Author :

  • गीतिका

    गीतिका

    जब से मिली है लड़कियों को आज़ादी, खुद लड़कियाँ चुन रही हैं राह ए बर्बादी। ना जाने क्या सोचकर चुप हैं माता पिता, जानते हैं क्या गुल खिला रही बिना शादी। गुलछर्रे खूब उड़ाती हैं बनाकर...

  • गीतिका

    गीतिका

    उदासियों को दूर भगाने की कोशिश करती हूँ, बस रोते हुए को हँसाने की कोशिश करती हूँ। मुरझाए हुए चेहरे अच्छे नहीं लगते हैं मुझे, उन पर मुस्कान लाने की कोशिश करती हूँ। आज दुःखों से...


  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मोहब्बत को मेरी वो नादानी कह गया, आँखों से बहते दर्द को पानी कह गया। उसकी एक आह पर निकलती थी जान, आज भरी महफ़िल में बेगानी कह गया। जब पूछा क्या था वो, जब साथ...

  • कविता

    कविता

    चलो कुछ इस तरह हम समझौता कर लेते हैं हर चीज को जातियों में बांट लेते हैं खुद को अपनी जातियों तक सीमित कर देते हैं जो जिस जाति का है उसका उसी जाति का डॉक्टर...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हर आंदोलन का यही अंजाम होता है, आखिर में बेबस आम आदमी रोता है। दुकानें, रेहड़ी सिर्फ उसकी जलती हैं, सोचो ठेकेदार और नेता क्या खोता है। क्या मिलता है इमारतों को जलाकर, आम आदमी ही...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    सच लिखने की कोशिश करती हूँ, कुछ सीखने की कोशिश करती हूँ। ज़माना हर रोज लगाता है कीमत, नहीं बिकने की कोशिश करती हूँ। देश पर मिटने की कोशिश करती हूँ, जिद्द पर टिकने की कोशिश...