खामोश कदम : एक वृद्ध पिता की व्यथा-कथा
आधुनिकता की आँधी और स्वार्थ रूपी दानव ने सभी मानवीय व सामाजिक मूल्यों को तहस-नहस कर दिया है I मानव
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Read Moreअंग्रेजों ने भारत पर शासन करने के लिए नौकरशाही का एक तंत्र विकसित किया था I यहाँ के लोगों को
Read More‘जीवन जैसा जिया’ पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की आत्मकथा है I यह आत्मकथा दस अध्यायों में विभक्त है I चंद्रशेखर जी
Read Moreप्रबंधन कौशल और धन बल से अनेक लोग साहित्य के आकाश में ध्रुवतारे की तरह चमकने लगते हैं जबकि उनका
Read Moreतन समर्पित मन समर्पित और यह जीवन समर्पित चाहता हूँ देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं I (रामावतार
Read Moreअसम पूर्वोत्तर का सबसे बड़ा प्रदेश है I यह प्रदेश अनेक संस्कृतियों का संगम है I श्रीमंत शंकरदेव की इस
Read Moreअसंख्य लोगों के बलिदान के बाद देश को आज़ादी मिली, लेकिन स्वतंत्रता के बाद आम जनता ने महसूस किया कि
Read Moreसंस्मरण में लेखक अपने समय के इतिहास को दर्ज करता है, परंतु वह इतिहासकार नहीं है I संस्मरण में लेखक
Read More# रूपसिंह चन्देल वीरेन्द्र परमार बहु-विधा रचनाकार हैं. उत्तर-पूर्व भारत पर अब तक उनकी अट्ठाइस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं.
Read Moreपरिवार भारतीय समाज की धुरी है I सुदृढ़ पारिवारिक व्यवस्था के कारण भारत में अभी तक मानवीय मूल्यों का पूर्णतः
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