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  • मुझे अच्छा लगता है

    मुझे अच्छा लगता है

    मेरे प्रियतम ! तुम्हारे प्यार से खुद को सजाना मुझे अच्छा लगता है, सुहाग की निशानियों से अपना प्यार जतलाना मुझे अच्छा लगता है। तुम्हारी समृद्धि के लिए भवों के बीच कुमकुम की बिंदी लगाना मुझे...

  • दण्ड

    दण्ड

    पूरा मोहल्ला उनको पंडितजी कहता था, सब उनके पास जाकर सलाह लेते, उनको मान सम्मान देते। उनका रुतबा भी बहुत था। सीमा और उसका परिवार जब उस मोहल्ले में रहने गए तो अड़ोस पड़ोस के लोगों...


  • कठपुतली

    कठपुतली

    पापा कहते करो पढाई मिलेगी तुमको बहुत बड़ाई। मम्मी कहतीं सबकी सुन भर लो खुद में अच्छे गुण। भैया  कहते अभ्यास करो खेल जगत में नाम करो। दीदी को है संगीत पसंद बाकी सब तुम कर...

  • किन्नर

    किन्नर

    हाँ, मैं हूँ किन्नर होश संभाला स्वयं को पाया किन्नरों के बीच। नहीं जानता कैसी होती माँ कैसा होता पिता क्या होती ममता, बड़ा हुआ तब जाना मैंने दिया जिसने जन्म किया उसी ने बेघर। पहन...

  • माँ तुम बड़ी अजीब थी

    माँ तुम बड़ी अजीब थी

    जब मैं छोटी थी मुझे परियों की सी फ्रॉक पहना और बालों में रिबन लगा आंखों में काजल लगा प्यार से निहारती थी, और इस डर से कि कहीं नज़र न लग जाये मुझे काला टीका...

  • अपूर्ण को पूर्ण

    अपूर्ण को पूर्ण

    नहीं चाह मुझे रत्न जड़ित आभूषणों की, नहीं कामना मुझे सलमे सितारों से सजी चंदेरी चुनर की, नहीं ईप्सा मुझे रक्त अधरों की, नहीं अभिलाषा मुझे संगमरमर से बने महलों की। मैं पैबंद लगी सूती धोती...

  • चाँद जब अपनी छत पर होगा

    चाँद जब अपनी छत पर होगा

    शांत पड़ी ज़िन्दगी में हलचल मचाती सी तुम्हारी याद ज्यों शांत झील में गिरता जलप्रपात। जल से छाई ज्यों चहुँ और हरियाली वैसे ही तुम्हारी याद प्रसूनों की महक सदृश जीवन में हरीतिमा लाई। आज नहीं...

  • आईना

    आईना

    हाथ को आईना बना चल दी मैं कलयुग से सतयुग की ओर, इस आईने में कुछ अतीत की तस्वीरें उभरीं– सत्य मुख पर आवरण डाल कोने में दुबक कर रो रहा है, उसकी दयनीय स्थिति देख...

  • अनुभूति

    अनुभूति

    टूटी तन्द्रा मन जाग उठाउपवन ऐसा था महक रहा। मैं छोड़ सभी कुछ दौड़ पड़ीरह गयी अचम्भित खड़ी खड़ी। पादप पर विकसित रक्त पुष्पखिल गए ज़मीं पर पात ख़ुश्क। पत्तों से फिसल रही ओस बूँदकर रही...