लघुकथा

उजाला नाम है मेरा! (लघुकथा)

अभी-अभी एक समाचार पढ़ने को मिला-

”ये है वो रोबोट जो रख रहा है कोरोना मरीजों का ध्यान!”

रोबोटिना है इस रोबोट का नाम. रोबोट न सिर्फ लोगों का ध्यान रखता है बल्कि कोविड मरीजों को एंटरटेन भी करता है. इस समाचार ने मुझे उजाला की याद आ गई.

अच्छे खाते-पीते परिवार में उजाला का जन्म हुआ था, पर जन्म के समय उसका परिवार एक कमरे वाले जनता फ्लैट में रहता था. रोजमर्रा की मौलिक आवश्यकताओं के लिए भी यहां कदम-कदम पर समझौता करना पड़ता था.

”कोई चिंता नहीं, उससे क्या होता है! समझौता करते रहना तो बहुत अच्छी बात है.” उजाला खुद को समझाती.

”उजाला, बहुत प्रतिभाशाली और समन्वयकारी हो तुम! एक दिन सचमुच उजाला करोगी.” अच्छे कहे जाने वाले स्कूल की अध्यापिका ने मानो आशीर्वाद दिया था.

यही आशीर्वाद छात्रवृत्ति के रूप में फलित होता गया और उजाला का आत्मबल उजला होता गया.

पढ़ाई के अलावा भी स्कूल की अन्य अनेक गतिविधियों में उजाला ने अपना जलवा दिखाया था.

”उजाला, तुम बड़ी होकर क्या बनोगी?” बचपन में उससे पूछा जाता.

”डॉक्टर बनूंगी!” बड़े-बड़े नेत्रों को विस्फारित करके मुस्कुराकर वह कहती.

”और?” पूछने वाले पूछते.

”गायिका भी.” अत्यंत आत्मविश्वास के साथ वह कहती.

”दोनों एक साथ!” आगे सवाल किया जाता.

”और क्या? डॉक्टर की ड्यूटी करके सीधी रिकॉर्डिंग के लिए जाऊंगी न!”

उजाला ने सचमुच यही कर दिखाया भी. गाने-बजाने का कोई विशेष प्रशिक्षण उसने भले ही न लिया हो, पर उसके कंठ में मां सरस्वती विराजमान थी और सधे हुए सुरों से सुरीला वर्षण होता. लोग मंत्रमुग्ध हो जाते.

”आप सचमुच मरीजों को ठीक करने वाली डॉक्टर हैं या पी.एच.डी. अथवा मानद उपाधि वाली डॉक्टर है?” मंच पर उसके नाम से पहले डॉक्टर के संबोधन से प्रभावित होकर श्रोतागण उससे पूछते.

उजाला मुस्कुराकर चल देती.

”भला रोबोटिना से उजाला की याद क्योंकर आई?” किसी ने पूछा.

उजाला काम ही रोबोटिना जैसा करती थी! मरीज नींद न आने की शिकायत करता, वह लोरी गाना शुरु कर देती, मरीज अपनी बात भी पूरी न कर पाता और सपनों के संसार में विचरण करने लगता.”

”उजाला नाम है मेरा!” उजाला का आत्मविश्वास मुखर होता था.

परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “उजाला नाम है मेरा! (लघुकथा)

  1. ये है वो रोबोट जो रख रहा है कोरोना मरीजों का ध्यान!
    रोबोटिना है इसका नाम. कोरोना काल में अस्पताल भरे पड़े हैं। मरीजों की संख्या में दिन प्रतिदिन इजाफा हुअ जा रहा है. डॉक्टर्स इस बीमारी से सीधे फ्रंटलाइन पर लड़ रहे हैं। वो लोगों का इलाज करते हैं। यहां तक कि डॉक्टर्स को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. कई डॉक्टर्स की तो इस कारण मौत हो गई। कई जूझ रहे हैं। ऐसे में मेक्सिको के एक अस्पताल में रोबोट इंस्टॉल किया गया है। जो ना सिर्फ लोगों का ध्यान रखता है बल्कि कोविड मरीजों को एंटरटेन भी करता है.

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