लघुकथा

लघुकथा : बच्चा बड़ा हो गया है…

माँ की आँख लगी ही थी कि उसका 12 साल का बेटा स्कूल से घर आया और बोला : माँ , मैं अब बड़ा हो गया हूँ और स्कूल के बाकी बच्चे मुझे ये कहकर चिढ़ाते है कि मैं रोज ये फटी हुई शर्ट पहन कर आता हूँ !! मुझे नया शर्ट चाहिए !! दूसरों […]

लघुकथा

भगवान का भोग

‘हे प्रभु !! क्षमा करना, आज मैं आपके लिये भोग नहीं ला पाया !! मजबूरी में खाली हाथों पूजा करना पड़ रही है !!’ किसी भक्त का कातर स्वर सुनकर मैंने पीछे मुड़कर देखा !! अरे !! ये तो वही सज्जन हैं जिन्होंने अभी मेरे साथ ही मिष्ठान्न भंडार से भोग के लिये मिठाई ली थी […]

कविता

राष्ट्रभाषा हिन्दी के तिरस्कार पर प्रसिद्ध कवि शंकर कुरूप की व्यंग्य कविता

एक बूढ़ी औरत…. राजघाट पर बैठे- बैठे रो रही थी !! ना जाने किसका पाप था जो अपने आंसुओं से धो रही थी !! मैंने पूछा- माँ !! तुम कौन ?? मेरी बात सुन कर वह बहुत देर तक रही मौन !! लेकिन जैसे ही उसने अपना मुह खोला !! लगा दिल्ली का सिंहासन डोला […]