इतिहास लेख

असली शेर-ए-कश्मीर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

असली ‘शेर-ए-कश्मीर’ और कश्मीर के शहीद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जन्मदिवस पर सादर नमन ! सर आशुतोष मुखर्जी वैज्ञानिक और शिक्षाविद थे, उनके सुपुत्र डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आज़ादी से पहले बंगाल विधान परिषद के सदस्य और फजलूल हक की सरकार में वित्त मंत्री थे।

जब प्रांत में मुस्लिम लीग की लीला विध्वंसक हो रही थी, तब वे सावरकर के हिन्दू महासभा के सदस्य बने। नेहरू मन्त्रिमण्डल में पहले उद्योग मंत्री बने । भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष हुए। सनातन संस्कृति के प्रति उनकी आस्था प्रबलतम थी।

अनुच्छेद-370 हटाने के सोद्देश्य तथा कश्मीर के भारत के अभिन्न अंग होने को लेकर व कश्मीर में स्वतंत्र व बेरोकटोक आवाजाही के प्रसंगश: वह बिना परमिट वहाँ पहुँच गए, तब उन्हें साजिशतन नज़रबन्द रखा गया और इसी कैद में उनकी मौत हो गई, जो संभवतः कश्मीर में एक संस्कृतिकर्मी की पहली हत्या थी ।
सच में शेर थे वे।

जीये शेर की तरह और मृत्यु भी वैसे ही हुई । सन 1901 में 6 जुलाई को जन्मे डॉ. मुखर्जी, जो कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे, को उनके जन्मदिवस पर उन्हें देशवासियों की ओर से भी सादर स्मरण! अनुच्छेद 370 का खात्मा डॉ. मुखर्जी सर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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