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  • सत्य !

    सत्य !

    सपने देखो -सपने देखो ,और शुद्ध विचार हो | अटल -रहो अटल रहो ,पर कभी न अहंकार हो || निगाह लक्ष्य पर रखो ,जो हृदय की पुकार हो | सतत प्रयाश हो और ,सनातनी संस्कार हो...

  • मेरा गांव!!

    मेरा गांव!!

    आवो कुछ भूली बिसरी बात करे । क्या खोया क्या पाया, वो बात करे।। बचपन का जीवन-रोते-हंसते बीता । राहो मे मस्ती, स्कूल मे डरते बीता।। कभी भरी दुपहरी , खेला बागो मे । कभी गाय...

  • कविता- अपनापन!

    कविता- अपनापन!

    कुछ तेरे मेरे तो रिश्ते है, कुछ अपनेपन की बातें है, कुछ दर्द समय की ,पीड़ा है, कुछ अपनों की दी ,राते है !! हम भूल गये थे ,जीवन मे, कि जीवन संयम की बातें है,...

  • कविता – दीपोत्सव

    कविता – दीपोत्सव

    भेज दिया अरमान तुम्हारा, जो चाहे तुम कर लेना जितनी भी खुशिया तुम चाहो-अपनी झोली भर लेना मातु -पिता परिवार हमारा -खुश हो, धर्म हमारा है जीवन है वरदान उन्ही का -कुछ भी नहीं हमारा है...




  • महाभारत

    महाभारत

    बस कुछ दिन की बात बची है, दुनियाभर मे हाहाकार मची है । सजे-धजे सब हथियार पड़े है , ले-लेकर सब कुछ साथ खड़े है । दो-दो हाथ में अब देरी क्या है, मेरे से तगड़ी,अब...

  • किसान

    किसान

    इस पीढ़ी के बाद ,किसानी ना होंगी। जिंदा तो होंगे पर,जवानी ना होगी।। रोटी सबकी चाह,पर खेती ना करना। सर पर पगड़ी धार,रवानी ना होगी।। अंग्रेजी अब स्कूल खूले है गाँवो मे । आना जाना छूटा...