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  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    मोहब्बत को मेरी वो नादानी कह गया, आँखों से बहते दर्द को पानी कह गया। उसकी एक आह पर निकलती थी जान, आज भरी महफ़िल में बेगानी कह गया। जब पूछा क्या था वो, जब साथ...

  • कविता

    कविता

    चलो कुछ इस तरह हम समझौता कर लेते हैं हर चीज को जातियों में बांट लेते हैं खुद को अपनी जातियों तक सीमित कर देते हैं जो जिस जाति का है उसका उसी जाति का डॉक्टर...

  • ग़ज़ल

    ग़ज़ल

    हर आंदोलन का यही अंजाम होता है, आखिर में बेबस आम आदमी रोता है। दुकानें, रेहड़ी सिर्फ उसकी जलती हैं, सोचो ठेकेदार और नेता क्या खोता है। क्या मिलता है इमारतों को जलाकर, आम आदमी ही...

  • मुक्तक

    मुक्तक

    सच लिखने की कोशिश करती हूँ, कुछ सीखने की कोशिश करती हूँ। ज़माना हर रोज लगाता है कीमत, नहीं बिकने की कोशिश करती हूँ। देश पर मिटने की कोशिश करती हूँ, जिद्द पर टिकने की कोशिश...




  • गीतिका

    गीतिका

    कुछ यूँ हुआ असर तेरी प्यार भरी छुअन का, रोम रोम खिल उठा गुस्से में जलते बदन का। तेरे साँसों की तपन पिघला गयी मेरे गुस्से को, और बना गयी प्यासा मुझे वो तेरे मिलन का।...

  • कविता

    कविता

    तुम्हारी लम्बी उम्र के लिए माँग में सिंदूर सजाया मैंने, तुम ही हो सरताज मेरे बताने को बिंदिया सजाई मैंने, कभी नजर ना लगे तुम्हें आँखों में काजल लगाया मैंने, तुम्हारे सुख समृद्धि के लिए चूड़ियों...