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  • क्या करे आदमी…

    क्या करे आदमी…

    कहां राजपथों पर कुलांचे भरने वाले हाई प्रोफोइल राजनेता और कहां बाल विवाह की विभीषिका का शिकार बना बेबस – असहाय मासूम। दूर – दूर तक कोई तुलना ही नहीं। लेकिन यथार्थ की पथरीली जमीन दोनों को...




  • मेरे बाबा तो भोलेनाथ…

    मेरे बाबा तो भोलेनाथ…

    बाबा का संबोधन मेरे लिए अब भी है उतना ही पवित्र और आकर्षक जितना  था पहले अपने बेटे और भोलेनाथ को मैं अब भी बाबा पुकारता हूं अंतरात्मा की गहराईयों से क्योंकि दुनियावी बाबाओं के भयंकर...





  • आओ! आंदोलन-आंदोलन खेलें!!

    आओ! आंदोलन-आंदोलन खेलें!!

    आपका सोचना लाजिमी है कि भला आंदोलन से खेल का क्या वास्ता।  देश ही नहीं बल्कि दुनिया में जनांदोलनों ने बड़े बड़े तानाशाहों को धूल में मिला दिया। लेकिन जब आंदोलन  भी खेल भावना से किया जाने लगे...