गीत/नवगीत

गीत

क्या खता है हुई,? हमको बतलाइए?
दूर बैठे हैं क्यों ? पास आ जाइये।

भूल मुझसे हुई गर, बता दीजिए?
आप खुद को न ऐसे सजा दीजिए!
हमको मालूम है, यूँ न रह पाएंगे,
होके हमसे जुदा, आप मर जाएंगे!
फिर ये क्यूँ फासले,हम को समझाइए?
दूर बैठे हैं क्यों ? पास आ जाइये।।

ये निगाहें जो है क्यों शरम – सार हैं?
धड़कने कह रहीं आपसे प्यार है।
पुष्प – चुम्बन समर्पित सदा आप पर,
प्रेम का मेघ बरसे हर इक ताप पर।
देखिए मानिए यूं ना घबराइए-
दूर बैठे हैं क्यों ? पास आ जाइये।।

एक कतरा ना आंसू बहाना कभी,
वरना, जां से तो जाएंगे हम यूँ अभी।
मांग लो जान बेशक मुझे गम नहीं,
इन निगाहों में लेकिन, न आए नमी।
मुश्किलें जो भी हैं हमको बतलाइए-
दूर बैठे हैं क्यों पास आ जाइये।।

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