इतिहास

सत्ता के  रसगुल्ले और अमर सिंह …!

 जिस तरह मुलायम सिंह यादव हैं उसी तरह पहले अमर सिंह चौधरी हुआ करते थे . राजनीति में  पदार्पण  के  बाद काफी समय तक उनका यही पूरा नाम था . धीरे – धीरे वे अमर सिंह नाम से जाने – पहचाने लगे . वाकई बड़े दिलचस्प इंसान थे . राजनीति में  पैसा और पावर के  […]

कविता

घर पे ही रहता हूं

लॉक डाउन है , इसलिए आजकल घर पे ही रहता हूं . बाल – बच्चों को निहारता हूं , लेकिन आंखें  मिलाने से कतराता हूं . डरता हूं , थर्राता हूं . लॉक डाउन है , इसलिए आजकल घर पे ही रहता हूं . बिना किए अपराध बोध से भरे हैं सब इस अंधियारी रात […]

कविता

खुली आंखों का  सपना 

सुबह वाली लोकल पकड़ी पहुंच गया कलकता डेकर्स लेन में  दोसा खाया धर्मतल्ला में खरीदा कपड़ा – लत्ता सियालदह – पार्क स्ट्रीट में  निपटाया काम दोस्तों संग मिला – मिलाया जमकर छलकाया  कुल्हड़ों वाला जाम मिनी बस से हावड़ा पहुंचा भीड़ इतनी कि बाप रे बाप लोकल ट्रेन में  जगह मिली तो खाई मूढ़ी और […]

कविता

सड़कें हैं , सवार नहीं  ….!!

बड़ी मारक है , वक्त की  मार  हिंद में मचा यूं हाहाकार सड़कें हैं , सवार नहीं हरियाली है , गुलज़ार नहीं बाजार है , खरीदार नहीं गुस्सा है , इजहार नहीं सोने वाले सो रहे खटने  वाले रो रहे खुशनसीबों पर सिस्टम मेहरबान बाकी भूखों को तो बस ज्ञान पर ज्ञान जाने कब खत्म […]

हास्य व्यंग्य

क्या गुरू ..! फिर लॉकडाउन  …??

जो  बीत गई उसकी क्या बात करें . लेकिन जो बीत रही है उसे अनदेखा भी कैसे और कब तक करें .  ऐसा डरा – सहमा  सावन जीवन में  पहली बार देखा . लोग पूछते हैं …क्या कोरोना काल में  इस बार रक्षा बंधन और गणेशोत्सव भी फीके ही रह जाएंगे . यहां तक कि […]

हास्य व्यंग्य

संभलिए ! क्योंकि आप कोरोना काल में हैं. !!

क्या फिर लॉकडाउन होने वाला है ? क्या अनलॉक के तहत दी जा रही छूट में कटौती होने जा रही है. कोरोना मुक्ति की देहरी से लौटकर पॉजिटिव मामलों की बढ़ती संख्या के बीच मौत का आंकड़ों में उछाल के साथ ही इन दिनों ऐसे सवाल हर बाजार और गली – मोहल्लो में सुने जाने […]

हास्य व्यंग्य

ट्रेनें चलें  तो पूरे हों कसमें   – वादे …!!

कितने लोग होंगे जो छोटे शहर से राजधानी के  बीच ट्रेन से डेली – पैसेंजरी करते हैं ? रेलगाडियों में हॉकरी करने वालों की  सटीक संख्या कितनी होगी ? आस – पास प्राइवेट नौकरी करने वाले उन लोगों का आंकड़ा क्या है , जो अपनी आजीविका के  लिए  पूरी तरह से रेलवे पर निर्भर हैं […]

सामाजिक

गरीबों का लक अनलॉक कैसे होता है साहब?

कोरोना काल में  दुनिया वाकई काफी बदल गई . लॉक डाउन अब अन लॉक की ओर अग्रसर है , लेकिन इस दुनिया में  एक दुनिया ऐसी भी है , जो लॉक डाउन और अनलॉक का कायदे से मतलब नहीं जानती . उसे बस इतना पता है कि लगातार बंदी से उसके  जीवन की  दुश्वारियां बहुत […]

संस्मरण

ऐसे भी कोई जाता है भला

उस रात शहर में अच्छी बारिश हुई थी. इसलिए सुबह हर तरफ इसका असर नजर आ रहा था. गोलबाजार ओवर ब्रिज से बंगला साइड की तरफ बढ़ते ही डीआरएम आफिस के बगल वाले मैदान में भारी भीड़ जमा थी. बारिश के पानी से मैदान का मोरम फैलकर लाल हो चुका था. मैदान के किनारे लाल […]

संस्मरण

वो रामगढ़ था ये लालगढ़

यादों के जनरल स्टोर में कुछ स्मृतियां स्पैम फोल्डर में पड़े रह कर समय के साथ अपने-आप डिलीट हो जाती है, लेकिन कुछ यादें बेताल की तरह हमेशा सिर पर सवार रहती है, मानो चीख-चीख कर कह रही हो मेरा जिक्र किए बगैर तुम्हारी जिंदगी की किताब पूरी नहीं हो सकती। किस्सा 2008 के मध्य […]