लघुकथा

मां अम्बिके!

”मां अम्बिके, हमेशा की तरह इन नवरात्रों में भी आप अपनी सभी बहिनों के साथ आ गई हैं, आपका हार्दिक स्वागत है मां अम्बिके.” मां अम्बिके का अभिनंदन करते हुए सुचेता ने कहा.

”मुझे तो अपने समय से आना ही था.” मां अम्बिके ने सुचेता के मस्तक पर अपना वरद हस्त रखते हुए कहा.

”मां, आपका शक्ति आराधन पर्व यानी नवरात्रि महोत्सव साल में दो बार मनाया जाता है, चैत्र नवरात्रि पर्व और शारदीय नवरात्रि पर्व. चैत्र नवरात्रि पर्व के अवसर पर तो आप नवसंवत्सर का प्रारंभ भी करती हैं और सिंधी समुदाय का पर्व चेती चांद भी साथ में ले आती हैं.” सुचेता की खुशी छिपाए नहीं छिप रही थी.

”मैंने सुना है सिंधी समुदाय इस पर्व चेती चांद पर आपस में इस तरह के संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं-
”मिठो असांजो प्रेम, मिठो असांजो मन,
मिठी असांजी बोली, मिठो असांजो लाल.
चेटीचंड जूं लख-लख वाधायूं.”
मां अम्बिके भी शायद चेती चांद और भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव की मौज में आ गई थीं.

”हां मां, ये दोनों नवरात्रि पर्व मौसम परिवर्तन के समय होते हैं, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से तो महत्त्वपूर्ण हैं ही, शक्तिरूपिणी मां दुर्गा की आराधना की दृष्टि से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण हैं. इस बार तो ”मां–” सुचेता की मौज तनिक सशंकित लग रही थी.

”क्या हुआ बेटी? कुछ कहते-कहते रुक क्यों गई?” मेहरबान मां अम्बिके ने सुचेता को सचेत किया.

”मां, इस बार तो कोरोना के कहर ने सारी दुनिया को थर्रा कर रख दिया है. सब लोग बहुत घबराए हुए हैं. हमारे देश के प्रधानमंत्री ने ‘जनता कर्फ्यू’ का पालन करने और संकल्प और संयम से काम लेने को कहा है, पर लोग उसमें भी अनुशासनहीनता दिखाकर कोरोना के संक्रमण का खतरा बढ़ा रहे हैं. नवरात्रि पर्व तो संकल्प और संयम को सुदृढ़ करता है. मां कुछ ऐसी सीख दीजिए, कि समय रहते सब लोग सचेत हो जाएं.”

”मैंने भी सुना था, एक ओर जहां पूरी दुनिया कोरोना वायरस इन्फेक्शन से बचने के लिए लॉकडाउन जैसी स्थिति में है, अमेरिका के स्प्रिंग ब्रेकर्स पार्टी बंद करने को तैयार नहीं हैं. मियामी बीच पर स्प्रिंग ब्रेक चल रहा है और हजारों की तादाद में युवा इकट्ठा हैं. इनका कहना है कि इन्हें कोरोना हो भी जाए तो कोई बात नहीं, वे पार्टी करने से खुद को नहीं रोकेंगे. सरकार के सोशल डिस्टेंसिंग के रूल्स को धता बताते हुए ये यंगस्टर्स अपने साथ ही न जाने कितनों की जान जोखिम में डाल रहे हैं.” मां अम्बिके सबकी खबर रखती हैं.

”यहां भी यही हुआ मां! 22 मार्च को देश में सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक ‘जनता कर्फ्यू’ लागू था. इंदौर के लोग सुबह से घरों में दुबके रहे. शाम को 5 बजे सेवाकर्मियों की अभ्यर्थना हेतु 5 मिनट के लिए ताली-थाली बजानी थी. कुछ शहरवासियों का सब्र शाम को अचानक टूटा और वे सैकड़ों की संख्या में सड़कों पर उतर आए. लोग ये भी भूल गए कि जनता कर्फ्यू रात नौ बजे तक है. अब जनता ‘कर्फ्यू’ की जगह ‘थोपा हुआ कर्फ्यू’ झेलना ही बाकी रह गया है. इस आपात्काल में सबको सद्बुद्धि दो मां.
निर्बल को बल देने वाली
बलवानों को दे दे ज्ञान.” और सुचेता सुबकने-सी लगी.

” तथास्तु पुत्री! चिंता मत करो. इन नवरात्रों में मैं विशेष रूप से संकल्प और संयम के शस्त्र लेकर नाव पर सवार होकर सबको सुरक्षित पार उतारने इन नवरात्रों में मैं विशेष रूप से संकल्प और संयम के शस्त्र लेकर नाव पर सवार होकर आई हूं.
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः,
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःख भाग्भवेत्।
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः
अर्थ – “सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े.”

सुचेता सचेत होकर मां अम्बिके की आराधना में मग्न हो गई.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “मां अम्बिके!

  1. नवसंवत्सर 2077 एवं शक्ति आराधन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं. हम सबको सचमुच सचेत होना होगा. हम सचेत होकर अपने कर्त्तव्यों का पालन करना होगा और सभी आवश्यक नियमों का पालन करना होगा. ऐसा करने पर ही विश्वासरूपिणी मां अम्बिके हमें आत्मविश्वास से सराबोर करेगी और शक्तिरूपिणी मां अम्बिके हमें आत्मशक्ति से सराबोर करेंगी. इसी में हम सबका कल्याण है.

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