लघुकथा

सरल उपाय

बहुत समय बाद विन्नी से मुलाकात हुई. कुछ खोई-खोई सी लग रही थी. चेहरे का नूर फीका पड़ गया था.

”आजकल ब्लॉग पर क्यों नहीं आ रही?”

”कल से नियमित रूप से ब्लॉग पर आने की कोशिश करूंगी. कुछ महीनों से निराशावादिता ने घेर रखा है. अवसाद के कारण कुछ अच्छा नहीं लग रहा था. ब्लॉग पर लिखना और प्रतिक्रिया करना सबसे सरल उपाय है. दिल की बात सबसे साझा हो जाती है.” बातों-बातों में उसके मुख से निकल गया.

विन्नी की इस बात से एक किस्सा याद आ गया. लॉकडाउन ने बहुत-से लोगों को अवसादग्रस्त कर दिया था. लॉकडाउन के कारण मिले सुनहरी खाली समय को एकांतवास में परिवर्तित कर ध्यान केंद्रित किया जा सकता था, पर कुछ लोगों के लिए यह दुःखद अकेलापन हो गया था. नोनू के साथ भी ऐसा ही हो गया था.

सबको सही परामर्श देकर अवसाद से निकालना नोनू का पेशा था, पर अपने अवसाद को वह नकार न सका. सुबह-सुबह फेसबुक पर उसने लिखा ‘लाइफ’ और उस पर बहुत बड़ा क्रॉस लगा दिया और पृष्ठभूमि में काला रंग था.

”यह तो बड़ी विकट स्थिति है!” उसके एक मित्र ने देख लिया, कुछ सोचा और तुरंत कुछ मित्रों को सूचित कर आगे की योजना बनाई.

”और भाई क्या चल रहा है?” संपर्क होते ही एक मित्र ने नोनू को बातों में उलझाए रखा.

”ऐसे ही चल रहा है!” नोनू का अवसाद उजागर हो गया था.

”यार, तूने कल जो चुटकुला पोस्ट किया था, कमाल का है. कहां से लाता है ऐसे लाजवाब चुटकुले! और वो जो वीडियो डाला था ‘साड़ी में लड़की ने किया ऐसा डांस कि देखने वालों के मुंह खुले रह गए’ वह तो बेमिसाल था. तूने जो बाल गीत शेयर किए थे, उनका तो जवाब ही नहीं. मेरे पोते को बहुत पसंद आए. अबकी आएगा तो सुनवाऊंगा.”

इसी बीच एक मित्र को नोनू के मौसा जी का फोन मिल गया था. उसने उनको सारी बात समझाकर स्थिति को संभालने का आग्रह किया. मौसाजी तुरंत हरकत में आ गए और मौके पर जाकर बात को संभाल लिया.

कितना सरल उपाय था! परिवार से, मित्रों से, अपनी बात दूसरों से साझा करके एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाना. यही मनोबल हर संकट में सहायक बन जाता है.
ऐसे ही सरल उपाय से एक बड़ा हादसा होते-होते बच गया था.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “सरल उपाय

  1. अपने मन की बात दूसरों तक पहुंचाना, उसकी बात का सुना जाना, सही परामर्श मिलना मन को अवसाद से बचा लेता है. ऐसे लोगों का साथ अगर ऐसे लोगों से हो, जो उसकी बात को समझते हों और ऐसे ढंग से बात करें कि अवसादग्रस्त लोगों को पता भी न चले और उनके मन और ध्यान की सकारात्मकता को बढ़ा सकें तो अवसाद का पल टल जाता है. थोड़ी-सी समझदारी, थोड़ा-सा अपनापन ही सरल उपाय बन जाता है.

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