कविता

तमन्नाओं के बल पर

तमन्नाओं के बल पर

हो जाते खड़े  महल

तो कोई झोंपड़ी न होती

गर उम्मीद से लहलहा

उठते हरे भरे खेत

तो भूखा कोई पेट न होता

तरसती कोई आँख न होती

अरमानों के सहारे  गर

बस जाती दिल की दुनिया

टूटा कोई दिल न होता

तड़पती कोई रूह न होती

मिटी न दिल से गर

मानवता की परत होती

तो धर्म को लेकर

कोई मांग न उजड़ती

कोई गोद न सूनी होती

प्रीत पलती दिलों में गर

तो खड़ी न नफरत की दीवारें होती

होती कितनी ज़िन्दगी खुशहाल

जो इन प्रश्नों की टंकार न होती

हर प्रश्न से जुड़ा उतर गर होता

हर दिशा दिशाहीन न होती

हर दिशा दिशाहीन न होती ||

— मीनाक्षी सुकुमारन

मीनाक्षी सुकुमारन

नाम : श्रीमती मीनाक्षी सुकुमारन जन्मतिथि : 18 सितंबर पता : डी 214 रेल नगर प्लाट न . 1 सेक्टर 50 नॉएडा ( यू.पी) शिक्षा : एम ए ( अंग्रेज़ी) & एम ए (हिन्दी) मेरे बारे में : मुझे कविता लिखना व् पुराने गीत ,ग़ज़ल सुनना बेहद पसंद है | विभिन्न अख़बारों में व् विशेष रूप से राष्टीय सहारा ,sunday मेल में निरंतर लेख, साक्षात्कार आदि समय समय पर प्रकशित होते रहे हैं और आकाशवाणी (युववाणी ) पर भी सक्रिय रूप से अनेक कार्यक्रम प्रस्तुत करते रहे हैं | हाल ही में प्रकाशित काव्य संग्रहों .....”अपने - अपने सपने , “अपना – अपना आसमान “ “अपनी –अपनी धरती “ व् “ निर्झरिका “ में कवितायेँ प्रकाशित | अखण्ड भारत पत्रिका : रानी लक्ष्मीबाई विशेषांक में भी कविता प्रकाशित| कनाडा से प्रकाशित इ मेल पत्रिका में भी कवितायेँ प्रकाशित | हाल ही में भाषा सहोदरी द्वारा "साँझा काव्य संग्रह" में भी कवितायेँ प्रकाशित |