संस्मरण

शेरू का पुनर्जन्म

कुत्ते तब भी पाले जाते थे, लेकिन विदेशी नस्ल के नहीं। ज्यादातर कुत्ते आवारा ही होते थे, जिन्हें अब  स्ट्रीट डॉग कहा जाता है। गली – मोहल्लों में  इंसानों के बीच उनका  गुजर – बसर हो जाता था। ऐसे कुत्तों के प्रति किसी प्रकार का विशेष  लगाव या नफरत की भावना भी तब बिल्कुल नहीं  […]

यात्रा वृत्तान्त

रेल यात्रा या जेल यात्रा

ट्वीटर से समस्या समाधान के शुरूआती दौर में मुझे यह जानकार अचंभा होता था कि महज किसी यात्री के ट्वीट कर देने भर से रेल मंत्री ने किसी के लिए दवा तो किसी के लिए दूध का प्रबंध कर दिया। किसी दुल्हे के लिए ट्रेन की गति बढ़ा दी ताकि बारात समय से कन्यापक्ष के […]

सामाजिक

चमत्कार है तो नमस्कार है…

डयूटी के दौरान लोगों के प्रिय – अप्रिय सवालों से सामना तो अमूमन रोज ही होता है। लेकिन उस रोज आंदोलन पर बैठे हताश – निराश लोगों ने कुछ ऐसे अप्रिय सवाल उठाए , जिसे सुन कर मैं बिल्कुल निरूत्तर सा हो  गया। जबकि आंदोलन व सवाल करने वाले न तो पेशेवर राजनेता थे और […]

संस्मरण

जब यादगार बन जाए अनचाही यात्राएं

जीवन के खेल वाकई निराले होते हैं। कई बार ऐसा होता है कि ना – ना करते आप वहां पहुंच जाते हैं जहां जाने को आपका जी नहीं चाहता जबकि अनायास की गई ऐसी यात्राएं न सिर्फ सार्थक सिद्ध होती हैं बल्कि यादगार भी। जीवन की अनगिनत घटनाओं में ऐसी दो यात्राएं अक्सर मेरे जेहन […]

संस्मरण

भूख – प्यास की क्लास

क्या होता है जब हीन भावना से ग्रस्त और प्रतिकूल परिस्थितियों से पस्त कोई दीन – हीन ऐसा किशोर कॉलेज परिसर में दाखिल हो जाता है जिसने मेधावी होते हुए भी इस बात की उम्मीद छोड़ दी थी कि अपनी शिक्षा – दीक्षा  को वह कभी कॉलेज के स्तर  तक पहुंचा पाएगा। क्या कॉलेज की […]

कहानी

हावड़ा – मेदिनीपुर की लास्ट लोकल

महानगरों के मामले में गांव – कस्बों में रहने वाले लोगों के मन में कई तरह की सही – गलत धारणाएं हो सकती है। जिनमें एक धारणा यह भी है कि देर रात या मुंह अंधेरे महानगर से उपनगरों के बीच चलने वाली लोकल ट्रेनें अमूमन खाली ही दौड़ती होंगी। पहले मैं भी ऐसा ही […]

संस्मरण

गए थे नवोदित खिलाड़ी से मिलने, याद आने लगे धौनी…!

कहां संभावनाओं के आकाश में टिमटिमाता नन्हा तारा और कहां क्रिकेट की दुनिया का एक स्थापित नाम। निश्चित रूप से कोई तुलना नहीं। लेकिन पता नहीं क्यों मुझे उस रोज नवोदित क्रिकेट खिलाड़ी करण लाल से मिलते समय बार  बार जेहन  में महेन्द्र सिंह धौनी का ख्याल आ रहा था। इसकी ठोस वजहें भी हैं। […]

हास्य व्यंग्य

राजनीति में चुनाव और चुनाव की राजनीति …!!

कद्दावर नेता के निधन की सूचना ऐसे समय आई जब समूचा देश चुनावी तपिश में तप रहा था। काल कवलित नेता की प्रोफाइल चीजों को अलग नजरिए से देखने की सीख दी गई। शिक्षा – दीक्षा ऐसी थी कि राजनीति से दूर रहते हुए ऐशो – आराम की जिंदगी जी सकते थे। लेकिन लीक से […]

कविता

इलेक्शन आ गया… !!

समझा मत मैं समझ गिया इलेक्शन आ गिया दामी गाड़ी घूम रहा कैडर लोग झूम रहा अफिसर लोग सुंघ रहा नेता लोग चूम रहा गरीब लोग खट रहा कपड़ा – साड़ी बंट रहा फोकट का चा – सिंघाड़ा लड़का लोग कूट रहा समझा मत मैं समझ गिया इलेक्शन आ गिया — तारकेश कुमार ओझा

हास्य व्यंग्य

भारतीय : भावुक भी भुलक्कड़ भी…

हम भारतीय भावुक ज्यादा है या भुलक्कड़..। अपने देश में यह सवाल हर बड़ी घटना के बाद पहले से और ज्यादा बड़ा आकार लेने लगता है। मीडिया हाइप या व्यापक चर्चा के नजरिए से देखें तो अपने देश व समाज में मुद्दे बिल्कुल बेटिकट यात्रियों की तरह पकड़े जाते हैं। आपने गौर किया होगा भारतीय […]