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  • “कंहरवा तर्ज”

    “कंहरवा तर्ज”

    मंच को सादर प्रस्तुत है एक शिवमय रचना, आप सभी पावन शिवरात्री पर मंगल शुभकामना, ॐ नमः शिवाय “कंहरवा तर्ज पर एक प्रयास” डम डम डमरू बजाएं, भूत प्रेत मिली गाएं चली शिव की बारात, बड़...

  • “उलारा गीत”

    “उलारा गीत”

    सादर निवेदित एक भोजपुरी उलारा जो रंग फ़ाग चौताल इत्यादि के बाद लटका के रूप में गाया जाता है। कल मैनें इसी के अनुरूप एक चौताल पोस्ट किया था जिसका उलारा आज आप सभी मनीषियों को...

  • चौताल

    चौताल

      फागुन को रंग लगाय गई, पनघट पट आई पनिहारिन रंग रसियन चाह बढ़ाय गई, गागरिया लाई पनिहारिन निहुरि घड़ा अस भरति छबीली…………………………… मानहु मन बसंत डोलाय गई, पनघट पट आई पनिहारिन।।-1 अधखिली कली भरमाय गई,...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    शुक्रवार,चित्र,अभिव्यक्ति-आयोजन आप सभी के सम्मान में प्रस्तुत है एक मुक्तक……. उखाड़ों मत मुझे फेकों, अरे मैं रेल की पटरी न गुस्सा आग बरसाओ, उठाती हूँ तेरी गठरी। जरा सोचो निहारो देख लो मंजिल कहाँ जाती मंजिल...

  • “गीत-नवगीत”

    “गीत-नवगीत”

    “गीत-नवगीत” गीत कैसे लिखूँ नाम तेरे करूँ शब्द शृंगार पहलू समाते नहीं किताबों से मैंने भी सीखा बहुत हुश्न चेहरा पढ़ें मन सुहाते नहीं॥……. गीत कैसे लिखूँ …….. ये शोहरत ये माया की मीठी हंसी लिए...

  • “कुंडलिया”

    “कुंडलिया”

    “कुंडलिया” चहक चित्त चिंता लिए, चातक चपल चकोर ढेल विवश बस मे नहीं, नाचत नर्तक मोर नाचत नर्तक मोर, विरह में आँसू सारे पंख मचाए शोर, हताशा ठुमका मारे कह गौतम कविराय, बिरह बिना कैसी अहक...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    हे यदुनंदन अब तो आओ, जग की नैया पार लगाओ विवश हुआ है जीवन जीना, एक बार तो चक्र चलाओ। रुपया पैसा जग जीवन में, हे प्रभु बहुत महान हुआ आके देखों अपनी द्वारिका, गोकुल मथुरा...

  • विदाई

    विदाई

    आज सुबह से दिल बार बार कह रहा है गुजरे हुये लम्हों पर इतबार कर रहा है बीत गया एक बचपन आँखों के सामने बेटी की डोली है आँसू विचार कर रहा है॥ गत कुछ साल...

  • हिरनी

    हिरनी

    एक दिन एक हिरनी जंगल में अपने झुंड से अचानक बिछड़ जाती है। घबराई हुई, डरी हुई, बेतहासा दौड़ते-दौड़ते वह नन्हीं हिरनी जंगल के उस छोर पर आ खड़ी होती है जहां से मनुष्यों की बस्ती...