लघुकथा

पड़ोसियत

आज सुबह उठते ही, मैं मेरा रोज का काम करने मतलब पानी भरने घर के बाहर निकली| अपने दो गुंडी उठाके बड़ी माँ के घर के नल के पास पोहच गई| नल के टाके में मैंने देखा तो पानी कुछ ज्यादा ही भर गया था| इसके वजह से गुंडी भरने में मुझे दिक्कत हो रही थी तो मैंने इस पर उपाय के लिए नल को पाइप लगा दिया| पाइप लगाने के बाद पता चला की नल की धार बहुत ही कम हो गई है| जिसके वजह से पानी उपर तक नहीं पहुच पा रहा था| आखिर में निराश होकर मुझे नल से खाली गुंडी उठा के घर की ओर निकलना पड़ा| में जैसे ही घर के गेट के पास पहुंची तब मुझे मेरे पड़ोस में रहने वाली रज़ियाँ ने आवाज लगाई और पुछा “क्यों खाली गुंडी ले जा रही हो?”

 मैंने उन्हें जवाब देते हुए कहा “नल से पानी नहीं आ रहा है, तो इसीलिए”| उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया और अपने नल से दो गुंडी पानी भर के दे दिया| वह भी मेरे बिना कुछ कहे या बिना मांगे| कमाल हैं ना! भगवान ने भेजा कोई दूत हैं, जिसका दूसरा नाम पड़ोसी हैं| जो बिना बोले ही हमारी परेशानी समझ जाते हैं और वक़्त पे हमारे काम आते है|

अंकुशा बुलकुंडे

फिटर नागपुर ,महाराष्ट्र 440027 मोबाइल नं - 9307177031