हास्य व्यंग्य

भोग- विलास पार्टी का घोषणा पत्र

आजकल जिसे देखो सरकार को गाली देता रहता है जैसे सरकार न हुई, गाँव की भौजाई हो गई I ‘अहर्निशं घूसम प्रियम’ के प्रति अखंड निष्ठा रखनेवाले अधिकारी भी भ्रष्टाचार का रोना रोते हैं I बालू के पुल बनानेवाले ठेकेदार, कमीशनखोर आधुनिक विश्वकर्मा अभियंता, निर्दोष नागरिकों पर बेवजह डंडे बरसानेवाले पुलिस अधिकारी, फाइलों पर कुंडली मारकर बैठे बाबू – सभी कहते हैं कि भ्रष्टाचार बहुत बढ़ गया है I सरकार को भ्रष्टाचार रोकने के लिए कठोर कदम उठाना चाहिए I हद तो तब हो जाती है जब आतंकवादी भी कहते हैं कि सरकार भ्रष्टाचार को रोकने में नाकाम है I निर्दोष जनता के खून से होली खेलनेवाले आतंकवादियों पर जब डंडे पड़ते हैं तो वे मानवाधिकार हनन के सवाल उठाने लगते हैं I उनके मानवाधिकार को लेकर देश – प्रदेश की राजधानियों में बैठे विदेशी धन पर पल रहे सफेदपोश बुद्धिजीवी (?) और मानवाधिकार कार्यकर्त्ता (??) भी हल्ला मचाने लगते हैं I देश आज़ाद क्या हुआ, सबको सब कुछ कहने- करने की आजादी मिल गई I इसीलिए हमारे परम मित्र घोंचूमल का कहना है कि भारत एक गुलामीपसंद देश है, इसे गुलाम रहने की आदत हो गई है I जरा भी आज़ादी दो, हम बादशाह बन जाते हैं I अपने अधिकार याद रखते हैं, कर्तव्य भूल जाते हैं I घोंचूमल के मस्तिष्क में एक से बढ़कर एक नायाब विचारों की फसल लहलहाती रहती है, गोया मस्तिष्क न हो, इंटरनेट से जुडा कंप्यूटर हो I देश की प्रत्येक समस्या का उनके पास रेडीमेड समाधान मौजूद होता है I एक दिन घोंचूमल ने अपराध रोकने का सस्ता, सुंदर और टिकाऊ समाधान बताया I उसने कहा कि पुलिस विभाग को समाप्त कर अपराधों को नियंत्रित किया जा सकता है क्योंकि पुलिस तो अपराधियों से डरती है और भोले- भाले नागरिकों को डराती है I अब घोंचूमल के विचारों से सहमत नहीं हुआ जा सकता न !
घोंचूमल खबरों के पुलिंदा और चलंत सूचना केंद्र हैं I उन्हें लोग सूचना- प्रसारण मंत्री भी कहते हैं I अफवाह उड़ाने में तो वे पाकिस्तान से भी दो कदम आगे हैं I बिना आग के भी धुंआ उड़ाने की कला कोई उनसे सीखे I गोपनीय से गोपनीय बात उगलवा लेने में उनको महारत हासिल है I वे प्रयोगधर्मी इंसान हैं I नए – नए प्रयोग करते रहते हैं I उनके पास कोई डिग्री नहीं है परंतु अनुभव एवं तर्क की पूँजी के बल पर वे जटिल से जटिल समस्याओं का क्षण भर में समाधान प्रस्तुत कर देते हैं I उन्होंने अनेक बार नेता बनने की नाकाम कोशिश की, ग्राम प्रधान से लेकर संसद सदस्य तक का चुनाव लड़ा, पर हर बार खेत रहे I एक दिन सुबह में ही घोंचूमल मेरे घर अवतरित हुए और एक टटकी खबर सुनायी I कहा कि अब अपना मुखिया बहुत सस्ता हो गया है, वह दो रुपए घूस लेने लगा है I मुझे घूस लेने की बात पर तो कोई हैरानी नहीं हुई, रेट सुनकर हैरानी अवश्य हुई I गांधीजी अगर जीवित होते तो देखते कि गाँवों में उनका ग्राम स्वराज कितने सस्ते में बिक रहा है I मैंने घोंचूमल से कहा कि बेचारे का रेट क्यों बिगाड़ रहे हो ? मुखियाजी हमारे पंचायत के सम्मानित व्यक्ति हैं, जनता के प्रतिनिधि हैं, उन्हें बदनाम करने पर क्यों आमादा हो I उनका ईमान इतना सस्ता कदापि नहीं हो सकता I अरे, दो रुपए की कोई कीमत है I पंचायत के प्रतिनिधि इतने सस्ते नहीं हो सकते I आजकल जिस अधिकारी की दर लाख में नहीं हो उसे घूसखोरों की बिरादरी में टुच्चा समझा जाता है I घोंचूमल ने जब आँखों देखा हाल बयान किया तो मुझे मानना पड़ा कि हो सकता है रिश्वत के इंडेक्स (सूचकांक) में गिरावट आ गई हो I घोंचूमल के सामने कोई सरकार की शिकायत करता है तो वे सरकार के पक्ष में रक्षा कवच बनकर खड़े हो जाते हैं I कहते हैं कि आज़ादी के बाद विकास और गरीबी उन्मूलन के नाम पर जितने रुपए खर्च हुए हैं, यदि उनका सही उपयोग हुआ होता तो देश में सोने- चांदी की सड़कें होतीं, खेतों में हीरे – मोतियों की फसल उगती और नदियों में प्रदूषित जल नहीं, दूध- दही प्रवाहित होता I
कुछ दिनों के बाद घोंचूमल पुनः अवतरित हुए I खादी के कपड़ों में सज्जित वे सचमुच नेता लग रहे थे I उन्होंने दंडवत किया और अपनी धब्बेदार बतीसी दिखाते हुए उल्लूनुमा आँखे चमकाकर गर्दभी आवाज में कहा – “ इस बार विधान सभा चुनाव में मैं भी उम्मीदवार हूँ I आपको वोट के साथ नोट भी देना पड़ेगा और समय भी I इस बार मैं एक राष्ट्रीय पार्टी का प्रत्याशी हूँ I” मुझे जोर की हंसी आ गई लेकिन हँसी को रोकते हुए मैंने कहा – “क्यों अपना ईमान ख़राब करने पर तुले हुए हो ? राजनीति तो अब नौटंकी हो गई है I जितना बड़ा नौटंकीबाज, उतना सफल नेता I अभिनय करने में तो हमारे नेतागण अभिनेताओं के भी बाप हैं I तुम अच्छे अभिनेता नहीं हो, इसलिए राजनीति के बियावान में भटक जाओगे I आज के दौर में यदि गांधीजी भी होते तो चुनाव हार जाते I चुनाव जीतना कोई हँसी – खेल नहीं है प्यारे, आग का दरिया है और कूदकर जाना है I” मेरे कथन का घोंचूमल पर कोई असर नहीं हुआ I वे मन ही मन मेरे भोलेपन पर शायद मुस्कुरा रहे थे I फिर मैंने कुरेदा – “ आपको किस दल ने अपना टिकट दे दिया ? आप तो जाएँगे सनम, पार्टी को भी ले जाएँगे I अपने पांच दशक के दिशाहीन राजनैतिक जीवन में कभी वार्ड सदस्य का चुनाव तो जीत नहीं पाए, विधायक क्या खाक बनेंगे ! मेरी कड़वी बातें सुनकर घोंचूमल कुछ देर मौन रहे, फिर संयत वाणी में बोले – “ मैंने एक पार्टी बनायीं है जिसका नाम है अखिल भारतीय भोग- विलास पार्टी I मैं इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष हूँ I मेरे पास ही टिकट वितरण का अधिकार है I लोग मेरे पास टिकट मांगने आते हैं, रोते हैं, गिडगिडाते हैं, चरण स्पर्श करते हैं और पार्टी फंड में थोडा- बहुत दान भी करते हैं I अखबारवाले अब मेरे कार्यक्रमों को तरजीह देने लगे हैं I कल के सभी अख़बारों में मेरी पार्टी का घोषणा पत्र छपा हैI“
घोंचूमल ने एक अख़बार की कतरन मेरी और बढायी जिसमे भोग- विलास पार्टी का घोषणा पत्र छपा था – “ अखिल भारतीय भोग- विलास पार्टी अपना सम्पूर्ण ध्यान भोग – विलास पर केन्द्रित करेगी I भोग, भोग और केवल भोग ही हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य और एकसूत्री एजेंडा होगा I हम भोगवाद और भौतिकता को पूर्ण प्रोत्साहन देंगे एवं समस्त आर्यावर्त को भोग भूमि में तब्दील कर देंगे I चार्वाक दर्शन को हम राष्ट्रीय दर्शन घोषित करेंगे और सभी भोगवादी आचार्यों को हम सम्मानित – पुरस्कृत करेंगे I अधिकाधिक भोग उपकरण एकत्र करने पर जोर दिया जाएगा I सरकारी दफ्तरों से कुर्सी – मेज निकालकर उनकी जगह पलंग – गद्दे लगा दिए जाएँगे I विधान सभा और सरकारी कार्यालयों में कुछ घंटे सोना अनिवार्य कर दिया जाएगा I हमारे शासन में ऐसे पाखंडियों को कड़ी सजा दी जाएगी जो स्वयं तो भोग- विलास, ऐश्वर्य, आराम में आपादमस्तक डूबे रहते हैं परंतु मंच से त्याग, अपरिग्रह, संतोष, आत्मिक शांति पर लच्छेदार भाषण देते हैं I हम साधनों की पवित्रता – शुचिता पर विचार नहीं करेंगे, येनकेन प्रकारेण सुख- समृद्धि और धन अर्जित करना ही हमारा परम लक्ष्य होगा I हम ऐसा विलासोन्मुख तंत्र विकसित करेंगे जिसमे विलास विमुख व्यक्ति खोजने से भी नहीं मिलेगा I अविलासी व्यक्ति को कठोर दंड दिया जाएगा I देश में भोगवादी – विलासप्रिय व्यक्तियों का बहुमत है, फिर भी दूसरे दलों के बहकावे में आकर हमारे भोगी भाई – बहन दूसरी पार्टियों को वोट देते हैं I यह कैसी विडंबना है कि विलासी लोगों की भारी जनसंख्या होने के बावजूद अबतक भोगवादी समाज हाशिए पर है I भोगवाद को निकृष्ट व हेय समझा जाता है I हम भोग के लिए जियेंगे और भोगते हुए मरेंगे I हम मन – वचन – कर्म से भोग- विलास के लिए समर्पित रहेंगे I एक मुक्त समाज की कल्पना साकार होगी – कानून से मुक्त, सामाजिक वर्जनाओं से मुक्त, नियंत्रण से मुक्त I एक स्वतंत्र समाज, एक स्वच्छंद समाज, एक कर्ममुक्त समाज I” तो हमारे भोगी – विलासी साथियों ! आइए, हम अपनी पार्टी ‘अखिल भारतीय भोग- विलास पार्टी’ ‘ को विजयी बनाएँ तथा भोगी, विलासी, ऐश्वर्यलोलुप समाज के निर्माण में योगदान देकर अपने राष्ट्रीय धर्म का निर्वाह करें I

परिचय - वीरेन्द्र परमार

जन्म स्थान:- ग्राम + पोस्ट- जयमल डुमरी, जिला:- मुजफ्फरपुर(बिहार) -843107, जन्मतिथि:-10 मार्च 1962, शिक्षा:- एम.ए. (हिंदी),बी.एड.,नेट(यूजीसी),पीएच.डी., पूर्वोत्तर भारत के सामाजिक,सांस्कृतिक, भाषिक,साहित्यिक पक्षों,राजभाषा,राष्ट्रभाषा,लोकसाहित्य आदि विषयों पर गंभीर लेखन, प्रकाशित पुस्तकें :-1.अरुणाचल का लोकजीवन(2003) 2. अरुणाचल के आदिवासी और उनका लोकसाहित्य(2009) 3.हिंदी सेवी संस्था कोश(2009) 4.राजभाषा विमर्श(2009) 5. कथाकार आचार्य शिवपूजन सहाय (2010) 6. हिंदी:राजभाषा,जनभाषा,विश्वभाषा (संपादन- 2013) 7.पूर्वोत्तर भारत: अतुल्य भारत (2018) 8.उत्तर - पूर्वी भारत के आदिवासी (2020) मोबाइल- 9868200085, ईमेल:- bkscgwb@gmail.com

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