गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

हम शर्मिंदा नहीं बेशर्म हैं, इसीलिए होते कुकर्म हैं। अपना इतिहास भूल गए, इसीलिए हो गए बेदम हैं। शस्त्र नहीं मोमबत्ती उठाई, इसीलिए आँखें हुई नम हैं। उठो अन्यायी का करो वध, सुनो! कहता यही हर धर्म है। समय पर मिल जाये न्याय, यही सबसे बड़ा मरहम है। “सुलक्षणा” लड़ो लड़ाई, तोड़ना व्यवस्था का भ्रम […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

बनकर रणचण्डी दुष्टों का संहार करो, बच ना पाए काल से ऐसा प्रहार करो। बस लोग तो मोमबत्ती ही जला सकते हैं, लंका दहन के लिए खुद को तैयार करो। आज आज चिल्लाएंगे कल भूल जाएंगे, इन कायरों का तुम अब ना ऐतबार करो। वो केशव भी नहीं आएंगे चीर बढ़ाने को, इस कलयुग में […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

किसी की दीवाली होगी, किसी का दिवाला होगा, किसी के घर अंधेरा होगा, किसी के उजाला होगा। अगर चुनाव परिणाम नहीं आया पक्ष में आज, देखना फिर तुम ईवीएम का ही मुँह काला होगा। कई उम्मीदवारों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है, सभी उम्मीदवारों का भगवान ही रखवाला होगा। जनता ने भी बड़ी चालाकी […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

नफरतों के इस दौर में प्यार की उम्मीद मत कर, हर किसी से सच के स्वीकार की उम्मीद मत कर। आँखों के इशारे सच्चे नहीं झूठे होते हैं आजकल, नजरों के मिलने से इजहार की उम्मीद मत कर। स्वार्थ की तराजू में तोला जाता है प्यार भी यहाँ, आज बिना स्वार्थ के सरोकार की उम्मीद […]

गीतिका/ग़ज़ल

कमाल कर दिया

मोदी शाह की इस जोड़ी ने कमाल कर दिया, बिना गला काटे दुश्मनों को हलाल कर दिया। पाकिस्तान भी ये समझ नहीं पा रहा क्या करे, धारा 370 हटाकर उसका बुरा हाल कर दिया। उमर, मुफ़्ती की गीदड़ धमकी काम नहीं आई, नाकाम गद्दारों का आज षड़यंत्र जाल कर दिया। वे अलगाववादी भी माथा पीटकर […]

गीत/नवगीत

गीत – राँडे हरियाणा कै

राँडे हरियाणा कै बहोत खुशी मना रे, बहु कश्मीर तै ल्यावांगे प्लान बना रे। जीत देखै ओड़े राँडा कै टोल कै टोल बैठे सँ, 370 हटण की खुशी म्ह बोतल खोल बैठे सँ, पी कै दो पेग लोगाँ नै बहोत घणे तना रे। एक रांडा न्यू बोल्या मैं तो रहूंगा घर जमाई, सेब के बागां […]

गीतिका/ग़ज़ल

गीतिका

मोहब्बत के मायने और दायरे ही सिमट गए, हवस अपनी बुझाने को दोनों ही चिपट गए। शर्म नहीं रही है जमाने की आज किसी को, भरे बाज़ार मिलते ही एक दूजे से लिपट गए। कभी गाल चूमें कभी चूमने लगे होंठ दोनों, बस इतने में ही लड़का लड़की निपट गए। लाख कोशिश करना तुम ढूंढ़ने […]

गीतिका/ग़ज़ल

ग़ज़ल

वक़्त वक़्त की बात है, नसीबों का खेल है, बंजर दिल पर प्यार का बीज बोते देखा है। मैंने सुना था पत्थरों को दर्द नहीं होता, पर मैंने एक पत्थर दिल को रोते देखा है। दिल तोड़ कर मेरा जो हँस रहा था कभी, उसे तन्हा रातों में तकिया भिगोते देखा है। जो कहा करता […]

कविता

कविता

हे भगवान मेरी है बस इतनी सी फरियाद चाहे जीवन छोटा ही देना पर देना दीपक के जैसा जैसे अँधेरी राहों को रोशन कर देता है दीपक मैं भी रोशन कर सकूँ किसी के सुने जीवन को फैला सकूँ घर घर में माँ सरस्वती का दिया ज्ञान प्रकाश उस दीपक के जैसा मेरे प्रभु जो […]

गीत/नवगीत

तुझसे बिछड़कर…

तुझसे बिछड़कर मैं सोई नहीं, दर्द आज भी है पर मैं रोई नहीं। जख्मों को मेरे आकर सहलाए, प्यार से उन पर मरहम लगाए, बेदर्द ज़माने में ऐसा कोई नहीं। बेशक तूने मुड़कर देखा नहीं, हाथों में मिलन की रेखा नहीं, पर तुझे पाने की आस खोई नहीं। खेल ये अपनी तकदीरों का है, वक़्त […]