एक वामपंथी की कलम
उसे सरोकार नहीं होता
कश्मीर में बेघर हुए
हिन्दुओ के दर्द से
वो तो बस छटपटाती है
अफज़ल के नाम पर
वो कलम है एक वामपंथी की।
हज़ार सालो में
मज़हब के नाम पर
लाखो मंदिरो का
गिराये जाना
जायज है उसकी नज़र में
और नायजायज है
राममंदिर का बनाये जाना
वो एक वामपंथी की कलम है।
सुख जाती है
उसके पेट की स्याही
पाकिस्तान और बांग्लादेश में
हो रहे अल्पसंख्यको के अत्याचार
और उनकी लड़कियों के
बलात्कार के नाम पर
और लिखती है लाल सलाम
भारत के खुशहाल अल्पसंखको का
छद्म दर्द गढ़ कर।
वो कलम है एक वामपंथी की।
— सुधीर मौर्य

बहुत बढ़िया. आपने वामपंथियों के पक्षपात और निर्लज्ज साम्प्रदायिकता को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है.