कविता

दिवाली

एक दिवाली ऐसी भी हो जहाँ न शोर पटाखों का हो और न बारूदों के धुएं का जहर हवा में घोला जाये अपनी हिंसक खुशियों के हित प्रकृति पर ना दुराचार हो पशु पक्षी ना व्याकुल होकर समुचित कहीं ठिकाना ढूंढें हे मानव के सभ्य समाज हे प्रकृति की परम जाति शिक्षा और विज्ञान के […]

गीतिका/ग़ज़ल

बहुत तड़पाते हैं मुझको ये दुनिया के उजाले अब ।

भँवर में डोलती कश्ती कोई कैसे संभाले अब । ये दिल करता है कर दूं खुद को तूफ़ां के हवाले अब । बहुत ही स्याह उसकी हिज़्र की हर रात लगती है, चराग इक याद का उसकी ऐ मेरे दिल जला ले अब । अजब तासीर है कोई जो पल भर कम नहीं होती, भला […]

गीतिका/ग़ज़ल

हो जाऊं मै इतना दीवाना

हो जाऊं मै इतना दीवाना । तुम छोड़ दो मुझको समझाना । क्या ठीक है और गलत क्या है, इस बात से हूं मै बेगाना । जलने से शमा के पहले ही, जल जाएगा ये परवाना । यूँ प्यास मिटाऊं नज़रों की, बन जाऊं मै तेरा नज़राना । प्यास तुम्ही , तुम ही साकी, तुम […]

गीतिका/ग़ज़ल

जो बढ़ती जाती है पल-पल वो तासीरे मुहब्बत है

जो बढ़ती जाती है पल-पल वो तासीरे मुहब्बत है । कि मिलकर खाक में पायी ये जागीरे मुहब्बत है । वो मिलकर भी नहीं मिलता, वो खोकर भी नहीं खोता, लिखी किसने बड़ी बेढब ये तकदीरे मुहब्बत है । मेरी हस्ती, मेरे अरमां, मेरे सपने उजड़ते हैं, मगर मिटती नहीं दिल से ये तहरीरे मुहब्बत […]

गीतिका/ग़ज़ल

याद हर वक्त जो आये तो नशा बन जाये

याद बेवक्त जो आये तो सजा बन जाये । याद हर वक्त जो आये तो नशा बन जाये । बनके अहसास जो घुल जाती है तू दिल मे, मेरी हर बात मुहब्बत की अदा बन जाये । नूर है, रब है, इबादत है या खुशबू तू, तेरी हसरत जो उठे दिल मे दुआ बन जाये […]

गीतिका/ग़ज़ल

हिज़र की स्याह रातों में चरागे दिल जलाया कर

मुहब्बत को मुहब्बत के सलीके से निभाया कर । हिज़र की स्याह रातों में चरागे दिल जलाया कर । वो हर मंजर कि जिसमें तुझको तेरी मौत दिखती है, उसी को ही तू अपने जीने का जरिया बनाया कर । मुहब्बत का फ़साना तो नहीं है चन्द रोजों का, तू उसकी इंतजारी में उमर अपनी […]

गीतिका/ग़ज़ल

मेरे सीने में है लेकिन दिल तेरी जागीर है

मेरे सीने में है लेकिन दिल तेरी जागीर है  । क्या बताऊँ किस कदर अब प्यार की तासीर है । दीद की प्यासी मेरी नज़रों ने पाया ये मुकाम, बन गयी दुनिया की हर इक शै तेरी तस्वीर है । अब करे तो क्या ये बीमार-ए-मुहब्बत तू बता, तू ही दर्दे दिल तू ही तो […]

गीतिका/ग़ज़ल

तुझे याद भी न करना तुझे भूल भी न पाना

मुझे प्यार ने सिखाया है प्यार यूँ निभाना । तुझे याद भी न करना तुझे भूल भी न पाना । मेरे यार का करम है इस इश्क का का फ़साना । यूँ दूरियाँ बढ़ाकर नजदीकियां बढ़ाना । हर शै में मिल रहा है दरे इश्क का ठिकाना । आया है जब से दिल को दिल […]

गीतिका/ग़ज़ल

गर आतिशे हिज़र में ये खुदी जली न होती

गर आतिशे हिज़र में ये खुदी जली न होती । तो ज़िन्दगी में ऐसी कभी रौशनी न होती । मै मान लेता मुझको तुम छोड़ कर गए हो, दिल मे अगर तुम्हारी मौजूदगी न होती । मै सोचता हूँ अक्सर दुनिया मे फिर क्या होता, गर जान लेने वाली ये आशिक़ी न होती । दुनिया […]

गीतिका/ग़ज़ल

गर टूटते न ‘नीरज’ दुनिया में लोगों के दिल

गर आतिशे हिज़र में ये खुदी जली न होती । तो ज़िन्दगी में ऐसी कभी रौशनी न होती । मै मान लेता मुझको तुम छोड़ कर गए हो, दिल मे अगर तुम्हारी मौजूदगी न होती । मै सोचता हूँ अक्सर दुनिया मे फिर क्या होता, गर जान लेने वाली ये आशिक़ी न होती । दुनिया […]