गीत/नवगीत

घायल पर्यावरण

मैं घायल पर्यावरण हूं, मुझे संवारो,
मुझे संवारकर सृष्टि का रूप निखारो,
मुझे संवारोगे तो सृष्टि रहने योग्य बन जाएगी,
अन्यथा सर्वनाश की ओर मुड़ जाएगी.
जल-प्रदूषण, भूमि-प्रदूषण, वायु-प्रदूषण से किनारा करो,
ध्वनि-प्रदूषण और वाक्-प्रदूषण से मुक्त रहो,
प्लास्टिक का प्रयोग करना छोड़ो,
”मैं पर्यावरण के लिए समर्पित हूं” शान से कहो.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “घायल पर्यावरण

  1. पेड़ लगाओ, पृथ्वी बचाओ,
    पेड़ लगाओ, देश बचाओ,
    पेड़ लगाओ, खुद को बचाओ.

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