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  • दिवाली की दौलत

    दिवाली की दौलत

    चंद फुलझड़ियां , कुछ अनार जान पड़ते दौलत अपार  … क्या जलाए , क्या बचाएं धुन यही दिवाली यादगार बनाएं दीपावली की खुशियां सब पर भारी लेकिन छठ, एकदशी के लिए पटाखे बचाना भी तो है...

  • क्या करे आदमी…

    क्या करे आदमी…

    कहां राजपथों पर कुलांचे भरने वाले हाई प्रोफोइल राजनेता और कहां बाल विवाह की विभीषिका का शिकार बना बेबस – असहाय मासूम। दूर – दूर तक कोई तुलना ही नहीं। लेकिन यथार्थ की पथरीली जमीन दोनों को...




  • मेरे बाबा तो भोलेनाथ…

    मेरे बाबा तो भोलेनाथ…

    बाबा का संबोधन मेरे लिए अब भी है उतना ही पवित्र और आकर्षक जितना  था पहले अपने बेटे और भोलेनाथ को मैं अब भी बाबा पुकारता हूं अंतरात्मा की गहराईयों से क्योंकि दुनियावी बाबाओं के भयंकर...