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  • गीतिका

    गीतिका

    मोहब्बत के मायने और दायरे ही सिमट गए, हवस अपनी बुझाने को दोनों ही चिपट गए। शर्म नहीं रही है जमाने की आज किसी को, भरे बाज़ार मिलते ही एक दूजे से लिपट गए। कभी गाल...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    वक़्त वक़्त की बात है, नसीबों का खेल है, बंजर दिल पर प्यार का बीज बोते देखा है। मैंने सुना था पत्थरों को दर्द नहीं होता, पर मैंने एक पत्थर दिल को रोते देखा है। दिल...

  • कविता

    कविता

    हे भगवान मेरी है बस इतनी सी फरियाद चाहे जीवन छोटा ही देना पर देना दीपक के जैसा जैसे अँधेरी राहों को रोशन कर देता है दीपक मैं भी रोशन कर सकूँ किसी के सुने जीवन...

  • तुझसे बिछड़कर…

    तुझसे बिछड़कर…

    तुझसे बिछड़कर मैं सोई नहीं, दर्द आज भी है पर मैं रोई नहीं। जख्मों को मेरे आकर सहलाए, प्यार से उन पर मरहम लगाए, बेदर्द ज़माने में ऐसा कोई नहीं। बेशक तूने मुड़कर देखा नहीं, हाथों...

  • ग़ज़ल – शहादत पर…

    ग़ज़ल – शहादत पर…

    शहादत पर हमारी तुम सियासत मत करना, सुनो बदनाम हमारी यह शहादत मत करना। कड़ी निंदा की जगह घर में घुसकर मारना, केवल दिखावे की तुम खिलाफत मत करना। भेजकर देखो औलाद को देश की सीमा...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मेरे दर पर वो आया नहीं कभी, आकर गले से लगाया नहीं कभी। राह तकते तकते आँखें थक गयी, चेहरा उसने दिखाया नहीं कभी। गया था करके वादा लौट आऊँगा, वो वादा उसने निभाया नहीं कभी।...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    दिल से निकली बद्दुआ कर असर गयी, मैं ना चाहते हुए भी टूटकर बिखर गयी। तुमने कोशिश नहीं की दर्द जानने की, कौन सी बात इतना मजबूर कर गयी। तुमसे उम्मीद थी तुम समझोगे दर्द को,...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    कर लिया फैसला ये दिल तेरे नाम लिखेंगे, गज़ल तेरे हुस्न पर सुबह ओ शाम लिखेंगे। कैसे धड़क उठा दिल तुमसे नजरें मिलते ही, नजरों ने किया जो वो पहला सलाम लिखेंगे। चाँदनी रातों में हाथों...

  • प्रेम

    प्रेम

    कोय कोय समझै जगत म्ह इस प्रेम की गहराई, भक्ति, गृहस्थी अर मुक्ति की राह इसनै दिखाई। पत्थर की मूरत तै प्रेम वा मीरा बाई कर बैठी, बालकपण म्ह वा पति उस कृष्ण नै वर बैठी,...

  • गजल

    गजल

    देख तेरे तेवर अब कोई उम्मीद नहीं रही, सच कहूं आज से मैं तेरी मुरीद नहीं रही। पहले लड़ लेती थी मैं जमाने से तेरे लिए, लेकिन अब वो पहले जैसी जिद नहीं रही। हर रोज...