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मानवता का संदेशवाहक मूल खासी मिथक – राजदूत मुर्गा

मानवता का सन्देशवाहक  मूल खासी मिथक – राजदूत  मुर्गा

डॉ अनीता पंडा, शिलांग

सीनियर फैलो, आई.सी.सी.आर. दिल्ली

विश्व स्तर पर संस्कृति मानवीय मूल्य हैं, जिसमें तत्व ज्ञान, दर्शन, धर्म, मान्यता और लोक समाहित है I इसी संस्कृति से मानव के जीवन में अनेक नियम और विधि-विधान बने हुए हैं I

खासी समुदाय में पहाड़ियों, पर्वतों, नदियों, जलप्रपातों, फूलों आदि के इर्द-गिर्द कहानियां बुनने और रिकार्ड रखने की मौखिक परम्परा रही है लेकिन इन मिथकों तथा लोककथाओं में समयानुसार परिस्थिति के अनुरूप परिवर्तन आता रहा है I ये कथाएँ अलग-अलग भागों को जोड़ते हुए एक उपसंहार पर पहुँचती हैं I ऐसे में ये कथाएँ वास्तविकता से दूर भी लगती हैं I इनमें विशेष बात यह है कि ये लोक कथाएँ एवं  मिथक खासी समुदाय की विचारधारा, धर्म,नैतिकता और सामाजिक तथा उनकी जीवन-शैली पर आधारित है I  अत: खासी लोक कथाओं का विश्लेषण और अध्ययन उनके पौराणिकता एक भाग है, जिसने खासी धर्म, रीति-रिवाज और खासी संस्थाओं आदि को प्रभावित किया है I इतने वर्षों के बाद भी आज वे इसे पूरी तरह से मानते आ रहें हैं I ये कथाएँ खासी विचारधारा और उनकी परम्परागत संस्थाओं और जीवन-शैली को समझने में सहायक हैं I इनमें उच्च मानवीय मूल्य निहित हैं, जो त्याग, बलिदान एवं सद्कर्म के लिए प्रेरित करते हैं I यद्यपि तेज़ी से होते धर्मांतरण के कारण मूल खासी धर्म का निर्वाह करने वालो का प्रतिशत 13% मात्र ही रहा गया है पर सुखद बात यह है कि यह आज भी अपने नैतिक मूल्यों के साथ जीवित है I  

    खासी समुदाय के पूर्वजों के अनुसार – आरम्भ में पृथ्वी पर कोई नहीं रहता था I ईश्वर , जो कि जगत का निर्माता है , उसने का रम्यौ (पृथ्वी) और उनके पति उ बासन को बनाया I वे दोनों बहुत सुख पूर्वक रहते थे I उनके सुखी जीवन में उन्हें अकेलापन अक्सर सताता था क्योंकि उनकी कोई संतान नहीं थी I समय बीतता जा रहा था I वे अपने अकेलेपन से ऊब गए I का रम्यौ दिन-रात सृष्टि के निर्माता ईश्वर से प्रार्थना करती कि उसे वारिस चाहिए, जो उसके वंश को आगे बढ़ा सके I का रम्यौ की सच्ची प्रार्थना ईश्वर ने स्वीकार कर ली और उन्हें पांच संतानें प्रदान किये I ये संतानें थीं – सूर्य, चाँद, पानी, हवा और आग I इनमें सूर्य पहली संतान तथा आग आखिरी संतान थी I आग, आखिरी संतान होने के कारण घर के सारे काम करने  और देखभाल की जिम्मेदारी उस पर थी I

           पांच संतानों को पाकर का रम्यौ बहुत खुश थी I उसे अपने फलते-फूलते परिवार पर गर्व था I अब धरती पर सूरज, हवा और पानी था अत: वृक्ष उगे, सुन्दर-सुन्दर फूल खिले, भांति-भांति के फल लगे I सारी प्रकृति ही सुन्दर दिखाई देने लगी I का रम्यौ धरती पर कई मौसम और उनके विभिन्न रंगों को अदि को देखकर प्रफुल्लित थी I यह देखकर कुछ समय बाद का रम्यौ ने ईश्वर से विनती की कि वे दया करके किसी को भेजें, जो संसार पर शासन करे और उसे अनुशासित करे I ईश्वर को का रम्यौ की के अनुरोध में सच्चाई नज़र आई और उसने वादा किया किया कि वह उसकी इच्छा अवश्य पूरी करेंगे I

           खासी मतानुसार उस समय स्वर्ग में सोलह परिवार ईश्वर के साथ सुख, शान्ति और भाईचारे के साथ रहते थे I का रम्यौ की इच्छा पूर्ति के लिए स्वर्ग में एक विशाल सभा का आयोजन किया गया I संसार पर शासन करने जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए ? – इस पर गंभीरतापूर्वक विचार करने के बाद यह निर्णय लिया गया कि स्वर्ग में ईश्वर के साथ रहने सोलह परिवारों में से सात परिवार , जो ‘की ह्न्यू ट्रेप हन्यू स्कुम या ‘सात झोपड़ियाँ और सात घोंसले’ कहलाते थे , वे धरती पर जाएँ और खेती करें और उसे आबाद करें I

       वे ईश्वर के आदेशानुसार धरती पर जाएँ और माँ की तरह की धरती के विकास और उन्नति के लिए कार्य करें I वे प्रशासनिक दृष्टि से हर चीज़ की देखभाल करें I इस प्रकार ईश्वर ने ह्न्यू ट्रेप हन्यू स्कुम और  पृथ्वी को आशीर्वाद दिया I साथ ही यह कहकर अपनी बात समाप्त की कि अगर लोग स्वाम सही रस्ते पर चलेंगे ; सच्चाई के रास्ते पर रहेंगे तो ईश्वर उनके साथ रहेंगे I उनके और स्वर्ग के बीच बिना किसी व्यवधान के आना-जाना होगा I वे एक पेड़ के द्वारा ‘जिन्किंग क्स्येर’ अर्थात् सोने की सीढ़ जो ‘उ सोपेथबेनेंग’ चोटी पर स्थित है , उसके द्वारा स्वर्ग में आ-जा सकेंगे I

          सात झोपड़ियाँ अपना वचन निभाते हुए सही तरीके से शांति और भाईचारे के साथ स्वर्ण युग में रहने लगे I उस समय स्वर्ग में निवास करने वाले नौ परिवारों और पृथ्वी के सात परिवारों के बीच

सम्पर्क था और ईश्वर भी धरती पर अक्सर आते-जाते थे I वे उनसे मानव भाषा में बात करते थे I धीरे-धीरे कुछ समय बाद जीवन की हर दिन की व्यस्तता के कारण ये सात परिवार अपने दिए गए वचनों से दूर होते गए और उन पर  कम ध्यान देने लगे I एक महत्वाकांक्षी व्यक्ति ने इस स्थिति का लाभ उठाया क्योंकि उसे मानव के ऊपर ईश्वर और सच्चाई का राज करने अच्छा नहीं लगता था I अत: वह पृथ्वी और स्वर्ग से जोड़ने वाली सीढ़ी को काटने में सफल हो गया I परिणामस्वरूप धरती पर रहने वाले  सात परिवार हमेशा  के लिए बिछड़ गए I इस प्रकार ईश्वर के प्रभाव से हमेशा के लिए दूर हो गए I ईश्वर ने उनसे मानव-भाषा में कभी बात नहीं की I ईश्वर को अपनी रचना अर्थात् मनुष्यों पर बहुत दया आई I यद्यपि वह उनसे इंसानी भाषा में बात नहीं कर सकते थे परन्तु वे उसे अपने संकेतों आदि द्वारा बात करते थे I

          वे सातों परिवार इस विषय में कुछ नहीं किया केवल ईश्वर की आज्ञा का पालन करते रहे , वे बस टालमटोल करते रहे I कुछ समय बाद सोह्पेतबेनेन्ग (पर्वत की चोटी) से पांच किलोमीटर दूर डेंगेई पीक / चोटी पर एक पेड़ उग गया I वह पेड़ कुछ समय में तेज़ी से बढ़ गया I उसकी शाखाएँ चारो ओर फैल गईं और इसकी पत्तियों ने पूरी धरती को ढक लिया I ऐसा लगाने लगा कि दूसरी बनस्पतियाँ उसकी छाया में नहीं पनप सकेंगी I उस समय सारमो और सोराफिन नामक दो जिम्मेदार व्यक्ति डेंगेई चोटी की ढाल पर खेती कर रहे थे I उन्होंने इस घटना की जानकारी दरबार को देने का निश्चय किया , जिससे लोगों का भला हो I उनकी बात सुनकर दरबार ने निर्णय लिया कि पेड़ को तुरंत कटवा दिया जाए क्योंकि अगर देर हो जाएगी , तो उस पेड़ की जड़ें और भी मज़बूत हो जाएँगी और उसकी शाखाएँ इतनी फ़ैल जाएँगी कि काटना मुश्किल हो जायेगा I उन्होंने अपनी कुल्हाड़ी और दराती धार की और पेड़ काटना शुरू किया I दिनभर कठोर परिश्रम करने ने बावजूद वे उस पेड़ का छोटा हिस्सा ही काट पाए I यह देखकर दरबार ने यह निर्णय लिया कि हर परिवार से कम से कम एक आदमी आएँगे और पेड़ काटने में मदद करेंगे फिर अपने-अपने घर चले जाएँगे I दूसरे दिन हर घर से एक-एक व्यक्ति पेड़ काटने चल पड़ा I जब वे उस स्थान पर पहुँचे, तो आश्चर्यचकित हो गए क्योंकि उस पेड़ पर कटने के कोई निशान नहीं थे इसके बाद भी उन्होंने पूरे दिन काम किया परन्तु अगले दिन भी वैसा ही हुआ I वे परेशान और भयभीत हो गए I

            जब वे आपस में बातचीत कर रहे थे कि दूसरे दिन क्या किया जाए, तो उस समय एक छोटा पक्षी ‘रेन बर्ड’(phreit) वहाँ आया I सबका उदास चेहरा देखकर उसने एक वृध्द व्यक्ति से उनकी उदासी का कारण पूछा I पूरी बात जानकर रेन बर्ड ने कहा – मैंने टाइगर से सुना है कि जब डेंगेई बड़ा हो जाएगा और इसकी शाखाएँ चारो ओर फैल जाएँगी, इसकी पत्तियाँ और मोटी हो जाएँगी, तब चारो ओर गहरा अँधेरा छा जाएगा I तब मैं चारो ओर घूम सकूँगा और इन्सानों को कहा सकूँगा I अत: रात में

टाइगर इस पेड़ पर पड़े कटने के निशान को चाट लेता है, जिससे यह पेड़ फिर से वैसा का वैसा हो जाता है I इसलिए तुम लोग  कितनी भी कोशिश कर लो, इसे नहीं काट सकते I अगर तुम लोग मेरे ऊपर विश्वास करते हो, तो तुम लोग अपना काम करते रहो और घर जाने से पहले अपनी कुल्हाड़ी और दराती को कटे हुए भाग पर उल्टा करके रखना I उसकी धार सामने की ओर होनी चाहिए I जब टाइगर उसे चटाने की कोशिश करेगा, तो उसकी जीभ कट जाएगी और वह फिर से चाटने की कोशिश नहीं कर सकेगा I

      अत: रेन बर्ड की सलाह से लोगों ने फिर से पेड़ काटना आरम्भ किया I उस रात हमेशा की तरह टाइगर आया और उसने कटे हुए निशान को चाटना आरम्भ किया, तो उसकी जीभ धारदार हथियार से कट गई और वह दर्द से चिल्लाता हुआ जंगल की ओर चला गया परन्तु उस समय से उसने मनुष्य से बदला लेने की प्रतिज्ञा की I इस घटना के बाद उसे जब भी मौका मिलाता है, वह उस पर आक्रमण करता है I

         लगातार कई दिनों तक पेड़ काटते और रात में धारदार हथियार को कटी हुई जगह पर रखते हुए उन्होंने पेड़ को पूरी तरह नीचा कर लिया I डेंगेई चोटी में क्रेटर की तरह एक गढ्ढा बना हुआ है I मिथक के अनुसार यह वही जगह है जहाँ पर पेड़ खड़ा था I इस प्रकार मनुष्य को अपनी युक्ति से पेड़ को सफलतापूर्वक नीचे अपने ऊपर बहुत गर्व हुआ परन्तु यह काम बिना सृष्टिकर्ता के सम्भव नहीं हो सकता था अत: उसने उनका आभार प्रकट करने के लिए पृथ्वी के सभी प्राणियों के लिए नृत्य का आयोजित किया I

      नृत्य से संबंधित मिथक इस प्रकार है I एक समय की बात है कि कई वर्ष पहले सभी जानवर, पक्षी और जीवित प्राणी मनुष्यों की भाषा बोलते थे I उन्होंने उस समय तक इन्सानों की प्रभुता भी स्वीकार कर ली थी I उस समय मनुष्य ने सभी प्राणियों को सन्देश भेजा कि निर्धारित समय पर रंगभूमि में सभी का नृत्य होगा I अत: निधारित समय पर सभी प्राणी रंगभूमि पहुँच गए I सभी नृत्य करना आरम्भ कर दिया I पूरे कार्यक्रम को सुचारू रूप से चलने का भार सूरज पर था I उसे यह भी देखना था कि कहीं कोई गड़बड़ी न हो अत: वह नृत्य में देर से पहुंची I सूरज सभी प्राणियों के बीच में थी I जब वह अपने भाई चाँद के साथ नृत्य कर रही थी, तो उस समय छछूंदर, उल्लू, मेढक, बन्दर और दूसरे प्राणी भाई -बहन के अनैतिक सम्बन्ध को लेकर दोषारोपण करने लगे I उनके ऐसे व्यहवार ने सूर्य को बहुत दुखी किया उसने अपने आपको बहुत अपमानित और हीन महसूस किया I उन प्राणियों की इतनी हिम्मत कैसे हुई कि जो सम्पूर्ण प्रकृति का केंद्र है और इस पृथ्वी पर सभी जीवित जीव-जंतुओं का संचालन

करता है, उसके साथ ऐसा व्यवहार ? अत: वः गुस्से एवं शर्म से नृत्य को बीच में ही छोड़ कर चली गई और अपने आपको एक गुफ़ा का क्रेम लमेट क्रेम लतांग” में छिपा लिया I

 इसके बाद पूरी धरती पर अँधेरा छ गया I हर कोई डर गया I उन्हें धक्का-सा लगा I वे सोचने लगे कि अचानक यह क्या हुआ ? चारो ओर हलचल मच गई I लोगों की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या किया जाय ? इसलिए मनुष्य ने चारो ओर सन्देश भेजा और सभा बुलाई I जिसमें सूर्य को वापस बुलाने के बारे में चर्चा हुई I सभा में मनुष्य ने पूछा – यहाँ कोई ऐसा है , जो खुद सूर्य को का क्रेम लमेट क्रेम लतांग” से बाहर लेकर आएगा ? कोई सामने नहीं आया I पूरी सभा में शांति छा गई I कुछ देर के बाद एक हाथी सामने आया और बोला – सभी लीग सुने, जैसा कि आप सभी जानते हैं कि मैं आकर में बहुत बड़ा हूँ और बलवान भी हूँ परन्तु में  का क्रेम लमेट क्रेम लतांग” की ओर जाने से डरता हूँ क्योंकि मुझे डर है कि विशाल होने के कारण सागर और नदियाँ पार करते हुए डूब सकता हूँ I तेज़ ढलान में चढ़ते समय गिर सकता

हूँ और संकरे रास्ते में नहीं चल सकता I अत: मुझे डर है कि मैं बिना अपनी मंजिल प्राप्त किये और अपना काम पूरा किये ही मर जाऊँगा I जिस काम के लिए हम लोग कोशिश कर रहे हैं; वह पूरा नहीं हो पायेगा I यद्यपि मैं इस कार्य को पूरा करने की दृढ़ इच्छा रखता हूँ पर मैं नहीं कर पाऊँगा I इसलिए अगर कोई इस कार्य को पूरा कर सकता है, तो मैं वादा करता हूँ कि मैं मानव जाति की सेवा करूँगा और जीवन भर उनका भर ढोऊंगा I इसके बाद एक के बाद एक आए और हर एक ने कार्य पूरा करने में असमर्थता प्रकट की I

              उसी समय धनेश (hornbill) , जिसे अपनी शक्ति और सुन्दरता पर बहुत घमंड था, वह आगे आया I वह कार्य पूरा करने के लिए तैयार हो गया I उसने कहा – जो पक्षी आकाश में उड़ सकते हैं और जो प्राणी ज़मीन में रेंग सकते हैं , वे सुने कि मैं इस कार्य को पूरा करने स्वयं जाऊँगा I मुझे पूरा विश्वास है कि मेरी बातों और सुन्दरता से प्रभावित होकर सूर्य ज़रूर वापिस आ जाएगी I अत: आपलोग चिंता न करें, मैं खुद ही इस समस्या समाधान कर लूँगा I यह सुनकर सभी बहुत खुश हुए क्योंकि आखिर में कोई तो ऐसा आगे आया, जो कार्य पूरा करने के लिए तैयार हो गया I सबलोग आशावान हो गए कि कुछ दिन बाद चाँद और सूरज फिर से अपनी जगह पर आ जाएँगे I

               इस प्रकार धनेश अपनी यात्रा पर चला गया I वह सूरज के घर पहुँचा I उसने सूरज को वहाँ आने का कारण बताया I सूरज ने घर आये अतिथि का सम्मान किया और उसे घर में स्वादिष्ट खाना खिलाया I सूरज के अच्छे व्यहवार और दयालुता के कारण धनेश को ग़लतफ़हमी हो गई I उसने सोचा कि उसके सुन्दर रूप के कारण सूरज उसके प्रति आकर्षित हो गई है I उसने अपना प्रेम सूरज के सामने प्रकट किया I जब सूरज उसके मन की बात पता चली, तो हक्का-बक्का रह गई I उसे धक्का – सा लगा I उसे विश्वास नहीं हुआ कि जो इतना महत्वपूर्ण कार्य करने आया है, वह ऐसा कैसे कर सकता है ? उसे बहुत गुस्सा आया और उसने बैठने वाला एक पत्थर धनेश पर फेंका, जो उसकी पीठ पर चिपक गया I वह धनेश को शाप देते  हुए बोली – तुम निर्ल्लज, घमण्डी, आडम्बरी जीव हो I तुम इस सीट को हमेशा ढोते रहोगे और तुम्हें हमेशा राज खाँसी सताएगी I आज से तुम अपना चेहरा दुबारा दिखने की हिम्मत नहीं करोगे I शर्मसार धनेश सूरज के निवास स्थान से वापिस आ गया I उसकी प्रतीक्षा में बैठे अन्य प्राणियों ने उसे खाँसते हुए सुना I जब वह वहाँ पहुँचा तो उन्होंने उसके उद्देश्य के बारे में पूछा I लाचर होकर धनेश को सूरज के घर घटी शर्मनाक घटना को सबके सामने बताना पड़ा I कहा जाता है कि उस समय से धनेश सूरज की ओर नहीं उड़ पाता I

               यह सुकर सभी लोग फिर दुखी हो गए I वे चिन्तित और भयभीत भी हो गए I तब मनुष्य ने पूछा कि और कोई ऐसा है, जो सूरज को वापिस लेन की कोशिश करेगा ? इस समय कोई सामने नहीं आया I काफी देर इन्तजार और थक कर मनुष्य ने पूछा – क्या कोई

ऐसा भी है, जो इस सभा में उपस्थित नहीं है? वहाँ उपस्थित प्राणियों की गिनती करने के बाद पता चला कि सभा में मुर्गा नहीं है I

                  तब मनुष्य ने चील को मुर्गे को लेन भेजा,जिसे वे ‘गंदे कपड़े पहनने वाला’ (Malyngkhoit)  कहकर पुकारते थे I कुछ देर बाद चील मुर्गे को लेकर सभा में आई I मुर्गे ने वहाँ उपस्थित लोगो से कहा – मैं सबको आदर सहित तथा जो बुज़ुर्ग हैं, उन्हें अति सम्मान के साथ कहता हूँ कि मैं यहाँ निमंत्रित किया गया हूँ इसलिए मैं यहाँ आया हूँ I मैं पहले यहाँ इसलिए नहीं आया क्योंकि मैं गरीब और बदसूरत हूँ I मुझे आप लोगो के सामने आने में शर्म आती है I मैं आपका आभारी हूँ कि आपने इस सभा में मुझे बुलाया I

                मुर्गे से मनुष्य ने कहा – तुम्हें चील ने यहाँ लेन का उद्देश्य तो पूरी तरह से बताया होगा I सबकी सहमति से मैं इस काम को पूरा करने के लिए तुमसे अनुरोध करता हूँ I अगर तुम सहमत हो, तो तुम हमारे संदेशवाहक या दूत होगे I तुम सूरज के पास हमारा सन्देश ले कर जाओगे और हमारी ओर से क्षमा-याचना भी करोगे I तुम सूरज से कहना कि जो कुछ हुआ, उसमें मेरी गलती थी I मैं पूरी घटना के लिए खेद प्रकट करता हूँ I जो कुछ भी हुआ गलत हुआ I  मैं इसकी पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ I अत: मैं प्रतिज्ञा करता हूँ कि भविष्य में ऐसा कभी नहीं होगा I कृपया उन्हें निवेदन करना कि मैं उनसे प्रार्थना करता हूँ कि वे हमें माफ़ कर दें और वापिस आ जाएँ I तुम्हें इस काम को पूरे दिल से करना होगा I इसके लिए दृढ़ संकल्प की आवश्यकता है और सूरज तक पहुँचना ज़रूरी है I मैं तुम्हें इस कार्य को पूरा करने का अवसर दे रहा हूँ I

              हे मुर्गे ! अगर तुम्हें मेरा प्रस्ताव स्वीकार है, तो तुम्हें एक पोशाक दी जाएगी, जो कि उच्च वर्ग के लोग पहनते हैं I तुम्हें गहने भी दिए जाएँगे, जिससे तुम अपना श्रृंगार कर सकोगेI तुम्हें एक वस्त्र दिए जाएगा और गोलाकर पूँछ भी, इससे तुम्हारा पूरा व्यक्तित्व और भी निखर जाएगा I तुम्हें तकनीक और बांग देने की शक्ति दी जाएगी, जिससे तुम सुबह-शाम होने पर बांग दे  सकोगे I

               यह सुनकर मुर्गे ने कहा – मैं क्या कहूँ ? मैं सूरज से कैसे बात कर सकता हूँ ? मैं तो ठीक से बात भी नहीं कर सकता हूँ I मैं तो बहुत बद्सूरत हूँ I मैं यह सोच-सोच कर घबरा रहा हूँ कि सूर्य के साम्राज्य में मेरा कैसा आतिथ्य होगा I चाहे जो हो, मेरे अनुसार आप लोगो का सन्देश सूर्य तक पहुँचाना मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है I अत: अगर आप अनुमति दे, तो मैं इस कार्य को पूरा करने के लिए तैयार हूँ I मैं वहाँ पहुँचने की कोशिश करूँगा और आपका सन्देश सूरज को देकर उन्हें लाने की कोशिश करूँगा या सूर्य जो सन्देश देंगी उसे आप तक पहुँचाऊँगा I              

        साथ ही मान्यता यह भी है कि हर जगह दुःख था और सब ईश्वर से माँफी रहे थे I इस कारण ईश्वर को उन पर दया आ गई अत: उन्होंने सबको स्वर्ग की सभा में पेश होने का आदेश दिया I इधर मनुष्य के गलत कार्यों के कारण दूसरे प्राणी भी प्रभावित हो रहे थे I उस सभा में ईश्वर ने मनुष्य को एक तरफ और अन्य प्राणियों दूसरी तरफ खड़े होने आदेश दिया I दोनों स्वर्ग की सभा में ईश्वर के न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे I ईश्वर ने पूछा कि यहाँ उपस्थित सभी प्राणियों में ऐसा कौन है, जो इस विषय की जाँच करने का दायित्व स्वयं ही अपने ऊपर ले सके I सभी जानवरों ने पवित्र होने का दावा किया कार्य पूरा करने के लिए तैयार हो गए परन्तु जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अपना प्राण त्यागने के लिए तैयार हैं क्योंकि इस कार्य के लिए उनको अपना पेट खोलना पड़ेगा, जिससे उनके दिल की जाँच की जा सके कि वे सचमुच पवित्र हैं I यह सुनकर सभी डर गए और उनमें बलिदान करने का साहस नहीं रहा I

    जब कोई सामने नहीं आया, तो सभा में सवाल उठा कि क्या कोई ऐसा भी है, जो सभा में उपस्थित नहीं है I खोजने के बाद पता चला कि केवल वहाँ मुर्गा मौजूद नहीं है क्योंकि वह अपनी गरीबी और बदसूरती के कारण शर्म से छिप कर रहता था I उसे बुलाया गया I वह स्वयं ही अपना बलिदान देने के लिए तैयार हो गया I अत: उसका पेट खोल दिया गया और उसका दिल तथा आँतें सभा में बाहर निकाली गईं I उसमें कोई दोष नहीं था I उसने मानव जाति के लिए अपना बलिदान कर दिया I

         जब उसे बुलाया गया, तो जितने भी उड़ने या रेंगने या तैरने वाले प्राणी थे , उनके आगे खड़े होने का आदेश दिया गया I उसकी पवित्रता के गवाह सभी प्राणी थे I अत: सभी सहमत हो गए कि मुर्गे को ही “राजदूत” होना चाहिए I वह पुन: इस संसार नियम और रोशनी लायेगा, जिससे सभी प्राणी शांति और सुख से रह सकेंगे I पूरी सभा ने यह स्वीकार किया कि वह ईश्वर और मनुष्य के बीच सबसे उपयुक्त दूत है I इसके लिए उसे एक पूँछ और एक सुंदर कलगी दी गई I

     अत: मुर्गा ज़ोखिम भरे सफ़र में चल पड़ा I  जब वह सूरज के साम्राज्य में पहुँचा, तो सूर्य ने उससे पूछा कि वह इतनी दूर से उससे मिलने क्यों आया है ? मुर्गे ने अपने आने का कारण उसे बाते तथा मानव जाति का सन्देश उसे दिया I सूरज ने उसकी बात बड़े ध्यान से सुनी और उसका आदर-सत्कार किया I सूरज ने उसे अपने घर भोजन पर आमंत्रित किया, जिसे मुर्गे ने बड़ी विनम्रतापूर्वक स्वीकार कर लिया और उनसे अनुरोध किया कि वे अपने आँगन में चावल के कुछ टूटे दाने दे दें I सूरज ने चावल दाने अपने आँगन में डाल दिया, जिसे उसने रेतीले फर्श से उठाकर आसानी से खा लिया I खाने के बाद मुर्गे ने आदर से कहा – माँ सूर्य ! पूरी पृथ्वी पर अँधेरा छा गया है और सभी प्राणी भयभीत और चिंतित हैं I मनुष्य भी घबराया हुआ है I उसने अपनी भूल स्वीकार कर ली है I उसे अपनी गलती का अहसास हो गया है क्योंकि उसने बिना उच्च सत्ता से अनुमति लिए नृत्य का आयोजन के लिए स्वम् ही आज्ञा दिया, जो आपके अपमान का कारण बना I उसने सारी जम्मेदारी अपने ऊपर ली है और प्रतिज्ञा किया है कि ऐसी गलती भविष्य में कभी भी नहीं होगी I उसने आपसे क्षमा करने की प्रार्थना भी किया है I साथ ही निवेदन किया है कि आप दया करके लौट आएँ I अगर आप दिल से उसे माफ़ कर सकती हैं, तो मैं यह सन्देश लेकर वापस चला जाऊँगा I मैं वादा करता हूँ कि इस उत्सव में मैं अपने पंखों से तालियाँ बजाऊंगा और तीन बार बांग दूँगा I जिससे सबको आपके आने की सूचना मिल जाएगी I यह मेरी पवित्र प्रतिज्ञा है, जो मैं आपके सामने कर रहा हूँ I

           मुर्गे की बिनम्रता से प्रभावित होकर सूर्य ने कहा – सम्मानीय अतिथि ! मैं तुम्हारे व्यवहार की प्रशंसा करती हूँ और तुम्हारे नेक इरादे का आदर करती हूँ I अत: तुम्हारी प्रतिज्ञा का सम्मान करते हुए वापिस धरती की ओर जाऊँगी I मैं तुम्हारे सिग्नल का क्रेम लमेट क्रेम लतांग” का इंतजार करुँगी I जैसे ही मैं इसे सुनूँगी, वैसे ही शीघ्र प्रकट हो जाऊँगी I

                जब मनुष्य को यह सन्देश प्राप्त हुआ कि सूर्य वापिस आ रही है, तो इस शुभ समाचार से चारो ओर ख़ुशी की लहर दौड़ गई I तुरन्त मुर्गे ने सूर्य का दिया हुआ सिन्गल (बांग) तीन बार दिया I यह सुनकर सूर्य एक बार पुन: वापिस आ गया और सारी धरती पर प्रकाश फ़ैल गया I मुर्गे ने सम्पूर्ण प्राणियों की रक्षा हेतु अपना बलिदान दे दिया तथा “सदा-जीवन उच्च विचार” की विचारधारा को सार्थक कर गया I उसके इस नि:स्वार्थ त्याग के कारण वह पूरे मूल खासी समुदाय का प्रतीक चिन्ह यानि राजदूत बन गया I इस समुदाय के ध्वज, स्मारकों आदि में इसे उच्च स्थान प्राप्त है I

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सन्दर्भ ग्रन्थ –

  1. “The philosophy and essence of Naim Khasi” by Mr. J. Kerrsing Tariang  :2012:Re Khasi Enerprises, Shillong.
  2. “The Khasi Canvas” by J.N. Chowdhury: 1993:
  3. “Golden vine of Ri Hynniewtrep The Khasi heritage” by Sumer Sing Sawian :2011: Vivekanand Kendra institute of culter .
  4. “खासी दर्शन, संस्कृति एवं मान्यताएँ”, डॉ अनीता पंडा :2019: यश प्रकाशन, दिल्ली .
  5. साक्षात्कार – श्रीमती सिल्बी पसाह, (खासी-पनार), राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान, मेघालय राज्य की प्रथम हिन्दी सेविका, प्रतिष्ठित पद – सेंग खासी संस्था I

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डॉ अनीता पंडा

परिचय - डॉ अनीता पंडा

सीनियर फैलो, आई.सी.एस.एस.आर., दिल्ली

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