कविता पद्य साहित्य

प्रेम और दुनिया

प्रेम से न किसी का वास्ता
पैसा ही सबसे बड़ा रिश्ता
हार जाता है सच्चा रिश्ता
अहम जिंदगी का फरिश्ता

माँ बाप की गलती की सजा
क्यों भुगतता ताउम्र बच्चा
यूँ तो कहने को भीड़ है बहुत
हर दिल ढूंढता सच्चा रिश्ता

आँसू भी जब लगने लगे बोझ
टूट जाता दिल का गुलिस्तां
मतलबी संसार ,दो पल ख़ुशी
ख्वाब और हकीकत जैसा रिश्ता

उम्मीदों के रोशनदान बंद हुए
बुनने लगा इंसान अपना सपना
बंद चौखट में सिसकियों का
जैसे सज रहा एक और रिश्ता ।

— वर्षा वार्ष्णेय अलीगढ़

परिचय - वर्षा वार्ष्णेय

पति का नाम –श्री गणेश कुमार वार्ष्णेय शिक्षा –ग्रेजुएशन {साहित्यिक अंग्रेजी ,सामान्य अंग्रेजी ,अर्थशास्त्र ,मनोविज्ञान } पता –संगम बिहार कॉलोनी ,गली न .3 नगला तिकोना रोड अलीगढ़{उत्तर प्रदेश} फ़ोन न .. 8868881051, 8439939877 अन्य – समाचार पत्र और किताबों में सामाजिक कुरीतियों और ज्वलंत विषयों पर काव्य सृजन और लेख , पूर्व में अध्यापन कार्य, वर्तमान में स्वतंत्र रूप से लेखन यही है जिंदगी, कविता संग्रह की लेखिका नारी गौरव सम्मान से सम्मानित पुष्पगंधा काव्य संकलन के लिए रचनाकार के लिए सम्मानित {भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ }साझा संकलन पुष्पगंधा काव्य संकलन साझा संकलन

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