Category : शिशुगीत

  • 9.इसकी शान बढ़ाएंगे

    9.इसकी शान बढ़ाएंगे

    (बाल काव्य सुमन संग्रह से) नन्हे-नन्हे बालक हैं हम, काम हमारे बड़े-बड़े, छोटे-छोटे कदम हमारे, वार करें हम बड़े-बड़े. हम भारत मां के सपूत हैं, इसकी शान बढ़ाएंगे, अपना तन-मन-धन-जीवन तक, इस पर हंसकर वारेंगे.

  • 8. भारत प्यारा देश हमारा

    8. भारत प्यारा देश हमारा

    (बाल काव्य सुमन संग्रह से)   भारत प्यारा देश हमारा, है सारे देशों से न्यारा, विंध्य-हिमाचल रक्षा करते, सींचे गंगा-यमुना धारा. इसकी हर बेटी प्यारी है, हर बेटा है इसका दुलारा, एक ही माला के हम...

  • 7. गिनती-गीत

    7. गिनती-गीत

    (बाल काव्य सुमन संग्रह से) एक बुलबुल आई है, दो तिनके ले आई है, तीन बच्चों ने खुशी जताई, चार दाने भी लाई है. पांच घरों से घूम-घूमकर, छह धागे ले आई है, सात सलोने चित्र...

  • शिशुगीत – 28

    शिशुगीत – 28

      1. मच्छरदानी मच्छरदानी-मच्छरदानी तेरी भी इक अजब कहानी न तू दानी, न तू मच्छर नाम तेरा किसकी शैतानी 2. दालचीनी हाल दालचीनी का कैसा बिल्कुल मच्छरदानी जैसा दाल न चीनी फिर भी देखो नाम अजूबा...

  • कुल्फी

    कुल्फी

    मां मुझको तो भूख लगी है, पर रोटी का मूड नहीं है, मैं तो कुल्फी ही खाऊंगा, मैं तो बस कुल्फी खाऊंगा. चाहे कुल्फी हो आरेंज, याहो पिस्ते वाली कुल्फी, चाहे कप हो या हो पार्लर,...

  • बंदर

    बंदर

    जब मैं उछल कूद करता हूं, ममी कहती ”तू है बंदर”, पर मेरे तो पूंछ नहीं है, मैं कैसे हो सकता बंदर? मुंह भी मेरा लाल नहीं है, और न ही है बिलकुल काला, ना लंगूर...

  • शिशुगीत – २७

    शिशुगीत – २७

    १. खाकर निकलें गर्मी में जब भी निकलें कुछ भी खाकर ही निकलें नहीं लगेगी लू इससे नींबू पानी पी निकलें २. सादा भोजन गर्मी में भारी मत खाएँ सादे भोजन को अपनाएँ दही, छाछ, लस्सी...

  • कुल्फी वाला

    कुल्फी वाला

    कालू आया, कालू आया, कालू चाचा कुल्फी लाया, नीली-पीली कुल्फी लाया, रामू का भी मन ललचाया. पीली कुल्फी खाऊंगा मैं, अम्मा दे दो पैसे चार, कुल्फी लेकर घर को आया, कुल्फी खाकर हुआ बीमार. उल्टी आई...

  • शिशुगीत – 26

    शिशुगीत – 26

    1. होली होली जमकर सभी मनाएँ गुझिया, मालपुए भी खाएँ ध्यान रहे जो नहीं चाहता भूल न उसको रंग लगाएँ 2. पिचकारी भैया बड़ी एक ले आया दीदी ने छोटा मँगवाया पिचकारी मैं नहीं चलाता गुब्बारों...

  • शिशुगीत – २५

    शिशुगीत – २५

    १. बसंत ऋतु बसंत की फिर आयी है बागों में खुशियाँ लायी है जाड़ा भागा, तितली गाती मेरे मन को वह भायी है २. नींद नींद नहीं लेता जो पूरी उसको सेहत मिले अधूरी बुद्धि ठीक...