कविता

सीख मेरे आराध्य से

तुम तक हर कोई आसानी से ना पहुंच सके पार करने पड़े राही को अथा कठिन रास्ते, पीना पड़े गरल जब मंथन हो जीवन के सुख दुख के सागर में, खाना पड़े जटिलताओं के बेलपत्र भी उसे जब जब समय की मार के थपेड़े पड़े, आत्म सम्मान भी कायम रख सके तुम्हारा वो हिमालय के […]

कविता

ये तो सोचो ज़रा

बहुत कहने से क्या ? करोडो़ शास्त्रों से भी क्या ? कर्मकाण्ड कराने में क्या? तीर्थों पर भटकने से भी क्या? चित्त की परम् शांति जब ना मिली कहीं भी, तो यूं हर चौखट पर दर बदर, सर पटकने से होगा ही क्या?? जीत हार में उलझना ही क्या? जब कर्म करने को गीता ने […]

कविता

मानव स्वयं बने देवालय

मानव ने चाहा मंदिर बने, मस्जिद बने, गिरजाघर बने गुरुद्वारा बने आदी, आस्था और विश्वास का केंद्र है सभी, अच्छी बात है ये, मगर बहुत कुछ बाकी है अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जो है अधूरा हैं अभी भी, क्योंकि जब तक मन में भेदभाव है आडंबर है,दिखावा है, प्रपंच है आदी, तब तक […]

कविता

शिव और प्रकृति संवाद

हर जन्म में, मैं अथाह तप करती हूं, तुम्हें पाने की खातिर में हर बार मरती हूं। तुम तो मगर जीवन मृत्यु से परेह हो, कालों के काल महाकाल “मृत्युंजय” हो, मैं तो हर बार फसती हूं जीवन चक्र की दुविधाओं में, हर जन्म में मैं मिलती हूं, और हर बार बिछड़ती हूं, अनादि रूप,स्थिर […]

कविता

तपश्चर्या

दुख मिला है अगर तुम्हें, निश्चित ही वह निखरने को मिला होगा। हां दुख में ही इंसान निखरता हैं, सुख में तो जंग खा जाता हैं सुख ही सुख में तो इंसान मुर्दा हैं,दुख में ही उसे नई संभावनाएं खोजने का अवसर मिलता हैं तुम देखते, जिसको तथाकथित ‘सुखी इंसान’ कहते हो, वह कैसा हो […]

कविता

वैवाहिक जीवन

आदर्श वैवाहिक जीवन वह नहीं, जो केवल श्रृंगार रस में ही डूबा हो वास्तविकता में तो, आदर्श वैवाहिक जीवन वो हैं जिसमें समस्त रसों का अनुभव हो, प्रेम में स्वार्थी होना ही नहीं है अपितु उसकी शाश्वतता के लिए त्यागी भी होना होता हैं। एक दूसरे को हर क्षण समझ कर जीवन निर्वाह करना होता […]