धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

पुराणों के कृष्ण बनाम महाभारत के कृष्ण

कृष्ण जन्माष्टमी पर सभी हिन्दू धर्म को मानने वाले भगवान श्री कृष्ण जी महाराज को याद करते हैं. कुछ उन्हें गीता का ज्ञान देने के लिए याद करते हैं कुछ उन्हें दुष्ट कौरवों का नाश करने के लिए याद करते हैं.पर कुछ लोग उन्हें अलग तरीके से याद करते हैं. फिल्म रेडी में सलमान खान […]

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तमिल भाषा का संस्कृत से सम्बन्ध

तमिलनाडु के राजनेता एक बार फिर से सुर्ख़ियों में हैं। कारण केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा “संस्कृत सप्ताह” बनाने का निश्चय किया गया तो वहां के विपक्ष के नेता से लेकर मुख्य मंत्री जयललिता तक ने इस आदेश को तमिल भाषियों पर जबरन थोपने के जैसा फैसला बताया। उनका कहना था की तमिल भाषा एक स्वतंत्र भाषा […]

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मैं आस्तिक क्यों हूँ? (भाग – ५)

सर्वव्यापक एवं निराकार ईश्वर में विश्वास से पापों से मुक्ति मिलती हैं। एक उदहारण लीजिये एक बार एक गुरु के तीन शिष्य थे। गुरु ने अपने तीनों शिष्यों को एक एक कबूतर देते हुए कहा की इन कबूतरों को वहा पर मारना जहाँ पर आपको कोई भी न देख रहा हो। प्रथम शिष्य ने एक […]

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मैं आस्तिक क्यों हूँ ? (भाग – ४)

नास्तिकता को बढ़ावा देने में एक बड़ा दोष अभिमान का भी हैं। भौतिक जगत में मनुष्य ने जितनी भी वैज्ञानिक उन्नति की हैं उस पर वह अभिमान करने लगता हैं और इस अभिमान के कारण अपने आपको जगत के सबसे बड़ी सत्ता समझने लगता हैं। एक उदहारण लीजिये सभी यह मानते हैं की न्यूटन ने Gravitation अर्थात […]

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साई बाबा का विरोध कितना सही कितना गलत

  साईं बाबा के नाम को सुर्ख़ियों में लाने का श्रेय शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद जी को जाता हैं जिनका कहना हैं की साई बाबा की पूजा हिन्दू समाज को नहीं करनी चाहिए क्यूंकि न साई ईश्वर के अवतार हैं न ही साई का हिन्दू धर्म से कुछ लेना देना हैं। साई बाबा जन्म से मुस्लमान […]

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मैं आस्तिक क्यों हूँ? (भाग – ३)

       नास्तिक बनने के क्या कारण हैं? समाधान- नास्तिक बनने के प्रमुख कारण हैं १.  ईश्वर के गुण,कर्म और स्वभाव से अनभिज्ञता २.  धर्म के नाम पर अन्धविश्वास जिनका मूल मत मतान्तर की संकीर्ण सोच हैं ३.  विज्ञान द्वारा करी गई कुछ भौतिक प्रगति को देखकर अभिमान का होना ४.  धर्म के नाम पर दंगे,युद्ध, उपद्रव आदि ईश्वर […]

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मैं आस्तिक क्यों हूँ? (भाग – २)

       धर्म और मत/मजहब में अंतर क्या हैं? यह समझने की आवश्यकता हैं। मज़हब अथवा मत-मतान्तर के अनेक अर्थ हैं। मत का अर्थ हैं वह रास्ता जो स्वर्ग और ईश्वर प्राप्ति का हैं जोकि उस मत अथवा मज़हब के प्रवर्तक अर्थात चलाने वाले ने बताया हैं। एक और परिभाषा हैं की कुछ विशेष मान्यताओं पर ईमान […]

धर्म-संस्कृति-अध्यात्म

मैं आस्तिक क्यों हूँ? (भाग – १)

एक नया नया फैशन चला हैं अपने आपको नास्तिक यानि की atheist कहलाने का जिसका अर्थ हैं की मैं ईश्वर की सत्ता, ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं रखता। अलग अलग तर्क प्रस्तुत  किये जाते हैं जैसे अगर ईश्वर हैं तो दिखाई क्यों नहीं देते? अगर ईश्वर हैं तो किसी भी वैज्ञानिक प्रयोग के द्वारा सिद्ध क्यों नहीं होते? अगर ईश्वर […]

इतिहास

वीर शिवाजी जी मुस्लिम नीति एवं औरंगज़ेब की धर्मान्धता- एक तुलनात्मक अध्ययन

वीर शिवाजी जी मुस्लिम नीति एवं औरंगज़ेब की धर्मान्धता- एक तुलनात्मक अध्ययन  महाराष्ट्र के पुणे से सोशल मीडिया में शिवाजी को अपमानित करने की मंशा से उनका चित्र डालना और उसकी प्रतिक्रिया में एक इंजीनियर की हत्या इस समय की सबसे प्रचलित खबर हैं। दोषी कौन हैं और उन्हें क्या दंड मिलना चाहिए यह तो […]