धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

विशेष सदाबहार कैलेंडर- 164

1.गुरु ज्ञान का द्वार है,
गुरु प्रभु से मिला दे,
मुक्ति का अनुभव करवा कर,
भय-भ्रम-भेद का भाव मिटा दे.

2.जग को सुरभि दे खुश होना,
सीखा हमने गुरुजन से,
जैसे वे देते हैं शिक्षा,
हमको पूरे तन-मन से.

3.मैं हूं सबकी सखी-सहेली,
पुस्तक मेरा नाम है,
जग में ज्ञान की ज्योत जलाना,
मेरा पावन काम है.

4.आपदा ही जब अवसर बन जाए,
आपदा खुद छाता बनकर तन जाए,
बहाव कुछ क्षणों के लिए भले ही रुक जाए,
सच में वह नए रास्ते की नींव बन जाए.

5.आशाएं ऐसी हो, जो मंज़िल तक ले जाएँ,
मंज़िल ऐसी हो, जो जीवन जीना सिखा दे..!
जीवन ऐसा हो, जो संबंधों की कदर करे,
और संबंध ऐसे हों, जो याद करने को मजबूर कर दे.

6.दुनिया के रैन बसेरे में, पता नही कितने दिन रहना है,
जीत लो सबके दिलों को, बस यही जीवन का गहना है.

7.व्यवहार अच्छा तो मन ही मंदिर,
आहार अच्छा तो तन ही मंदिर,
विचार अच्छे तो मस्तिष्क ही मंदिर
और अगर तीनों अच्छे तो जीवन ही मंदिर.

8.फल और फूल पेड़ पर पत्तों से कम होते हैं,
फिर भी वो पेड़ उन्हीं के नाम से जाना जाता है,
उसी तरह, हमारे पास अच्छी बातें कितनी ही क्यूँ ना हों,
पर पहचान तो सिर्फ अच्छे कर्मों से ही होती है.

9.अरमान सिर्फ उतने ही अच्छे हैं!
जिनमें.स्वाभिमान गिरवी रखने कीज़रूरत ना पड़े!!!

10.जिस दिन तम हट जाएगा
यह जग जगमग हो जाएगा
है कठिन, मगर होगा ज़रूर
वह दिन निश्चय ही आएगा.

11.न दूर रहने से रिश्ते टूट जाते हैं,
न पास रहने से जुड़ जाते हैं,
ये तो अहसास के पक्के धागे हैं,
जो याद करने से और मज़बूत हो जाते हैं.

12.सीढ़ियां उसके लिए बनी हैं, जिसे मंजिल तक जाना हो,
आसमां जिसकी मंजिल हो, उसे सीढ़ियां खुद बनानी पड़ती हैं.

13.जीतूंगा मैं ही, यह खुद से वादा कर,
जितना सोचता है, कोशिश उससे भी ज्यादा कर.
हौसला है तो हर मौज भी किनारा है.
हौसले की नैय्या से किनारे की ओर बढ़ता चल.

14.आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे,
शहीदों की क़ुरबानी बदनाम नहीं होने देंगे,
बची हो जब तक एक बूंद भी लहू की,
तब तक भारत माता का आंचल नीलाम नहीं होगे देंगे.

15.बेवक्त, बेवजह, बेहिसाब मुस्कुरा देता हूं,
आधे दुश्मनों को तो यूं ही हरा देता हूं.

16.कुछ हंसकर बोल दो,
कुछ हंसकर टाल दो,
परेशानियां तो बहुत हैं,
कुछ वक्त पर डाल दो.

17.”साथ” दो हमारा, ”जीना” हम सिखाएंगे,
”मंजिल” तुम पाओ, ”रास्ता” हम दिखाएंगे,
”खुश” तुम रहो, ”खुशियां” हम दिलाएंगे,
तुम बस ”दोस्त” बने रहो, ”दोस्ती” हम निभाएंगे.

18.”मतलब” बड़े भारी होते हैं,
निकलते ही रिश्तों का वज़न कम कर देते हैं.

19.सूरज की किरणों से सीखा,
जग को रोशन करना,
उज्ज्वलता के वर को पाकर,
जग को उज्ज्वल रखना.

20.गांव में छोड़ आये,
हज़ार गज़ की बुजुर्गों की ‘हवेली’
वो शहर में सौ गज़ में रहने को,
खुद की ‘तरक्की’ कहते हैं.

21.रिश्ते ऐसे बनाओ कि जिसमें,
शब्द कम हों और समझ ज्यादा हो,
झगड़े कम और बातचीत ज्यादा हो,
प्रमाण कम और प्रेम ज्यादा हो—–!

22.जिंदगी बहुत कुछ सिखाती है ,
कभी हँसाती है तो कभी रुलाती है ,
पर जो हर हाल में खुश रहते हैं ,
जिंदगी उन्ही के आगे सर झुकाती है।

23.हदे शहर से निकली तो गाँव गाँव चली,
कुछ यादें मेरे संग पांव-पांव चली,
सफ़र जो धूप का हुआ तो तजुर्बा हुआ,
वो जिंदगी ही क्या जो छाँव-छाँव चली।

24. मुश्किलें ज़रुर हैं, मगर ठहरा नहीं हूं मैं.
मंज़िल से ज़रा कह दो, अभी पहुंचा नहीं हूं मैं,
कदमों को बांध न पाएंगी, मुसीबत की ज़ंजीरें,
रास्तों से ज़रा कह दो, अभी भटका नहीं हूं मैं,
साथ चलता है, दुआओं का काफिला मेरे,
किस्मत से ज़रा कह दो, अभी तनहा नहीं हूं मैं.

25.भरोसा खुद पर हो तो ताकत बन जाता है,
भरोसा दूसरे पर हो तो कमजोरी बन जाता है.

26,कमज़ोर होते हैं वो लोग, जो शिकवा किया करते हैं,
उगने वाले तो पत्थर का सीना चीर के भी, उगा करते हैं.

27.कुछ ऐसा करो कयास,
इसमें घोल दो मिठास,
जीवन एक आभास,
अगर ऐसा करोगे प्रयास,
तो कभी नहीं आएगा दुःख तुम्हारे पास.

28.जिस दिन तम हट जाएगा
यह जग जगमग हो जाएगा
है कठिन, मगर होगा ज़रूर
वह दिन निश्चय ही आएगा.

29.ईश्वर कहता है कि, उदास मत होना, क्योंकि मैं तेरे साथ हूं,
सामने नहीं पर, आस-पास हूं,
पलकों को बंद कर दिल से याद करना,
मैं और कोई नहीं, तेरा विश्वास हूं.

30.जीवन में दो ही चीज़ों का संभालना महत्वपूर्ण होता है,
एक तो विचार और दूसरे शब्द!
जब अकेले में हो तब अपने विचारों को संभाल लो
और जब सबके बीच हो तो अपने शब्दों को संभाल लो!

31.जो बीत गया उसे जाने दें,
दस्तक देने को जो आतुर हैं,
उन ख़ुशियों को अंदर आने दें,
जो क़ैद है बंद मुट्ठी में जुगनू,
आज़ाद कर उनको जगमगाने दें.

प्रस्तुत है पाठकों के और हमारे प्रयास से सुसज्जित विशेष सदाबहार कैलेंडर. कृपया अगले विशेष सदाबहार कैलेंडर के लिए आप अपने अनमोल वचन भेजें. जिन भाइयों-बहिनों ने इस सदाबहार कैलेंडर के लिए अपने सदाबहार सुविचार भेजे हैं, उनका हार्दिक धन्यवाद.

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परिचय - लीला तिवानी

लेखक/रचनाकार: लीला तिवानी। शिक्षा हिंदी में एम.ए., एम.एड.। कई वर्षों से हिंदी अध्यापन के पश्चात रिटायर्ड। दिल्ली राज्य स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर दो शोधपत्र पुरस्कृत। हिंदी-सिंधी भाषा में पुस्तकें प्रकाशित। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से रचनाएं प्रकाशित होती रहती हैं।

One thought on “विशेष सदाबहार कैलेंडर- 164

  1. शुभ हो मंगल कारक हो,
    हर दिन आपको मुबारक हो,
    अज्ञान-तिमिर हारक हो,
    आनंद का विस्तारक हो,
    समृद्धि का सूर्य उदय हो,
    सुख-सम्पदा प्रदायक हो.

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