भाषा-साहित्य लेख

हिंदी साहित्य में ‘चालीसा’ की परिभाषा ?

हिंदी साहित्य में ‘चालीसा’ की क्या परिभाषा है ? ‘चालीसा’ साहित्यिक विधा है और ‘पैरोडी’ एक साहित्यिक प्रवृत्तियाँ है, जो कि नकल नहीं है । गिनती के 40 चौपाई के सम्मिलित रूप को चालीसा कहा जाता है, जिनमें दोहाएं तो उन चौपाइयों के परिचय व दो शब्द या प्रार्थना-मात्र हैं।

कवि मनोरंजन प्रसाद सिंह की ‘सब कहते हैं कुँवर सिंह तो बड़ा वीर मर्दाना था’ शीर्षक लंबी कविता कवयित्री सुभद्राकुमारी चौहान रचित ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसीवाली रानी थी’ शीर्षक कविता की पैरोडी नहीं थी। इन दोनों कविताओं का स्वतंत्र अस्तित्व है, तभी तो दोनों कविताएँ विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालयों की कक्षा-पाठ्यक्रमों में शामिल रही हैं।

‘कोरोना चालीसा’ में कोरोना से संबंधित तथ्यों के अतिरिक्त किसी भी बिम्बों को समाहित नहीं किया है, इसलिए यथाप्रसंग को ‘धार्मिकता’ से जोड़ना बगैर समझ लिए अतार्किकता ही कही जाएगी ! ‘कोरोना चालीसा’ विशुद्ध साहित्य है, उसे इसी लिहाज से पढ़िये/सुनिए और कोरोना कहर से बचने के लिए ‘फिजिकल डिस्टेंसिंग’ सहित सुरक्षित और संयमित जीवन अपनाइये!

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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