उपन्यास अंश

उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 60)

55. मंगल उत्सव

राजमहल की अट्टालिका पर साम्राज्ञी देवलदेवी खड़ी थी। सांझ ढल रही थी। स्वच्छ आकाश में तैरते हुए पक्षी अपने रैन बसेरे की ओर जा रहे थे। राजमहल के मंदिरों से शंख, घंटे और आरती की ध्वनियाँ आ रही थीं। साम्राज्ञी ने आरती की वाणी सुनकर आँखें बंद कर लीं और वह आरती के मधुरश्रवण में तल्लीन हो गईं।

सम्राट धर्मदेव भी अट्टालिका पर आए। देवलदेवी को तल्लीन देख बिना आहट के उनके पीछे जाकर खड़े हो गए। आरती के समाप्त होने पर देवलदेवी ने आँखें खोली, पीछे बिना मुडे़ बोली, ‘कब आए देव?’

”जब देवी ने मंगल उत्सव की आरती सुनना प्रारंभ किया था।“

देवलदेवी घूमकर सम्राट को देखकर बोली, ”इस मंगल उत्सव की बेला लाने के लिए हम आपके सदैव ऋणी रहेंगे।“

सम्राट धर्मदेव देवलदेवी के मुखमंडल को देखते हुए बोले, ”और इस मंगल उत्सव के लिए भारतवर्ष की आने वाली संतानें आपकी ऋणी रहेंगी साम्राज्ञी देवलदेवी।“

और इस समय राजमहल के एक मंदिर से शंख ध्वनि गूँजी जिसकी ध्वनि में एक ही नाम तरंगित हो रहा था ‘देवलदेवी।’

(समाप्त)

*सुधीर मौर्य

नाम - सुधीर मौर्य जन्म - ०१/११/१९७९, कानपुर माता - श्रीमती शकुंतला मौर्य पिता - स्व. श्री राम सेवक मौर्य पत्नी - श्रीमती शीलू मौर्य शिक्षा ------अभियांत्रिकी में डिप्लोमा, इतिहास और दर्शन में स्नातक, प्रबंधन में पोस्ट डिप्लोमा. सम्प्रति------इंजिनियर, और स्वतंत्र लेखन. कृतियाँ------- 1) एक गली कानपुर की (उपन्यास) 2) अमलतास के फूल (उपन्यास) 3) संकटा प्रसाद के किस्से (व्यंग्य उपन्यास) 4) देवलदेवी (ऐतहासिक उपन्यास) 5) माई लास्ट अफ़ेयर (उपन्यास) 6) वर्जित (उपन्यास) 7) अरीबा (उपन्यास) 8) स्वीट सिकस्टीन (उपन्यास) 9) पहला शूद्र (पौराणिक उपन्यास) 10) बलि का राज आये (पौराणिक उपन्यास) 11) रावण वध के बाद (पौराणिक उपन्यास) 12) मणिकपाला महासम्मत (आदिकालीन उपन्यास) 13) हम्मीर हठ (ऐतिहासिक उपन्यास) 14) इंद्रप्रिया (ऐतिहासिक उपन्यास) 15) छिताई (ऐतिहासिक उपन्यास) 16) सिंधुसुता (ऐतिहासिक उपन्यास) 17) अधूरे पंख (कहानी संग्रह) 18) कर्ज और अन्य कहानियां (कहानी संग्रह) 19) ऐंजल जिया (कहानी संग्रह) 20) एक बेबाक लडकी (कहानी संग्रह) 21) हो न हो (काव्य संग्रह) 22) पाकिस्तान ट्रबुल्ड माईनरटीज (लेखिका - वींगस, सम्पादन - सुधीर मौर्य) पुरस्कार - कहानी 'एक बेबाक लड़की की कहानी' के लिए प्रतिलिपि २०१६ कथा उत्सव सम्मान। ईमेल ---------------sudheermaurya1979@rediffmail.com

3 thoughts on “उपन्यास : देवल देवी (कड़ी 60)

  • Vijay Kumar Singhal

    बहुत अच्छा उपन्यास ! लेखक को हार्दिक साधुवाद !

      • विजय कुमार सिंघल

        क्या हम इसको ई-बुक का रूप देकर वेबसाइट पर लगा सकते हैं?

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