गीत/नवगीत

प्रेम पर कोहरा घना है-नवगीत

बेरुखी का दृश्य यह कैसा तना है अर्थ में ही लिप्त हैं सब प्रेम पर कोहरा घना है। मार महँगाई की सब पर पड़ रही है ख्वाहिशों की मांग पल -पल बढ़ रही है। उत्सवों ने जीना भी दूभर किया है । होंठ सीं लो बोलना भी तो मना है । प्रेम पर कोहरा घना […]

लघुकथा

हँसना मना है-लघुकथा

मेरी पड़ोसिन सरस्वती ने बातों- बातों में आज बताया कि “उसके पति को हँसना पसंद नहीं है” | सुनकर मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ |“ पढ़ा लिखा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ,बड़े पद पर कार्यरत है | फिर भी इतना गंभीर क्यों रहता है” ? सरस्वती ने बताया कि बिना उसकी परमीशन के घर में कोई काम करने […]

लघुकथा

गिरावट -लघु कथा

डॉ ठाकुर ने बेटी की विदाई होते ही सभी रिश्तेदारों के सामने घोषणा कर दी कि “मैं दूसरी शादी करना चाहता हूँ” | सब लोग आश्चर्य चकित रह गए ,यह क्या कह रहा है ? सबने ठाकुर को समझाने की कोशिश की लेकिन उसने किसी की न सुनी | “उस पर तो प्यार का भूत […]

लघुकथा

लघु कथा : विकृत मानसिकता

सुरभि का विवाह एक बहुत बड़े बिजनेस मैन से हुआ था। विवाह माता -पिता ने खुद देख कर किया था। सुरभि का पति हरप्रीत किसी न किसी बहाने से सुरभि को रोज प्रताड़ित करता था। कभी खाने की थाली उसके ऊपर फेंक देता, कभी दीवार पर पटक देता। इस प्रकार की प्रताड़ना से सुरभि का दो […]

समाचार

`डॉ रमा द्विवेदी को मिला `महादेवी वर्मा श्रेष्ठ कवयित्री सम्मान’ -2017

`युवा उत्कर्ष साहित्यिक मंच’ (न्यास ) ने अपना चतुर्थ अखिल भारतीय साहित्य महोत्सव रविवार दिनांक 19 नवम्बर की प्रात : 9 बजे से पी के रोड ,रेलवे अधिकारी क्लब ,नई दिल्ली-1 के सभागार में संपन्न हुआ | श्री जितेंद्र निर्मोही (वरिष्ठ साहित्यकार ,कोटा ,राजस्थान) की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ इंदु […]

लघुकथा

मैं द्रौपदी नहीं हूँ -लघु कथा

सत्रह साल की प्रज्ञा की शादी माता -पिता ने एक अच्छा पढ़ा लिखा लड़का देख कर कर दी | प्रज्ञा पति के घर आ गई ,कुछ ही दिन में पति धर्मपाल पढाई करने के लिए वापस चला गया | प्रज्ञा को अपने देवर और ससुर के साथ अकेले गाँव में रहना पड़ा ,घर में कोई […]

लघुकथा

“उसे क्या हुआ था” ? -लघु कथा

नवयुवक रामू भीमावरम से हैदराबाद पैसा कमाने के लिए आया |छरहरे बदन का सुघड़ -सुंदर , मेहनती और शालीन लड़का था | पत्नी भी साथ थी और पांच- छै वर्ष का एक लड़का भी था | दोनों पति -पत्नी घरों में काम करते थे और जो अतिरिक्त समय मिलता लोगों के कपड़ों में इस्त्री करके […]

कुण्डली/छंद

सरसी छंद

1 – वाह वाह ही सब करते हैं ,कविता हुई फरार | फेसबुक ने दिया है सबको ,कैसा यह संसार || अपने मन की लिखते हैं सब , नहीं छंद का नाम| जाने कैसे बिक जाते हैं , बिन सुगंध के आम || 2 – झूठी शान कमाने खातिर ,ठगे गए कवि लोग | कविता […]

लघुकथा

एक्सचेंज मैरिज -लघु कथा

मेरी एक सहकर्मी उमा ने बताया कि -“”उसके भाई और बहिन की एक्सचेंज मैरिज है ”| मैंने पूछा- “ऐसा क्यों किया” ? उसने कहा – “दहेज़ से बचने के लिए” | मैंने फिर पूछा -“क्या तुम्हारे भाई -बहिन इस शादी से खुश हैं ”? उसने कहा -`नहीं ‘ मेरी बहिन वाणी की उसके पति श्रीनू […]

कुण्डली/छंद

ढोंगी बाबा -कुण्डलिया छंद

1 – बाबा जी के ढोंग से, मिली आज यह सीख | झूठों को पतियात जग,सच को मिले न भीख|| सच को मिले न भीख ,सदा ही वह दुख पाता | झूठ रहे मदमस्त ,,,,,,, महल में मौज उड़ाता || पाखंडी हर जगह , तीर्थ स्थल हो या काबा | रहें सदा ही सजग , […]