कविता इन्तजार डॉ. भावना सिन्हा 16/12/201416/12/2014 सूनी राहों को अपलक निहारूं निराश मन…………। यादों के दीप अर्से से जलाए हूं बुझा जाओ ना ………। — भावना सिन्हा
वाह ! गहरा अर्थ लिये छोटी सी कविता !
bahut khub