा ले, बहार आयेगी, दौरे फ़िज़ा गुजार कल, सुबह जरूर आयेगी, सुबह का इंतजार कर.

रविंदर भाई की प्रतिक्रियाओं की तरुणाई का यह आलम देखिए एक नई-ताजी रचना पर-

ब्लॉग यादों के झरोखे से-15
आज सुबह हमारे चौबारे पर कबूतर आया,
उसने और भी बहुत कुछ बताया।
चोंच मारकर खोद खोद कर तंज पर “पुनर्विचार” करने का पाठ पढ़ाया ।
पर्यावरण से छेड़छाड़ को “संगीन जुर्म” ठहराया ।
अनोखे ढंग से ब्लॉगरों से मिलवाने की स्टाइल से सबको “अवाक” कराया।
पंखों से हम उड़ते हैं, “हौसले के पंख” से इन्होने ड्राइविंग लाइसेंस पाया।
बेटी के साथ वही हुआ जो खुद किया था, “पश्चाताप चक्र” ऐसा चलाया ।
ऑस्ट्रेलिया फायर ने “नयी आस” को जगाया।
बंजर समाज को सोचने को “विवश” करवाया।
फिर कभी बताएंगें उसने और भी क्या-क्या बताया।

रवि भाई, कितनी मेहनत की आपने इस प्रतिक्रिया को लिखने के लिए, लेकिन प्रतिक्रिया एकदम सटीक और चुस्त-दुरुस्त है. वैसे हमें मालूम है कि आप बड़े मन से चस्के लेकर प्रतिक्रिया लिखते हैं. आप भले ही ब्लॉग पहले पढ़ लेते हैं और फिर उस पर मनन करने के बाद प्रतिक्रिया लिखते हैं. प्रतिक्रिया लिखने से आपके मन को सुकून मिलता है, यह बात आप पहले कई बार हमें लिख चुके हैं.

रविंदर भाई की इस विशेषता को तो आप जानते ही हैं, कि उनको विशेष सदाबहार कैलेंडर से विशेष लगाव है. लगभग सभी विशेष सदाबहार कैलेंडर्स में रवि भाई द्वारा भेजे गए सुविचार या अनमोल वचन होते हैं. एक बार हमें विशेष सदाबहार कैलेंडर प्रकाशित करने में देर हो गई थी, तो रवि भाई ने अपने ब्लॉग पर अपने तरीके से ही विशेष सदाबहार कैलेंडर प्रकाशित कर दिया. यह तो आपने देखा ही होगा कि विशेष सदाबहार कैलेंडर की प्रतिक्रियाओं में रवि भाई इतनी प्रतिक्रियाएं भेज देते हैं, कि एक और नया विशेष सदाबहार कैलेंडर बन जाता है.

प्रिय रविंदर भाई जी, आपको विवाह की सालगिरह की कोटिशः बधाइयां और शुभकामनाएं.

रविंदर सूदन पर लीला तिवानी के ये ब्लॉग्स भी पढ़ें-
दिलखुश जुगलबंदी-6
विशेष सदाबहार कैलेंडर-65
550वें प्रकाश पर्व के प्रकाशाई: रविंदर भाई
रविंदर भाई: शतकीय ब्लॉग की बधाई
संयोग पर संयोग-7
हमारी हिम्मत तो देखो!
संवेदनशील-आध्यात्मिक रविंदर भाई: जन्मदिन की बधाई
Control we (V)

रविंदर सूदन के ब्लॉग की वेबसाइट है-
https://readerblogs.navbharattimes.indiatimes.com/author/ravisudanyahoo-com/

जय विजय की साइट है-
http://jayvijay.co/author/ravindersudan/

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “प्रतिक्रियाओं की तरुणाई: शादी की सालगिरह मुबारक रविंदर भाई

  1. रवि भाई, आपको विवाह की सालगिरह की अग्रिम कोटिशः बधाइयां और शुभकामनाएं. युवा प्रकृति का एक उपहार है, लेकिन उम्र काम करने की एक कला है. आपने इस कला को विकसित कर लिया है, इसलिए आप चिर युवा हैं और आपकी प्रतिक्रियाओं में तरुणाई. एक बार फिर शादी की सालगिरह मुबारक रविंदर भाई.

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