गीत/नवगीत

गीत : मोम-सा मन

अब प्रिय मन आप बिन, हर दिवस जलने लगा है, रात का गहरा अंधेरा, अब मुझे डसने लगा है । अब प्रिय मन….. इस अंधेरी जिंदगी में दीप की लौ अब बनो तुम… तुम बिना ये मोम- सा मन, बिन जले जलने लगा है। अब प्रिय मन ….. यादों का ऐसा बवंडर-सा उठा जिंदगी में… […]

भाषा-साहित्य

हिन्दी पत्रकारिता एवं भाषा

भाषा और साहित्य की समृद्धि तथा भाषा भाषियों की संख्या की दृष्टि से देखा जाए तो हिन्दी महत्वपूर्ण भाषाओं में से एक है।हिन्दी राष्ट्रभाषा और सम्पर्क भाषा दोनों रूपों में भारत के साथ-साथ विदेशों में भी व्यवहृत हुई है और इसका सबसे बड़ा श्रेय जाता है हिन्दी पत्रकारिता को । आज उत्तरोत्तर हिन्दी समाचार पत्रों […]

कहानी

कहानी -जगमग दीप जले

दफ्तर से आते-आते रात के आठ बज गये थे।घर में  घुसते ही प्रतिमा के बिगड़े तेवर देख श्रवण भांप गया कि जरूर आज घर में कुछ हुआ है,वरना मुस्करा कर स्वागत करने वाली का चेहरा उतरा न होता ।सारे दिन मोहल्ले में होने वाली गतिविधियों की रिपोर्ट जब तक मुझे सुना न देती उसे चैन […]

लघुकथा

लघुकथा : करवा चौथ व्रत

सुगना आज फिर काम पर देरी से आई।उसका उतरा हुआ चेहरा व सूजी हुई आंखें सब कुछ बयान कर रही थी।सो उससे पूछे बिना ही मैंने चाय का कप उसकी ओर बढ़ा दिया।कप लेकर धीरे-धीरे चाय सुड़कने लगी। बीबी जी, ‘आप मेरे साथ पुलिस टेशन चली चलोगी?” ” क्यों क्या हुआ? ” मैनें हैरानी से […]

कहानी

कहानी -गुरु का कर्तव्य बोध

प्रात:कालीन होने वाली सभा में इषिता को शुद्ध उच्चारण एवं धाराप्रवाह रूप में बोलते हुए देखकर हिन्दी अध्यापिका नेहा बेदी हैरान रह गयीं।वह सोचने लगी कि अगले सप्ताह होने वाली हिन्दी भाषण प्रतियोगिता में यदि इषिता ने भाग ले लिया तो वह अवश्य ही प्रथम पुरस्कार की विजेता होगी फिर मेरी बेटी रश्मि का क्या […]

हास्य व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य : हिंदी दिवस

बाजार से सब्जी लेकर लौटे तो देखा मेज पर पड़े रंग-बिरंगे निमन्त्रण पत्र हमारा स्वागत करने को बेचैन हैं ।श्रीमती जी के हाथ में सब्जियों का थैला पकड़ा कर जल्दी से निमन्त्रण पत्र उठाकर खोलते हुए सोचने लगे क्या पितृपक्ष के दिनों में भी कोई शुभ कार्य होने लगे जो इतने पत्र एक साथ? एक […]

बाल कहानी

कहानी – मुझको भी आज़ादी चाहिए

“देखो -देखो….दादी!  इसके कोमल-कोमल पंख,छोटी-सी चोंच।देखो ना दादी,, क्या आप नाराज़ हैं मुझसे? ” समीर ने अपनी दादी से कहा ।”हां नाराज़ हूं….कितनी बार तुझे मना किया है कि पक्षियों को इस तरह मत पकड़ा कर।इन्हें उड़ना अच्छा लगता है।भगवान ने इनको पंख इसीलिए दिए हैं ।” “दादी,पर मैं तो इनका बहुत ध्यान रखता हूं  […]

सामाजिक

समतामूलक समाज के पक्षधर थे तुलसीदास

साहित्य और पत्रकारिता के पुरोधा भारतीय आत्मा माखनलाल चतुर्वेदी जी ने तुलसी जी के विषय में  लिखा है-“तुलसी जी  उन कवियों में  से रहे हैं जिन्होंने १६वीं शताब्दी में संयुक्‍त भारतवर्ष का स्वप्न देखा,जो कि भारतीय संस्कृति के प्राचीन साहित्य में  विद्यमान था। इसलिए उन्होंने अपना चरितनायक भी ऐसा चुना,जिसने देश निकाला लेकर ,राज्य का […]

गीत/नवगीत

गीत : जन्म से पूर्व मुझे न मारो मुझको

देख रही हूं मिटता जीवन, छाया घोर अन्धेरा। हर पल जकड़े पथ में  मुझको, शंकाओं का घेरा। मेरे जीवन की डोरी को, माता मत यूं तोड़ो॥ मैं  भी जन्मूं इस धरती पर, मुझे अपनों से जोड़ो। क्यों इतनी निष्ठुर हुई माता ? क्या है मेरी गलती । हाय विधाता, कैसी दुनिया ? नारी, नारी को […]

बाल कविता

बाल कविता : पेड़ लगाओ

पेड़ न होते इस धरती पर,, हरी-भरी इसे करता कौन ? पेड़ न होते तब हम सबको मीठे फल खिलाता कौन ? पेड़ न होते तो हम सबको, शुद्ध वायु देता कौन ? चलते-चलते जब थक जाते, शीतल छाया देता कौन ? पेड़ न होते इस धरती पर, पंछी को आश्रय देता कौन ? पेड़ […]