कविता

कविता-मेरा भारत!!

जहाँ राम नाम का जप चलता हो, हो राधाकृष्ण की पूजा । सारे जहाँ मे कही मिला ना, भारत जैसा दूजा ।। उसी धरा को आज पुनः , है दुष्टो ने नरक बनाया । अपना अपना स्वारथ लेकर, है डेरा पुनः जमाया ।। कंसो के इस दमन चक्र मे, धरती पूरी काप रही। इतिहास वही […]

गीत/नवगीत

कविता-मै गुदरी का लाल!!

मै गुदरी का लाल | नाम मेरा है छोटू- मोटू -वेद प्रकाश है असली नाम | बच्चा हु तो छोटू कहते -होटल पर है यही बस नाम || दुनिया क्या है पता नहीं है -जीवन में है एकही काम | बर्तन साफ करता छोटू -करे सफाई सुबहो शाम || मै गुदरी का लाल | मै […]

कविता

कविता- तेरा डंडा-तेरा सर!!

तेरा डंडा तेरा सर, हम मंदिर वहीं बनायेगे,, तू मस्जिद-मस्जिद कर,, तेरा डंडा तेरा सर,,,,, कोटि-कोटि जन की है मंशा, कृष्ण के हाथों मरेगा कंसा, बेटा राम-कृष्ण से डर,,, तेरा ठंडा तेरा सर ,,,,,,, राम -कृष्ण की धरती बोली, बेटा अब तक दुष्टो की हो ली, अब तू भी मनमानी कर,, तेरा ठंडा तेरा सर,,,,, […]

कविता

सत्य !

सपने देखो -सपने देखो ,और शुद्ध विचार हो | अटल -रहो अटल रहो ,पर कभी न अहंकार हो || निगाह लक्ष्य पर रखो ,जो हृदय की पुकार हो | सतत प्रयाश हो और ,सनातनी संस्कार हो || सत्य आज लड़ रहा है ,असत्य के प्रहार से | युगों -युगों से जीतता है ,अपने दृढी व्योहार […]

कविता

मेरा गांव!!

आवो कुछ भूली बिसरी बात करे । क्या खोया क्या पाया, वो बात करे।। बचपन का जीवन-रोते-हंसते बीता । राहो मे मस्ती, स्कूल मे डरते बीता।। कभी भरी दुपहरी , खेला बागो मे । कभी गाय संग बीता, बाल गोपालो मे।। वैभव मे बीता या, जिया गरीबी मे । सचमूच वैसा मजा नही,अमीरी मे ।। […]

कविता

कविता- अपनापन!

कुछ तेरे मेरे तो रिश्ते है, कुछ अपनेपन की बातें है, कुछ दर्द समय की ,पीड़ा है, कुछ अपनों की दी ,राते है !! हम भूल गये थे ,जीवन मे, कि जीवन संयम की बातें है, जो छूट गये वो भी अपने है, जिनकी कष्टो से ,नाते है !! हम चकाचौंध की दुनिया मे, कुछ […]

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कविता – दीपोत्सव

भेज दिया अरमान तुम्हारा, जो चाहे तुम कर लेना जितनी भी खुशिया तुम चाहो-अपनी झोली भर लेना मातु -पिता परिवार हमारा -खुश हो, धर्म हमारा है जीवन है वरदान उन्ही का -कुछ भी नहीं हमारा है परहित में जीवन ये बीते -पर हित का ही काम करू रहे सनातन धर्म हमारा -सदा धर्म का काम […]

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कविता – अयोध्या !!

ये वही अयोध्या है, जो श्री राम वाली है। जो दीप* नही इस नगरी, वो किस काम वाली है।। जो भूल गये इसको, उसको राम भूलेगे । जो मथुरा को भूले, उसे श्याम भूलेगे ।। जिसे भोले ने भी सराहा है, वही रघुकुल वाली है। जो सजी दिख रही है, इसी शाम वाली है।। जो […]

कविता

जीवन और कर्तव्य : मर्यादा

कहाँ गए वो आम बगीचे, वो बरगद की ऊँची शान | कहाँ गए मर्यादित नर-नारी, कहाँ गई मानुष पहचान || आडम्बर की होड़ लगी है, सिर्फ दिखावा शान हुई | मन -चित को हर लेनेवाली, वो मर्यादा कहाँ गई || जीवंत थी जो प्रकृति हमारी, जीवंत वो मुर्गे की बान | अठखेली अलबेली गोपियाँ, और […]

कविता

कविता_नकली मुखौटा!!

छोड़ दो नकली मुस्काने ,नकली मुखौटा छोड़ दो | आज तक जो कर लिए ,अब तो करना छोड़ दो || बज गई है खतरे की घंटी ,एक आहट हो रही | हर शक्स परेशान सा है ,आत्मा सब रो रही || रास्तो में चल रही है ,सब जिंदगानी खौफ से | मौत आने के पहले […]