कविता

ऐसा तुमने होना ना दिया

सख्त पाहन सा दिल मेरा हो ऐसा तुमने होने ना दिया लगा इश्क मेरी वफाओ से सकूँ से तुमने सोने ना दिया कर लूं तिजारत खुद से मैं हवाओं में तूने खोने ना दिया भीगा है मोतियों से मन मेरा आखों को तुमने रोने ना दिया जी लूं तन्हा ये जिंदगी अब अकेले बोझ ये […]

कविता

गर पैसे कागज के टुकड़े होते

गर पैसे सिर्फ कागज के टुकड़े होते तो समाचारो में उजागर मुखड़े होते ना भागते लोग चकाचौंध की ओर होती अमीर गरीब की एक सी भोर बदल जाती फिल्मी रीति रिवाज ना आती कभी घुंघरू की आवाज धूल से सनी वो किसानी मेहनताना ना मांगती कभी सरकारों से हर्जाना माल्या, नीरव कोई फरार नही होता […]

गीत/नवगीत

कोई फर्क नही जब किसी के जूते पड़ जाए

कोई फर्क नही जब किसी के जूते पड़ जाए हमे तब भी फर्क नही जब कि बुथें कम जाए हैरानी तो तब होगी हम भारतीयों को जबकि राष्ट्रहित में इस राजनीति के मंसूबे थम जाए कोई फर्क ,,,,,,,,,,,,,,,, कोई कह रहा है मैच पुलवामा में फिक्स था तो किसी के ह्रदय में सबूत देने में […]

कविता

आतंकिस्तान ढहा के नही लौटे

मजा आया खूब हमले पर पर ठहाके नही लगे मिटे ठिकाने पर आतंकिस्तान ढहा के नही लौटे मलाल रहेगा हमारी वायु सेना को की घुसे घर मे नाचे खूब पर कराची से दुल्हन उठा के नही लौटे चीतों की फुर्ती देखने लायक थी एल ओ सी पार तांडव किया 21 मिनट पर सर झुका के […]

कविता

पाकिस्तान का सर्वनाश करो

संग्राम नही अब तुम संहार करो पाकिस्तान के टुकड़े हजार करो रक्षा बजट में यदि हो कोई कमी तो राफेल जैसे और करार करो आतंकियो को पनाह देने वाले राष्ट्र का गोलियों से भगार करो मोदी देश की तुमसे इक्षाये है लाहौर कराची तक वार करो कब तक तिरंगे से लपेटी जाने जाती रहेंगी , […]

कविता

कैसे करवानी इज्जत , करनी सिखा देंगे

रख दो वो खड्ग पुरानी, इसमे धार नही राम पर उठे कोई भी उंगली स्वीकार नही खूब की इन्होंने हमारे भारत मे मनमर्जी खाकर के हमारे वतन का चढ़ गई चर्बी दल्लो ने मानसिकता पर हर वार किया अपने ही वतन में अपनो का संहार किया हम पढ़ाते रहे अहिंसा का पाठ बच्चो को और […]

कविता

जराह बन इलाज करूँ अश्क से

गर तू बीमार है, हमारे इश्क में जराह बन इलाज करूं अश्क से निजोर ना समझना , आशिकी को जरीफ चेहरा बताया हर किसी को ज्ञान इतना नहीं प्रज्ञाल कहलाऊँ हर वक्त तुम्हे अपने ही पास पाऊं भीग गयी बीथि ह्रदय द्वार की मेरे जंजीरे जब से जकड़े प्यार की तेरे जबरन श्राय खाली किया […]

गीतिका/ग़ज़ल

बहुत बर्दास्त की तेरी बेवफाई

बहुत बर्दास्त की तेरी रुसवाई दिल तो दिल आत्मा चिल्लाई आसमां में छाए बादल की तरह आंख तेरी बेवफाई में भर आयी भींच लेती बाहों में जैसे सिहरन सिमट गया मिली जब से तन्हाई सुनामी की लहरें कहर बरफ़ाती याद तेरी भी कुछ ऐसे ही रुलाई शहर भी उजड़ गया उस बाढ़ में जिसमे कभी […]

कविता

पत्नि मेरी मायके गयी है

श्रीमती जी मेरी मायके गयी है खरी खरी वो मुझे सुनाके गयी है आते है रात में खौफनाक सपने आके बताऊंगी कसम खाके गयी है फिर भी हूँ मैं अभी बेखौफ उनसे कुछ दिन ही सही , मजा दे गयी है मुझसे ना हो , हरकते उटपटांग बगल वाली को समझायके गयी है होगी मेरी […]

कविता

राम मेरे नही, राम तेरे नही

राम मेरे नही राम तेरे नही , राम सनातनियों के है राम हम सबके है किसने कहा भाजपाइयों के है जिसने सीमा तय की मर्यादा की , धर्म संसद की राम उनके जीवन मे प्रस्फुटन कर दे आनन्द की जो जुवां राम नाम से खुले राम पर ही विराम हो उस अंग -अंग में मेरे […]