कविता

बेटियाँ

सीसक रही थी माँ आज गर्भ मे बेटी को मार दिया क्या कुसूर था नन्ही मासूम का परिवार वालों ने बेरहमी से संहार किया !! कई बार बेटी का नाम सुना, किन्तु मौत की नींद सुलाकर, माँ को गुमराह किया खुदकिस्मत जुड़वाँ बच्चे, बेटा व बेटी दुआएं दे रही भाई, तेरे कारण मैं  धरती पर […]

सामाजिक

नारी शिक्षा

प्राचीन भारत मे महिलाओ के  स्थान समाज मे काफ़ी महत्वपूर्ण था |महिलाएं भी पुरुषो के साथ यज्ञ मे भाग लेती थी, यूद्धाे मे जाती थी व शाशत्रर्य करती थी |धीरे -धीरे महिलाओ का स्थान पुरुषो के बाद निर्धारित किया गया तथा पुरुषो ने महिलाओ के लिए मनमाने नियम बनाए और उनको अपना जीवन बिताने के […]

कविता

हाँ मुझे अभी भी याद है

 खुशियाँ, व उमंगो को लिए चलते  तनिक बात पर राहगीर हँसते  साइकिल पर होती हमारी सवारी  एक पर होते दो-दिन अपनों पर ही भारी  बीती बातें अपनों में करते फरियाद हैं  हाँ मुझे अभी भी याद है!!  बारिश हो या झिलमिलाती धूप  होठों पर मुस्कान,सदा रहती पेटो  में भूख  ज्यो ही खाने की घंटी लगती […]

कविता

माँ

माँ  आज है फिर डरी डरी सी उन दरिंदों की बात मुझे है बताती माँ  नींव बन जब हर बात है समझाती छत टिकी  है घर की कैसे? तब समझ है आती!! पापा के कंधे दीवारें हैं घर की बेटा पापा की आंखें हैं घर की चौखट है बताती वदी नेकी जो मर्जी वह करके […]

कविता

नव वर्ष

ज्यो तरु की डलिया,कपिल जने नवीन हो आए नव वर्ष त्यों, जैसे मेघ कुलीन हो गुजर गए वर्ष नमी अँधेरों की प्रसन्नता से छलके, लबों पर जैसे प्रवीण हो!! ये बादल की लहरें भी कुछ कह रही वसंत का आगमन, कोयल झूम कर गा रही हो गुरुजन दे हमें आशीर्वाद यहाँ सच्चा हर घर मे […]

कविता

मेरा गाँव

मेरा गाँव अब वो गाँव नहीं रहा है जहाँ पर मिट्टी की सुगंध आती कहाँ अब वो घास-फुस के घर अब हमारा गाँव बदल रहा है!! कहाँ अब विद्यालय मे बच्चों की जमघट सब के सब मॉर्डन की चाहत मे, जाने कहाँ खो गई वो भूमि की खुश्बू सीमेंट की कही दूर महक मे!! बच्चों […]

लघुकथा

बेघर

मीना और अजय  अपने घर- बार छोड़ कर प्रदेश कमाने आये थे|दोनों पति-पत्नी ईट के भट्टे मे काम किया करता  था |दोनों की सोच थी हम मिलकर काम करेंगे और रूपये को इकट्ठा कर अपना एक अच्छा मकान बनाएंगे |इस आशा से मिना और अजय दिलों जान से काम किया करता था |ईट भट्टे के […]