Category : धर्म-संस्कृति-अध्यात्म




  • मैं आस्तिक क्यों हूँ? (भाग – ५)

    सर्वव्यापक एवं निराकार ईश्वर में विश्वास से पापों से मुक्ति मिलती हैं। एक उदहारण लीजिये एक बार एक गुरु के तीन शिष्य थे। गुरु ने अपने तीनों शिष्यों को एक एक कबूतर देते हुए कहा की...

  • फिर याज्ञसेनी प्रगटेगी…

    फिर याज्ञसेनी प्रगटेगी…

    फिर कोई याज्ञसेनी प्रगटेगी, धर्म को अधर्म के विरुद्ध खडा करेगी, जब भरी सभा मे उसकी लज्जा तार तार होगी, कुरुक्षेत्र की धधकती ज्वाला मेँ वो तलवार होगी। जब उसके केश कोई दुशासन गंदे हाथोँ से...



  • स्वामी विवेकानंद

    स्वामी विवेकानंद केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं है, ये एक महान शक्ति का नाम है! ये विचार नहीं है, आधार है! ये जीवन मूल्यों का ऐसा घनेरा वृक्ष है जिसकी शाखा के फलों के स्वाद...