धर्म-संस्कृति-अध्यात्म ब्लॉग/परिचर्चा

धर्म नहीं, श्रेष्ठता की होड़ है असल समस्या

क्या कभी आपने इस विषय पर कहीं भी, कभी भी कोई डिबेट या विश्व स्तरीय चर्चा आदि होते देखा या सुना है कि मनुष्य प्राणी विश्व के अन्य जीवों से श्रेष्ठ है या नहीं ? मेरे ख्याल से मनुष्य प्राणी ही सर्वश्रेष्ठ है; इस नतीजे पर पहुंचाने वाली ऐसी कोई डिबेट या चर्चा के जिक्र […]

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महर्षि दयानन्द की अध्ययन-अध्यापन संबंधी कुछ उत्तम शिक्षायें

ओ३म् महर्षि दयानन्द वेदों के अनुपम विद्वान और समाज सुधारक थे। वेद ईश्वरीय ज्ञान है और धर्म-कर्म की दृष्टि से सभी संसार के मनुष्यों द्वारा वैदिक ज्ञान व कर्मों का पालन ही उचित व आवश्यक है अन्यथा वह जीवन के उद्देश्य धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति नहीं कर सकते। इस विषय को महर्षि […]

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उपनिषदों में प्राप्त जीवात्मा की मुक्ति विषयक कुछ सूक्तियां

ओ३म् संसार से सबसे प्राचीन ग्रन्थ वेद हैं। वेद सभी सत्य विद्याओं की पुस्तकें हैं। वेदों में तृण से लेकर ईश्वर सहित सभी विषयों का सत्य ज्ञान व विज्ञान निहित है। यह वेदेां का ज्ञान इस संसार के सृष्टिकर्ता ईश्वर से आदि चार ऋषियों को मिला था। वेदों के आधार पर ही प्राचीन काल में […]

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जीवात्मा के मोक्ष विषयक महर्षि दयानन्द के शास्त्र सम्मत विचार

ओ३म् मनुष्य जीवन का उद्देश्य सत्कर्म करके धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष की प्राप्ति है। इस पुरूषार्थ चतुष्टय में मोक्ष का विवरण वेद, दर्शन व उपनिषदों आदि प्राचीन ग्रन्थों में मिलता है। महर्षि दयानन्द जी ने अपने विश्व प्रसिद्ध ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश में इसका विस्तार से वर्णन किया है जो कि अन्यत्र दुर्लभ एवं अप्राप्त […]

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ब्रह्माण्ड में यदि एक सर्वव्यापक व सर्वशक्तिमान ईश्वर न होता?

ओ३म् क्या संसार में ईश्वर जैसी कोई सर्वव्यापक व सर्वशक्तिमान चेतन सत्ता है? यदि है तो वह प्रत्यक्ष दिखाई क्यों नहीं देती? यदि वह वस्तुतः है तो फिर हमारे अधिकांश वैज्ञानिक व साम्यवादी विचारधारा के लोग ईश्वर के अस्तित्व को स्वीकार क्यों नहीं करते? हमारे देश में बौद्ध एवं जैनमत का आविर्भाव हुआ। इनके बारे […]

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गौतम-अहिल्या-इन्द्र आख्यान का यथार्थ स्वरूप

ओ३म् रामायण में गोतम-अहिल्या का एक प्रसंग आता है जिसमें कहा गया है कि राजा इन्द्र ने गोतम की पत्नी अहिल्या से जार कर्म किया था। गोतम ने उसे देख लिया और इन्द्र तथा अहिल्या को श्राप दिये। रामायण के पाठक इसे पढ़कर इस घटना को सत्य मान लेते हैं। क्या यह सम्भव है कि […]

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ईश्वर से आदि चार ऋषियों को वेद ज्ञान विषयक हमारी भ्रान्ति

ओ३म् कुछ दिन पूर्व हम वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून में सत्संग में बैठे हुए आर्य विद्वान श्री उमेश चन्द्र कुलश्रेष्ठ जी का ईश्वर द्वारा चार आदि ऋ़षियों को वेद ज्ञान प्रदान करने का वर्णन सुन रहे थे। इसी बीच हमारे मन में अचानक एक विचार आया। हम सुनते व पढ़ते आयें हैं कि यह […]

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सृष्टि में मनुष्य जन्म क्यों होता आ रहा है?

ओ३म् हम संसार में जन्मे हैं। हमें मनुष्य कहा जाता है। मनुष्य शब्द का अर्थ मनन व चिन्तन करने वाला प्राणी है। संसार में अनेक प्राणी हैं परन्तु मनन करने वाला प्राणी केवल मनुष्य ही है। मनुष्य का जन्म-माता व पिता से होता है। यह दोनों मनुष्य के जन्म में मुख्य कारण वा हेतु दिखाई […]

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महात्मा प्रभु आश्रित का आदर्श जीवन और उनके कुछ प्रेरक विचार

महात्मा प्रभु आश्रित जी आर्यसमाज के उच्च कोटि के साधक व वैदिक  विचारधारा मुख्यतः यज्ञादि के प्रचारक थे। उनका जन्म 13 फरवरी, 1887 को जिला मुजफ्फरगढ़ (पाकिस्तान) के जतोई नामक ग्राम में श्री दौलतराम जी के यहां हुआ था। महात्मा जी के ब्रह्मचर्य आश्रम का नाम श्री टेकचन्द था। वानप्रस्थ आश्रम की दीक्षा लेने पर […]

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वेद परिवार के सब सदस्यों के हृदयों व मनों की एकता का सन्देश देते हैं

ओ३म् वेदाध्ययन से जीवन का कल्याण   वेद सब सत्य विद्याओं का पुस्तक है। वेद ईश्वर प्रदत्त होने के कारण ही सब सत्य विद्याओं से युक्त सर्वांगपूर्ण ज्ञान है। अतः वेदों को पढ़ना व दूसरों को पढ़ाना व प्रचार करना सब विचारशील मनुष्यों का परम कर्तव्य और धर्म है। परिवार को सुसंगठित बनाने से सब […]