कविता

मुहब्बत तुमसे बेशुमार करता हूँ

कवि की प्रेरणा और नायिका कोमल को समर्पित-
आज चांदनी रात है
चांदनी में नहाई मुस्कराती इस रात में
तारों से सजी हसीन खिलखिलाती इस रात में
मौका भी है, दस्तूर भी है
मेरी प्रिये, शायद आज आएगी तू
तूने आने का वादा किया है
इस सुहानी रात में मिलने का वादा किया है
मुहब्बत में जो कसम खाई थी कभी तूने
वो भी निभाने का वादा किया है
अब आ भी जाओ प्रिये
तेरा इंतज़ार करता हूँ
मुहब्बत तुमसे बेशुमार करता हूँ
न तू पहले कभी आई
न ही आज आएगी, घंटों इंतज़ार करवाएगी
आसान नहीं यह इश्क़ किसी से दिल लगा लेना
फिर डर के दुनिया से अपना दामन छुड़ा लेना
हमेशा प्यार में मैंने तुमसे वफ़ा की है
तुमको भरोसा है नहीं मुझ पर
हर दफा तूने जफ़ा की है
टूट कर चाहा तुम्हें मैंने तू मेरे से दूर भागी है
हर तरह से झूठ बोल छल किया मुझ से
हो गई मेरी तौबा, अब जा के मेरी ज़मीर जागी है
है पता तुमको बहुत मैं तुम से प्यार करता हूँ
तेरी हर अदा पे जान कुर्बान करता हूँ
अब बहुत हो गया, तेरे झूठे वादों पे जी लिया मैंने
जामें मोहब्बत समझकर जहर तुमसे पी लिया मैंने
तेरे प्यार में जो मैंने जख्म खाये हैं
मेहरबानी तेरी समझकर सी लिया मैंने
अगर आना नहीं था कह तो जातीं
मज़बूरी है अगर तेरी दुःख मेरा भी कम नहीं है प्रिये
जब तू नहीं आती
तेरी यादें सताती बहुत हैं
रुलाती बहुत हैं
दुःख मेरा बढ़ाती बहुत हैं ,
तुम्हें प्यार करना नहीं आता पर कर लिया तूने,
सुख चैन मेरा छीनकर सब हर लिया तूने
तुम्हें अपना समझकर सब दे दिया मैंने
साथ जीना मरना तो क्या, निभाया भी नहीं तूने
सुनो प्रिये, तुम्हें इतना ही कहता हूँ
अगर तुमको किसी से इश्क़ हो जाये
यह इतना आसान नहीं होता
यह इश्क़ का दरिया है, उस पार जाना पड़ेगा
प्रेम का यह गीत है, इसको गाना पड़ेगा
काटों भरे रास्ते हैं, इन पे चलना पड़ेगा
आँसू पीने पड़ेगें, गम खाना पड़ेगा
अगर करती हो कोई वादा, निभाना भी पड़ेगा
ज़िंदगी का सफर बहुत लम्बा है,
अब आ भी जाओ प्रिये
तेरा इंतज़ार करता हूँ
मुहब्बत तुमसे बेशुमार करता हूँ,
मुहब्बत तुमसे बेशुमार करता हूँ,
मुहब्बत तुमसे बेशुमार करता हूँ.
-कृष्ण सिंगला

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “मुहब्बत तुमसे बेशुमार करता हूँ

  1. प्रिय कृष्ण भाई जी, कमाल की कविता लिखी है आपने! प्रेम की पीर को मुखर कर दिया.

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