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पुलिस एनकाउंटर गैर-कानूनी विकल्प है !

पुलिस एनकाउंटर से सभी राज दफन हो जाते हैं । यह सच है, सिर्फ जुलाई माह में एक सीओ सहित 8 पुलिसकर्मियों की मुठभेड़ में हत्या करने के दुर्दांत दोषी विकास दुबे मतलब विनाश दुबे था । अन्य वर्षों में कितनी हत्याएँ उनके मत्थे रहे होंगे, एनकाउंटर से उनकी मौत के राज दफ़न हो गए । विकास दुबे को बनाने में परिवार का हाथ था, समाज के हाथ थे या सफेदपोश नेताओं के, यह जानना जरूरी था।

हमारा कानून और हमारी अदालत भी तह तक जाना चाहते हैं, यह कानून के तहत ही दोषियों को सजा देते हैं । यह दुर्दांत से दुर्दांत अपराधी को भी पुलिसिया एनकाउंटर के पक्ष में नहीं है । ऐसे में एनकाउंटर को लेकर शुरू से ही यह मानवाधिकार का उल्लंघन साबित होते रहा है, क्योंकि यह कृत्य हत्यारे को सजा देने का विकल्प नहीं है।

दण्ड देने का अधिकार कानून को है, पुलिस को नहीं । अभिनेता नाना पाटेकर अभिनीत हिंदी फिल्म ‘अबतक 56’ एनकाउंटर के पृष्ठभूमि पर ही बनी है, जिनमें एक पुलिस अधिकारी द्वारा 56 एनकाउंटर किये जाते हैं।

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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