Author: डॉ. गोपाल कृष्ण भट्ट 'आकुल'

गीत/नवगीतपद्य साहित्य

माटी का दीया

  छोटे-छोटे दीप जले कितने उत्साह से. टिम-टिम तारे जैसे उतरे हैं आकाश से. गली-मोहल्ले-चौबारे घर-ड्योढी-द्वारे. दूर तलक दीपावली अपने

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समाचार

आकुल केे नवगीत संग्रह ‘जब से मन की नाव चली’ का लोकार्पण

नाशिक। दिनांक 16 अक्‍टूबर, रविवार को महाराष्‍ट्र की पुण्‍यभूमि त्रयम्‍बकेश्‍वर ज्‍योतिर्लिंग, सिंहस्‍थ तीर्थ और दक्षिण की गंगा गोदावरी के तट

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समाचार

प्रथम राष्‍ट्रीय हिन्‍दी साहित्‍य सम्‍मान समारोह 2016 सम्‍पन्‍न

साहित्‍य साधना सम्‍मान फिरोजाबाद के डा0 यायावर को,  कोटा, राजस्‍थान के डा0 गोपाल कृष्‍ण भट्ट ‘आकुल’ को विद्योत्‍तमा साहित्य् सम्‍मान, हैदराबाद

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कुण्डली/छंदमुक्तक/दोहा

नवरात्र पर दो रचनायें

नवरात्र पूजा घनाक्षरी छंद (कवित्‍त) महागौरी, कूष्माण्‍डा माँ, पूजूँ मैं धूप दीप से, ढोल नगाड़े बाजे से, घर में पधराऊँ।

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