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  • गीत

    गीत

    लेने का मौसम चला गया आया है वापिस देने का मौका है बहती गंगा में हाथ अपने भी धोने का कह दे पाकिस्तान से कोई पछताना ना तू कल को कश्मीर जो हड़पा है तूने लौटा...

  • गीत

    गीत

    अपनों ने जो किए हैं दिल पे वार दिखाने आया हूँ घायल भारतमाता का चित्कार सुनाने आया हूँ राशन नहीं दुकानों में कितनी काला बाज़ारी है खून मुफ्त में बहे यहां पानी की कीमत भारी है...

  • गीत

    गीत

    बन के चारण भाट जो पैसे वालों के गुण गाते हैं सरस्वती के पुत्र वो खुद अपना अपमान कराते हैं हमने ज्ञानी जान के इनको पलकों पर बैठाया था स्नेह और सम्मान दोनों हाथों से बरसाया...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    नहीं कुछ और इसमें मैंने खूने-दिल मिलाया है तब कहीं जा के अपनी शायरी में रंग आया है आँसू की स्याही को फैला गम के कागज़ पर जुदाई की धीमी आँच पर उसको पकाया है रिश्ता...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हिस्सा-ए-बाज़ार न बन, हिम्मत रख लाचार न बन कुछ अपनी भी सोचा कर, सबका खिदमतगार न बन दुश्मन भी रख थोड़े से, सारी दुनिया का यार न बन दिल में भी रख कुछ बातें, चलता फिरता...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हसरत-ए-दिल-ए-बेकरार कहां तक जाती दश्त-ए-तनहाई के उस पार कहां तक जाती मैं ज़मीं पर था तुम कोहसार-ए-गुरूरां पर थे गरीब की ख्वाहिश-ए-दीदार कहां तक जाती मैं तो आया था तुमने हाथ बढ़ाया ही नहीं इकतरफा दोस्ती...

  • करवाचौथ बहाना है

    करवाचौथ बहाना है

    करवाचौथ पर मेरी पत्नी को समर्पित एक कविता :- करवाचौथ बहाना है, बस इतना याद दिलाना है, रात को जब मैं सोती हूँ, हर स्वप्न तुम्हारा होता है, उठते ही आँखों के आगे, ये चेहरा प्यारा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ये गरज़ की रिश्तेदारियां मेरे शहर की रस्म-ए-आम है, मुफलिसों की कदर नहीं यहां तवंगरों को सलाम है खंजर है हर आस्तीन में और हर निगाह में फरेब है, कोई किसी का नहीं रहा ये मुकाम...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    शाम तनहा है और सहर तनहा, उम्र अपनी गई गुज़र तनहा छुप गए साये भी अँधेरों में, रात को हो गया शहर तनहा कोई दस्तक ना कोई आहट है, किसको ढूँढे मेरी नज़र तनहा मंजिलों पर...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    ज़रा सी बात में पूरी कहानी ढूँढ लेती है, मुहब्बत हो या नफरत इक निशानी ढूँढ लेती है नज़र कमजोर हो जाए चाहे जितनी बुजुर्गों की, नए किस्सों में पर बातें पुरानी ढूँढ लेती है सहलाती...