भाषा-साहित्य

राजनीति और साहित्य की लौह महिला

भारतरत्न ‘प्रियदर्शिनी’ और ज्ञानपीठ विजेत्री ‘अमृता’ की निर्वाणदिवस पर श्रद्धासुमन ! क्रिकेट और राजनीति में ‘गलबहियाँ’ या ‘गिरहबानियाँ’ प्रदर्शन के आधार पर होती है । यही कारण है, बचपन में माँ को खोनेवाली आनंद भवन की इंदु को स्वाधीनता संग्राम में व्यस्त पिता जमाहिर से जो कुछ दुलार मिल सकी हो, परंतु ‘शांतिनिकेतन’ में ‘प्रियदर्शिनी’ को कइयों से प्यार मिली ! बापू  की इस लाडली ने हिन्दू ब्राह्मणी होकर जब पारसी से शादी रचा ली, तब पिता विचलित हुए थे, बाद में राजीव, संजय के जन्म के कुछ वर्ष बाद ही तो फिरोज़ से दूरियाँ भी बढ़ गई । विरासत और स्वाध्याय ने इन्हें राजनीतिक बनाई, कई भाषाओं की जानकार बनी ।

सत्ता हस्तांतरण उन्हें पिता से नहीं मिली, किन्तु जब मिली तब पाकिस्तान को इस कदर सबक सिखाई कि 1971 में अपना पूर्वी पड़ोसी भी बदल डाली और यहीं से ‘लौह महिला’ बनी इंदिरा में अहंकार समाहित हो चली । जो इंदु माता-पिता के बचपन-प्रेम से मरहूम रही, वो 1975 में खलनायिका बन गयी । काला ‘आपात’ अध्याय ….. विरोधियों को जेल, अखबारों में जनहित बंद अन्यथा अखबार बन्द, कुँवारे मर्दों के भी नलबंदी इत्यादि….. ने ‘जय बांग्ला’ को तवज्जो नहीं दिया । हालाँकि वो सत्ता में पुनः आयी, ‘ऑपेरशन ब्लू स्टार’ लेकर ! ….. अपनी सत्ता में ही ‘भारत रत्न’ सम्मान गृहीत कर जाना…. ‘Indira is India & India is Indira’ में अहंकार की ‘बू’ साफ परिलक्षित हुई ! वर्ष 2017 उनकी जन्म – शताब्दी वर्ष रही। पाकिस्तान पर उनकी कार्रवाई सचमुच में अविस्मरणीय थी, एतदर्थ इस भारतरत्न को उनकी पुण्यतिथि पर सादर श्रद्धांजलि ! शत – शत नमन !

31 अक्टूबर को पंजाबी और हिंदी (!) भाषा की महान साहित्यकार और साहित्य अकादेमी समेत भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार विजेत्री ‘अमृता प्रीतम’ की पुण्यतिथि भी है । अमृता जी बेहद खूबसूरत भी थी, रचनाओं के साथ-साथ इनके सम्प्रति कई विवाद प्रेम – कारण लिए भी रहे हैं ! अपने से दशक छोटे मशहूर चित्रकार ‘इमरोज़’ के साथ इनकी प्रेम इनके लिए महज प्रेम नहीं, उपासना भी थी ! लेखक व पत्रकार खुशवंत सिंह तो साहित्यकार श्रीमती कृष्णा सोबती की किताब ‘ज़िंदगीनामा’ से नाम मिलने के विवाद – प्रसंगश: न्यायालय में ‘वाद’ जाने पर अमृता जी की ‘अन्तेवासे गवाह’ बने थे । ‘रसीदी टिकट’ के रचनाकारा को उनकी निर्वाणतिथि पर सादर नमन ! सादर श्रद्धांजलि !

परिचय - डॉ. सदानंद पॉल

तीन विषयों में एम.ए., नेट उत्तीर्ण, जे.आर.एफ. (MoC), मानद डॉक्टरेट. 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स होल्डर, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, RHR-UK, तेलुगु बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, बिहार बुक ऑफ रिकॉर्ड्स होल्डर सहित सर्वाधिक 300+ रिकॉर्ड्स हेतु नाम दर्ज. राष्ट्रपति के प्रसंगश: 'नेशनल अवार्ड' प्राप्तकर्त्ता. पुस्तक- गणित डायरी, पूर्वांचल की लोकगाथा गोपीचंद, लव इन डार्विन सहित 10,000+ रचनाएँ और पत्र प्रकाशित. भारत के सबसे युवा संपादक. 500+ सरकारी स्तर की परीक्षाओं में क्वालीफाई. पद्म अवार्ड के लिए सर्वाधिक बार नामांकित. कई जनजागरूकता मुहिम में भागीदारी.

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