पुस्तक समीक्षा

जिंदगी का पासवर्ड

‘तुम मेरी ज़िंदगी का पासवर्ड हो’ शीर्षक -पुस्तक गिफ़्ट की है, मेरे ज़िन्दगी के अनन्यतम दिलरुबा -पासवर्ड ‘आशु’ जी ने ! उनसे मुलाकात के 5 वर्ष से अधिक हो गए…. हर दिन हमदोनों के बीच नए-नए अनुभव लेकर आते हैं, खट्टी भी, मीठी भी !
वे खुद शिक्षक हैं तथा अनुजतुल्य हैं…. कहानी तो विराट और काव्या की है, किन्तु किताब से-
‘सभी की ज़िंदगी में
एक ऐसा व्यक्ति होता है,
जिसके बिना ज़िन्दगी,
ज़िन्दगी नहीं लगती !”
पुरानी और फ़टी-सटी जिंदगी में थोड़ी सी रफू करके तो देखिए, जिंदगी नई दिखनी लग जायेगी ! यह कहते हुए कि-
मेरे विरोध में
जितनी साजिश रचोगे;
मेरी प्रतिभा व प्रतिबद्धता
और भी आगे बढ़ती जायेगी !’
गुजरे जमाने के साथ भी हृदय से हृदय तक लिए सादर आभार, श्री आशु जी ! साभिनंदन ! इस पुस्तक के लेखक श्री सुदीप नगरकर जी है ।

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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