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  • “कुछ हाइकु”

    “कुछ हाइकु”

    कटते बाग उजड़ती धरती रूठता मेघ॥-1 लगाओ पेड़ जिलाओ तो जीवन बरसे मेह॥-2 बरसों मेघा पवन पुरवाई धरा तृप्त हो॥-3 काला बादल छाया रहा घनेरा आस जगी है॥-4 नहीं भूलती वो बरसाती रात बहता पानी॥-5 बहा...

  • “दोहा”

    “दोहा”

    हरिहर अपने धाम में, रखें भूत बैताल गणपति बप्पा मोरया, सदा सर्व खुशहाल।।-1 बाबा शिव की छावनी, गणपति का ननिहाल धन्य धन्य दोनों पुरा, गौरा माला माल।।-2 शिव सत्य वाहन नंदी, डमरू नाग त्रिशूल भस्म भंग...



  • “रुबाई”

    “रुबाई”

    चित्र अभिव्यक्ति …….. गुटुरगूं गुटुरगूं दिल जब करता है अंदर कबूतर फुद-फुदक उड़ता है प्रेमी परिंदा मिलन की चाह लिए इतिश्री चोंच को आलिंगन करता है॥ महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी परिचय - महातम मिश्र शीर्षक- महातम...

  • “दोहा मुक्तक”

    “दोहा मुक्तक”

    शब्द/शीर्षक मुक्तक आयोजन शब्द- उपाय – युक्ति, साधन, तरकीब, तदबीर, यत्न, प्रयत्न उपाय तो बहुते हैं, करो युक्ति मन लाय साधन है सुविधा लिए, यत्न प्रयत्न बनाय तरकीब तदबीर मिले, नए सोच संचार कर्म धर्म साथी...

  • “दोहे”

    “दोहे”

      पशु पंक्षी की बोलियाँ, समझ गया इंसान निज बोली पर हीनता, मूरख का अभिमान।।-1 विना पांव चलते रहे, प्रीति रीति अरु नाव लहर लाग लग डूबते, दे जाते बड़ घाव ।।-2 हरषित मन बैठा रहा,...

  • “पिरामिड”

    “पिरामिड”

    1॰ ये पेड़ खड़े है कटेंगे क्या नजर लगी कुछ तो बात है छाया देंगे घर को॥ 2॰ लो सूख रहा है ड़र गया कट जाएगा बेकार हो गया मरती हरियाली॥ 2 महातम मिश्र, गौतम गोरखपुरी...

  • “गज़ल”

    “गज़ल”

      वज्न- 1222 1222 1222 1222 “खुदा भी जब जमीं पर आसमाँ पर देखता होगा” हवाओं में तपिस इतनी भिगे दामन मिनारों में न बच पाए चुनर धानी न पानी ही किनारों में बदले रुख दिशाओं...

  • “दोहा”

    “दोहा”

      कैसे कहूँ महल सुखी, दिग में ख़ुशी न कोय बहुतायती अधीर है, रोटी मिले न भोय।।-1 मुट्ठी भरते लालची, अपराधी चहुँ ओर कोना कोना छानते, लेते मणी बिटोर।।-२ दूधों वाली गाय को, करते सभी दुलार...