कविता

ओस के दाने ……

 

खेतों में
उगे हैं मोती की तरह
ओस के दाने

गौरया के पंख फंस न जाएँ
इसलिए बबूल के नुकीले कांटे
लगे हैं उन चिड़ियों कों बचाने

दो मैना
टहल रही हैं चुपचाप
प्यार करने का यह नायाब तरीका
जल्दी आना हमें सीखाने

थकी हुई धूप कह रही हैं
संध्या से
अपने लिये तम का बिस्तर बिछाने
प्रकृति की सूनी कलाई में

पलाश आ निकला हैं

केशरिया ..चूड़ियां पहनाने

kishor kumar khorendra

किशोर कुमार खोरेंद्र

परिचय - किशोर कुमार खोरेन्द्र जन्म तारीख -०७-१०-१९५४ शिक्षा - बी ए व्यवसाय - भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत एक अधिकारी रूचि- भ्रमण करना ,दोस्त बनाना , काव्य लेखन उपलब्धियाँ - बालार्क नामक कविता संग्रह का सह संपादन और विभिन्न काव्य संकलन की पुस्तकों में कविताओं को शामिल किया गया है add - t-58 sect- 01 extn awanti vihar RAIPUR ,C.G.

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