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  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    13-12 पर यति……..   कलियों को देख भौंरा, फूला समा रहा है फूलों के संग माली, मनमन अघा रहा है कुदरत का ये करिश्मा, पराग पूष्प पल्लव नैना भिरामा दृश्यम, हेला जगा रहा है॥   महातम...

  • “किसकी छबी है ये”

    “किसकी छबी है ये”

    “गज़ल” किसने इसे फेंका यहाँ, रद्दी समझ कर के हाथों से उठा अपने, पड़ी किसकी छबी है ये यहाँ तो ढ़ेर कचरे का, इसे भी ला यहीं डाला महज कूड़ा समझ बैठा, बता किसकी छबी है...


  • “मुक्तक”

    “मुक्तक”

    शीर्षक-मुक्तक, उपवन , बाग़, बगीचा, उद्यान, वाटिका, गुलशन। पथिक भी अब बाग में रुकता नहीं छांव उपवन में कहीं दिखता नहीं उजड़ा हुआ गुलशन बिरानी वाटिका भौरा भी कलियाँ जबह करता नहीं॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी...

  • सुविचार

    सुविचार

    हिंदी में अपनी भावनाओं को एक बार कह के तो देखिये…….. परिचय - महातम मिश्र शीर्षक- महातम मिश्रा के मन की आवाज जन्म तारीख- नौ दिसंबर उन्नीस सौ अट्ठावन जन्म भूमी- ग्राम- भरसी, गोरखपुर, उ.प्र. हाल-...

  • “मुकरियां”

    “मुकरियां”

    मन मह छाए रहता नितप्रति बहुरि करूँगी उससे विनती कह सुन लूँगी उससे बाता है सखि साजन, नहि सखि दाता॥ रात सताए हाथ न आए इधर उधर जा गोता खाए रखूँ सम्हारी न धीरज धारे है...

  • संस्मरण

    संस्मरण

    यूँ तो बात बहुत पुरानी है पर है पते की। 1970 के दशक का दौर था मेरे अनुज की शादी में राजदूत मोटर सायकल दहेज़ में मिलने वाली थी। उस वक्त सपने में सायकल ही बड़ी...

  • “शोकहर छंद”

    “शोकहर छंद”

    आज मजदूर दिवस पर सभी मजदूर भाई बहन को सादर प्रणाम, एवं हार्दिक बधाई मजदूरों की मज़बूरी को, समझो भी अब दाता जी देखों बच्चे झुलस रहे हैं, उनके तुमहि विधाता जी।। कुछ तो सोचो बिगड़...

  • “ग़ज़ल”

    “ग़ज़ल”

    212 212 212 212 तर्ज- हाल क्या है दिलों का न पूछो सनम तुम न आते न मौसम बदलता सनम दूर बादल कहीं रुक बरसता सनम आह भरती रही ये बिजुरया चमक श्वांस मेरे न बादल...

  • “दोहा मुक्तक”

    “दोहा मुक्तक”

    चिंतन यू होता नहीं, बिन चिंता की आह बैठ शिला पर सोचती, कितनी आहत राह निर्झरणी बस में नहीं, कमल पुष्प अकुलाय कोलाहल से दूर हो, ढूढ़ रही चित थाह॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी परिचय -...