इतिहासराजनीति

इज़राइल एक आदर्श देश है?

मुस्लिम देशो और भारत के मुसलमानों द्वारा इसराइल को zionist राज्य कहकर बदनाम किया जाता है. आइए, इसराइल के बारे बुनियादी जानकारी देखते हैं. इसराइल में संविधान के “बुनियादी नियमों” (Basic Laws) के अनुसार इस्राइली ‘यहूदी’ राज्य है और सभी धर्मों के मानने वालों को अपने विश्वास के अनुसार अपने मज़हब स्वतंत्रता की अनुमति है. (जो इस्लामिक मुल्को ख़ास कर इस्लाम के किले पाकिस्तान और सऊदी में नहीं है). गैर यहूदी अल्पसंख्यकों के लिए ब्रिटिश कानूनों और तुर्क की परंपरा को सामने रखा गया है. 75% यहूदी है, लेकिन उनमें 37% तक लोग अग्नोस्टिक या नास्तिक हैं. यानी उन्हें यहूदी विश्वासों कोई रुचि नहीं. 20% अरब मुसलमान हैं, 5% अन्य धर्मों के लोग हैं. इसराइल हालांकि यहूदियों के देश के रूप में बनाया गया, जिन्हें दुनिया भर में Persecution किया गया. लेकिन इजरायली कानून रंग और नस्ल, पंथ, सब बराबरी के नागरिक अधिकार देता है. लेकिन Law of Return के तहत यहूदी आप्रवासियों को प्राथमिकता व्यवहार की गारंटी है. यहूदी धर्म के अभ्यास का यह हाल है, कि इजरायली सर्वेक्षण के अनुसार 27% यहूदी’ धर्म को धोखा ‘मानते हैं, जबकि 53% ने कहा, वह’ ‘Sabbath Day’ की कोई परवाह नहीं करते.

कंज़र्वेटिव यहूदियों की संख्या 32% से लेकर 55% तक बताई जाती है, और उदार धर्मनिरपेक्ष यहूदियों की संख्या 20% से लेकर 80% बताई जाती है. इसका मतलब यह हुआ कि इसराइल में रुड़ीवादी यहूदी और उदार यहूदी 50-50 हैं .. क्या ऐसा देश कट्टरपंथी हो सकता है? और दुनिया का सबसे उच्चतम शिक्षित राष्ट्र है . गैर हलाल मांस के आयात पर प्रतिबंध है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के अनुसार राज्य सरकारों को पोर्क पर प्रतिबंध लगाने से मना कर दिया गया, क्योंकि आबादी के एक हिस्से ने उसकी मांग की थी. मूल्यांकन लगालें, जिसे Zionist कहकर बदनाम किया जाता है .. वह कितना Zionist है. धर्मनिरपेक्ष और नास्तिक कट्टर यहूदीयो को हर समय कहीं न कहीं चुनौती देते रहते हैं. धर्मनिरपेक्ष इजरायल यहूदियों का कहना है कि वह यहूदी धार्मिक नियमों को नहीं मानते, इसराइल एक आधुनिक लोकतांत्रिक देश होने के नाते जनता की इच्छा के खिलाफ उन पर कोई ‘यहूदी’ कानून नहीं ठूंस जा सकता. यहां तक कि शादी, तलाक और दफनाया अनुष्ठानों और नियमों को खुलेआम चुनौती दी है.

2010 इजरायल सरकारी आंकड़ों के विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 8% ने अपने आप को कट्टर यहूदी, 12% तक आरथोडाकस, 25% आम पारंपरिक यहूदी, और 42% खुद को धर्मनिरपेक्ष बताया. यहां तक कि अरब मुस्लिम आबादी भी 18% गैर धार्मिक, 27% आम मुसलमान कहा. आप अनुमान लगाये मुस्लिम मुल्को में झूठा प्रचार और बावेला मचा कर आम लोगों में इसराइल के प्रति नफरत पैदा की जाती है…. मुसलमान यह तो बताये की कितने मुस्लिम मुल्को में उन्होंने गैर मुस्लिम को बराबरी के अधिकार अपने संविधान में दिए हुए है ???…. फिलिस्तीनी अगर इसराइल को स्वीकार, शांतिपूर्ण पड़ोस के साथ रहें .. यह भी विकास और समृद्धि की ओर जा सकते हैं. इसराइल के कट्टरपंथी नीति स्वतः समाप्त हो जाएगी.

साभार- नियाज़ अहमद

संजय कुमार (केशव)

नास्तिक .... क्या यह परिचय काफी नहीं है?

3 thoughts on “इज़राइल एक आदर्श देश है?

  • केशव जी , आपने बहुत ही अच्छा लिखा है . इस्राइल कितना डैमोक्रैटिक है यह कोई भी इस्लामिक देश सुनना नहीं चाहता हालांकि इस्राइल में रह रहे अरब मज़े से रहते हैं . इस्राइल लोग बहुत मिहनती हैं . और बहादर भी जिस का परमान इतने कट्टर मुल्कों के बीच सरवाइव करना है . जो हमास करता है उस पर भी सारी दुनीआं को धियान में रखना चाहिए . आये दिन इस्राइल पर रॉकेट अटैक , पुलिस पर अटैक तो इस्राइल रीतालिएट न करे तो किया करे . यह तो ऐसे है जैसे कश्मीर में आज तक घुस पैंठ हो रही है . एक बात में चीन को दाद देनी होगी कि १९६२ के बाद बौर्डर पर कोई जानी नुक्सान नहीं हुआ .

  • विजय कुमार सिंघल

    लेख में एक अन्य बात यह छूट गयी है कि इस्रायल में प्रत्येक नागरिक को सैनिक शिक्षा लेना और कुछ समय तक सेना में सेवा करना अनिवार्य है. इससे आवश्यकता पड़ने पर प्रत्येक देशवासी हमलावरों का मुकाबला करने को तैयार किया जा सकता है.

  • विजय कुमार सिंघल

    इस्रायल के बारे में अच्छी जानकारी दी है. लेकिन अधूरी लगती है. एक मुख्य बात छूट गयी कि इसरायल ने सिद्धांत के तौर पर संसार के प्रत्येक यहूदी को इस्रायल की नागरिकता देने पर सहमति दी है. इसका अर्थ है कि सन्सर के किसी भी देश में किसी भी स्थिति में रह रहा यहूदी इस्रायल आ सकता है और वहां की नागरिकता लेकर स्थायी रूप से रह सकता है.
    इसकी तुलना अपने भारत महान से कीजिये. संसार में भारत ही हिन्दुओं का एकमात्र देश है. (पहले नेपाल भी था, पर अब वह चीन के प्रभाव में सेकुलर हो गया है.) इसलिए संसार भर के हिन्दू इसे अपना तीर्थस्थान मानते हैं. लेकिन हमारा संविधान उनको भारत की नागरिकता लेने की अनुमति नहीं देता. पाकिस्तान और बांग्लादेश से आये हुए हिन्दू शरणार्थी इसका प्रमाण हैं. यहाँ केवल मुस्लिम घुसपैठियों को घुस आने और सभी सुविधाएँ भोगने का अघोषित अधिकार मिला हुआ है.

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