इतिहास

‘कटिहार’ का उदय में ‘पूर्णिया’ कनेक्शन

कटिहार का इतिहास जानने से पहले हम पूर्णिया (पूर्व नाम पुरैनियाँ) का इतिहास और भूगोल जानते हैं, क्योंकि एक विशाल क्षेत्रफल में फैले पूर्णिया जिला के अंतर्गत ही कटिहार शुरुआत में ब्लॉक व रेवेन्यू सर्किल थे, फिर अनुमंडल बने । पहली अक्टूबर 1973 की मध्यरात्रि तक कटिहार पूर्णिया जिला के अनुमंडल मात्र थे, जो कि गाँधी जयंती, 1973 को खुद में एक जिला बने । वर्त्तमान में पूर्णिया ‘जिला’ के साथ-साथ प्रमंडल भी है, जिनमें कटिहार सहित किशनगंज और अररिया जिले भी शामिल हैं । सनद रहे, पूर्णिया जिला से किशनगंज और अररिया जिले भी बने हैं । ज्ञात हो, ब्रिटिश भारत में जब जिलों की स्थापना हो रही थी, तब शुरुआती स्थापित जिलों में पुरैनियाँ (अब पूर्णिया) जिला की भी स्थापना हुई, जो कि 14 फरवरी 1770 में स्थापित हुई, मिस्टर डुकरेल पहले ब्रिटिश कलेक्टर हुए, तो 14 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि तक अंतिम ब्रिटिश कलेक्टर मोहम्मद अली खान रहे ?

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पूर्णिया नाम की उत्पत्ति की कई संभावनाएं हो सकती हैं । चूँकि वर्त्तमान  पूर्णिया शब्द अतीतवाली ‘पुरैनियाँ’ के अपभ्रंश शब्द हैं । वैसे अतीतवाली पुरैनियाँ तीन नदियों, यथा- गंगा, कोशी और महानन्‍दा की त्रिवेणी, हिमालय पर्वत का पीक सर्वेयर क्षेत्र, काला पानी और घने जंगलों से आच्छादित क्षेत्र रहा है । यह पूर्ण जंगल जहाँ संस्कृत शब्द या मूलशब्द ‘पूर्ण अरण्य’ लिए हैं । ‘पुरैनियाँ’ नामकरण की संभावना इनसे भी है, बावजूद ‘कमल’ (Lotus) का स्थानीय भाषा में एक और नाम ‘पुरइन’ भी है, जो कि यहाँ काफी मात्रा में होती रही है और अब भी यहाँ की नदियों में  देखी जा सकती है । संभव है, शब्द ‘पुरइन’ से ही ‘पुरैनियाँ’ कि उत्पत्ति हुई हो ! अन्य संभावनाओं को भी खारिज नहीं कि जा सकती है, यथा- इस क्षेत्र में सनातन धर्मावलम्बियों के लिए प्राचीन ‘पूरण’ या ‘पूरन’ देवी का मंदिर है । हो सकता है, पूरण या पूरन से ही ‘पुरैनियाँ’ शब्द-विस्तार हुई हों, जैसे- पटन देवी से ‘पटना’, मुम्बा देवी से ‘मुम्बई’ आदि नाम।

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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